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संत बाबा हरिदास के मेले में उमड़े श्रद्धालु
ब्यूरो/अमर उजाला, गंगोह
Updated Tue, 28 Mar 2017 02:12 AM IST
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संत बाबा हरिदास की प्रतिमा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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संत बाबा हरिदास मंदिर पर लगने वाला परंपरागत मेला सोमवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ आरंभ हो गया। श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर मन्नतें मांगी। वहीं, कई श्रद्धालुओं ने मन्नत पूरी होने पर बाबा को चादर चढ़ाई।
मेले का शुभारंभ प्रभात फेरी के बाद धर्मध्वजा प्रतिष्ठापित कर किया गया। श्री अस्थल मंदिर से प्रभात फेरी के साथ धर्मध्वजा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई बाबा हरिदास मंदिर लाकर प्रतिस्थापित की गई। बाबा के दर्शनों को सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं कतारें लग गई थी।
जो देर शाम तक लगी रही। बाबा के दर्शनों के साथ ही श्रद्धालुओं ने उनकी पादुकाओं का जलाभिषेक किया। मंदिर के बराबर में स्थित बाबा के धूने पर भी श्रद्धालुओं ने माथा टेका। किंवदती है कि बाबा के चरणों में बैठकर सच्चे मन से मांगी गई मुराद बहुत जल्द पूरी हो जाती है। उधर, गांव मोहनपुरा स्थित बाबा की समाधि स्थल में भी श्रद्धालुओं ने जाकर माथा टेका।
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सेवाभाव और त्याग की प्रतिमूर्ति थे बाबा हरिदास
संत बाबा हरिदास सेवाभाव और त्याग की प्रतिमूर्ति थे। उनके और हजरत कुतबे आलम के बीच गहरा दोस्ताना रिश्ता था। दोनों के बीच इतना प्यार रहा कि हजरत कुतबे आलम शेख अब्दुल्ल कुद्दुस के गंगोह आगमन पर उन्होंने अतिथि सत्कार धर्म का निर्वाह करते हुए सराय पट्टी स्थित अपनी कुटिया हजरत के लिए खाली कर दी थी, जिसमें हजरत ने लंबे अरसे तक वास करते हुए अल्लाह की बंदगी की। वर्तमान में भी दरगाह के एक कोने में बाबा हरिदास की कुटिया स्थित है। जिसे हुजरा कहा जाता है। उर्स के मौके पर बाकायदा संत बाबा हरिदास के पास निमंत्रण भेजने की परंपरा आज तक जारी है।
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मेले का शुभारंभ प्रभात फेरी के बाद धर्मध्वजा प्रतिष्ठापित कर किया गया। श्री अस्थल मंदिर से प्रभात फेरी के साथ धर्मध्वजा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई बाबा हरिदास मंदिर लाकर प्रतिस्थापित की गई। बाबा के दर्शनों को सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं कतारें लग गई थी।
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जो देर शाम तक लगी रही। बाबा के दर्शनों के साथ ही श्रद्धालुओं ने उनकी पादुकाओं का जलाभिषेक किया। मंदिर के बराबर में स्थित बाबा के धूने पर भी श्रद्धालुओं ने माथा टेका। किंवदती है कि बाबा के चरणों में बैठकर सच्चे मन से मांगी गई मुराद बहुत जल्द पूरी हो जाती है। उधर, गांव मोहनपुरा स्थित बाबा की समाधि स्थल में भी श्रद्धालुओं ने जाकर माथा टेका।
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सेवाभाव और त्याग की प्रतिमूर्ति थे बाबा हरिदास
संत बाबा हरिदास सेवाभाव और त्याग की प्रतिमूर्ति थे। उनके और हजरत कुतबे आलम के बीच गहरा दोस्ताना रिश्ता था। दोनों के बीच इतना प्यार रहा कि हजरत कुतबे आलम शेख अब्दुल्ल कुद्दुस के गंगोह आगमन पर उन्होंने अतिथि सत्कार धर्म का निर्वाह करते हुए सराय पट्टी स्थित अपनी कुटिया हजरत के लिए खाली कर दी थी, जिसमें हजरत ने लंबे अरसे तक वास करते हुए अल्लाह की बंदगी की। वर्तमान में भी दरगाह के एक कोने में बाबा हरिदास की कुटिया स्थित है। जिसे हुजरा कहा जाता है। उर्स के मौके पर बाकायदा संत बाबा हरिदास के पास निमंत्रण भेजने की परंपरा आज तक जारी है।