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स्वतंत्रता दिवस पर विशेष : आजादी की लड़ाई में जेल गए थे दारुल उलूम के संस्थापक मौलाना कासिम नानौतवी

Thu, 13 Aug 2020 11:00 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2020 11:00 PM IST
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The founder of Darul Uloom went to jail in the freedom struggle
जामा मस्जिद के इमाम मौलवी जिक्रिया सिद्दीकी। - फोटो : SAHARANPUR
नानौता (सहारनपुर)। 1857 की क्रांति में क्रांतिकारियों के साथ ही देश भर के उलमा ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेकर अंग्रेजों के पांव उखाड़ने का काम किया था। 1857 की क्रांति में शामली में हुए स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में दारुल उलूम देवबंद के संस्थापक हजरत मौलाना कासिम नानौतवी और दिल्ली कॉलेज वर्तमान डीयू के संस्थापक मौलाना ममलूक अली नानौतवी ( हजरत मौलाना कासिम नानौतवी के उस्ताद) के नेतृत्व में नानौता के जामा मस्जिद चौक पर क्रांति की रणनीति तैयार की थी।
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इस सभा में सहारनपुर, अंबेहटा, देवबंद, गंगोह, थानाभवन, कांधला सहित अन्य क्षेत्रों से उलमा ने शिरकत कर आंदोलन में अंग्रेजों को देश से बाहर खदेड़ने की हुंकार भरी। शामली में हुए आंदोलन में अंग्रेजी हुकूमत के साथ हुए संग्राम में काफी तादाद में उलमा की शहादत हुई। इसमें नानौता निवासी हाफिज जामिन शहीद (जिन्हें शहादत से पूर्व ही शहीद कहा जाता था) भी शामिल रहे। सभी शहीदों को थानाभवन में सुपुर्द ए खाक किया। इस स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारी संख्या में उलमा को जेल भी जाना पड़ा था, लेकिन उनके हौसले परस्त नहीं हुए। नानौता की जामा मस्जिद के इमाम और बुजुर्ग व्यक्ति मौलवी जिक्रिया सिद्दीकी ने बताया कि उन्होंने अपने बड़े बुजुर्गों से सुना है कि अंग्रेजों के साथ सन 1857 में हुए स्वतंत्रता संग्राम के दौरान नगर में जामा मस्जिद चौक पर उलमा की सभा में हजरत मौलाना कासिम नानौतवी साहब ने आंदोलन को सफल बनाने के साथ साथ देशवासियों को शिक्षा के महत्व को समझाते हुए कहा था कि अंग्रेजों को देश से बाहर निकालने के लिए सभी धर्मों के लोगों के एकजुट होने के साथ ही गुलामी को खत्म करने के लिए शिक्षा भी बहुत जरूरी है। शामली में हुए आंदोलन के दौरान अंग्रेजी हुकूमत ने हजरत मौलाना कासिम नानौतवी को गिरफ्तार कर बरेली की जेल में भेजा था। जेल से छूटने के बाद ही हजरत मौलाना कासिम नानौतवी साहब ने विश्व विख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद स्थापना की। इसकी शुरुआत एक छप्पर में कई गई।
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