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कोरोना काल में गणेश चतुर्थी रंग भी हुआ फीका
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मूर्ति कारोबारी मोनू कुमार
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। कोरोना काल की वजह से त्योहार भी फीके हो गए हैं। हर वर्ष इन दिनों गणपति बप्पा मोरया की गूंज होती थी और लोग अपने घरों में गणपति भगवान की मूर्ति स्थापित करते थे। इस बार बाजार में मूर्तियां कम बिक रही हैं। क्योंकि, शासन की गाइड लाइन के कारण कार्यक्रमों की अनुमति नहीं है।
शनिवार को श्री गणेश चतुर्थी है। इस दिन लोग भगवान श्री गणेश की मूर्ति का पूजन कर घरों में स्थापित करते थे। इसके अलावा शहर के मोर गंज बाजार, पेपर मिल रोड के राज विहार, आवास विकास के हरि मंदिर, खलासी लाइन, श्री भूतेश्वर नगर क्षेत्र के अलावा कई जगहों पर बड़े कार्यक्रम होते थे। यहां पर दस 20 फुट ऊंची मूर्तियों की स्थापना की जाती थी। पूजन के बाद मूर्तियों का नदियों में विसर्जन अलग-अलग दिनों में किया जाता था और ढोल व डीजे की धुन पर अबीर गुलाल उड़ाते हुए शोभा यात्राएं निकाली जाती थीं।
इसके अलावा घरों में भी लोग कार्यक्रम आयोजित कर अलग-अलग दिनों में गंगोह रोड और अंबाला रोड स्थित पूर्वी यमुना नहर पर मूर्ति का विसर्जन करते थे, लेकिन इस बार कोरोना काल की वजह से कार्यक्रमों की अनुमति नहीं है।
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बीते वर्ष की तरह नहीं बिक्री
सहारनपुर। नवाब गंज चौक के मूर्ति कारोबारी मोनू ने बताया कि उनके यहां आर्डर पर मूर्तियां तैयार की जाती हैं। सामान्य मूर्तियां तो 100 से लेकर दो हजार रुपये में बिकती थी, लेकिन इनसे बड़ी मूर्तियां आर्डर पर तैयार करते थे। बीते वर्ष छोटी और बड़ी सभी तरह की 800 से ज्यादा मूर्तियां बिक्री थी, इस बार काम कम है और न ही मूर्ति तैयार करने के आर्डर मिले हैं।
मूर्ति कारोबारी पवन कुमार ने बताया कि कोरोना काल का असर बाजार पर पड़ा है। कार्यक्रम नहीं हो रहे और न ही लोग मूर्ति लेने आ रहे हैं। वहीं, मेला गुघाल को लेकर भी बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज और गुरु गोरखनाथ की मूर्तियों की बिक्री होती थी, जो आर्डर पर तैयार की जाती थीं, लेकिन इस बार कोई आर्डर नहीं मिला है।
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शनिवार को श्री गणेश चतुर्थी है। इस दिन लोग भगवान श्री गणेश की मूर्ति का पूजन कर घरों में स्थापित करते थे। इसके अलावा शहर के मोर गंज बाजार, पेपर मिल रोड के राज विहार, आवास विकास के हरि मंदिर, खलासी लाइन, श्री भूतेश्वर नगर क्षेत्र के अलावा कई जगहों पर बड़े कार्यक्रम होते थे। यहां पर दस 20 फुट ऊंची मूर्तियों की स्थापना की जाती थी। पूजन के बाद मूर्तियों का नदियों में विसर्जन अलग-अलग दिनों में किया जाता था और ढोल व डीजे की धुन पर अबीर गुलाल उड़ाते हुए शोभा यात्राएं निकाली जाती थीं।
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इसके अलावा घरों में भी लोग कार्यक्रम आयोजित कर अलग-अलग दिनों में गंगोह रोड और अंबाला रोड स्थित पूर्वी यमुना नहर पर मूर्ति का विसर्जन करते थे, लेकिन इस बार कोरोना काल की वजह से कार्यक्रमों की अनुमति नहीं है।
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बीते वर्ष की तरह नहीं बिक्री
सहारनपुर। नवाब गंज चौक के मूर्ति कारोबारी मोनू ने बताया कि उनके यहां आर्डर पर मूर्तियां तैयार की जाती हैं। सामान्य मूर्तियां तो 100 से लेकर दो हजार रुपये में बिकती थी, लेकिन इनसे बड़ी मूर्तियां आर्डर पर तैयार करते थे। बीते वर्ष छोटी और बड़ी सभी तरह की 800 से ज्यादा मूर्तियां बिक्री थी, इस बार काम कम है और न ही मूर्ति तैयार करने के आर्डर मिले हैं।
मूर्ति कारोबारी पवन कुमार ने बताया कि कोरोना काल का असर बाजार पर पड़ा है। कार्यक्रम नहीं हो रहे और न ही लोग मूर्ति लेने आ रहे हैं। वहीं, मेला गुघाल को लेकर भी बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज और गुरु गोरखनाथ की मूर्तियों की बिक्री होती थी, जो आर्डर पर तैयार की जाती थीं, लेकिन इस बार कोई आर्डर नहीं मिला है।

नवाबगंज चौक पर दुकान पर रखी भगवान श्री गणेश की मूर्तियां- फोटो : SAHARANPUR

मूर्ति कारोबारी पवन कुमार- फोटो : SAHARANPUR