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ग्रामीणों की पहल से तैयार हुआ सूबे का पहला जैव विविधता पार्क

Sun, 15 May 2022 11:28 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 15 May 2022 11:28 PM IST
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The first Biodiversity Park of the state was prepared with the initiative of the villagers
ग्रामीणों की पहल से तैयार हुआ सूबे का पहला जैव विविधता पार्क
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सहारनपुर। ग्रामीणों की पहल पर गांव कोठरी बहलोलपुर में 120 हेक्टेयर भूमि में प्रदेश का पहला जैव विविधता पार्क बनकर तैयार हो गया है। इसमें करीब 300 प्रजातियों के जीव और तितलियों की नई प्रजाति पनप रही हैं और पौधों की शाखाओं पर वास करने वाले कीड़ों को संरक्षण मिल रहा है। यह सब संभव हुआ है ग्राम पंचायत, ग्रामीणों और विशेषज्ञों के सामूहिक प्रयास से।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार साल पहले एक संदेश में भारतीय परंपरा में प्रकृति के प्रति अपार प्रेम के संदेश का जिक्र करते हुए देशवासियों से भारत की जैव विविधता का संरक्षण करने की अपील की थी। पीएम की अपील पर शिवालिक की पहाड़ियों की तलहटी में बसे कोठरी बहलोलपुर गांव के तत्कालीन प्रधान ताहिर ने ग्राम पंचायत की 120 हेक्टेयर भूमि को जैव विविधता पार्क के लिए आरक्षित करा दिया। पांच नवंबर 2018 को तत्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त प्रभात कुमार, पद्मश्री अनिल जोशी, मुख्य वन संरक्षक मंडलायुक्त सहारनपुर व डॉ. उमर सैफ ने परियोजना का शिलान्यास किया। वर्तमान में ग्राम प्रधान कंवरपाल और सचिव अजीत कुमार, तकनीकी सहायक अश्वनी सैनी ने इस कार्य को आगे बढ़ाया। शुरूआत से जुड़े ग्राम पंचायत सचिव अजीत कुमार ने बताया कि इसके लिए पंचायत ने एक प्रबंध समिति का गठन किया था और समय से पहले परिवास बनकर तैयार हो गया है।
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इनके सहयोग से परवान चढ़ी परियोजना
ग्रीन इंडिया कॉर्पोरेशन हिमालयन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक डॉ. उमर सैफ और उनकी टीम ने प्राकृतिक संसाधन जुटाने और योजना बनाने में सहायता की। जैव विविधता प्रबंधन समिति ने निर्माण के कार्य किए। तकनीकी सहायक ने इस्टीमेट बनाए। लेखपाल ने भूमि का चिन्हांकन किया। एनआरएलएम समूह सखियों ने जनजागरण किया।
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तितलियों के साथ ही हाथी भी करते हैं विचरण
करीब 120 हेक्टेयर भूमि जो अतिक्रमित थी, अब जीवों केे परिवास के रूप में विकसित हो रही है। करीब 300 से अधिक प्रजाति के विभिन्न जीव इसमें पनप रहे हैं। इनमें तितलियां, बीटल, मोल्सक, रेपटाइल, चील, विभिन्न प्रजातियों के हिरन, गुलदार और हाथी भी घूमते देखे जा सकते हैं। चूंकि पार्क पहाड़ से सटा हुआ है ऐसे में यहां बड़ी संख्या में प्रजातियां पनप रही हैं।
ग्रामीणों का मिल रहा सहयोग : प्रधान
ग्राम प्रधान कंवरपाल का कहना है कि जैव विविधता परिवास को सीमा यानी तार बाड़ या दीवारों से नहीं बांधा जा सकता। क्योंकि यहां कुछ प्रजाति ऐसी भी हैं, जिनको प्रवेश के लिए कोई बाधा नहीं चाहिए। ग्रामीणों से उक्त क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करने की अपील की गई है और लोग सहयोग कर रहे हैं।
दिखने लगे विलुप्त प्रजाति के जीव : योगी
ग्रामवासी योगी धर्मनाथ का कहना है कि किसी समय में गांव के आसपास तमाम प्रजाति के जीव और जंतु रहते थे, लेकिन समय के साथ सब विलुप्त होते चले गए। केवल किताबों में उनके चित्र देखने को मिलते हैं, कुछ विलुप्त प्रजाति की तितली और अन्य जीव देखने को मिल रहे हैं।

- जैव विविधता परिवास की स्थापना की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें सबसे पहले सूक्ष्म पौधे और सूक्ष्म जीवों को बसाया और बसने का माहौल दिया जाता है। इसके बाद कदम दर कदम बड़े पौधे और पेड़ और जीव से लेकर जानवरों तक के लिए माहौल तैयार किया जाता है। प्रकृति में सभी जीव, जिनमें मनुष्य भी शामिल हैं, किसी ना किसी रूप में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।
डॉ. उमर सैफ, पर्यावरण विशेषज्ञ, ग्राम पंचायत कोठरी बहलोलपुर।
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