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कारिंदो के बयानों से लगी इकबाल की बुलंदी में दीमक
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सहारनपुर के साउथ सिटी में सौरभ मुकुंद के मकान में कारो की जांच करती सीबीआई टीम
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। एक दौर था जब मोहम्मद इकबाल लकड़ी की टाल का मालिक था, लेकिन कुछ वर्षों में ही उसका साम्राज्य खड़ा हो गया। सहारनपुर में यूनिवर्सिटी तक बना दी, तो उत्तर प्रदेश की बंद पड़ी चीनी मिलें खरीद डालीं। अकूत संपत्ति इकट्ठा करने की इस चाहत में कदम दर कदम गलतियां हुईं। रही सही कसर मुखौटा कंपनियों में निदेशक बनाए गए कारिंदों के बयानों ने पूरी कर दी, जो इकबाल की बुलंद इमारत में दीमक लगने का जरिया बन गए। इसी वजह से मोहम्मद इकबाल और उसके करीबियों पर शिकंजा कसता चला गया।
दरअसल, उत्तर प्रदेश की बंद पड़ी चीनी मिलों को खरीदने के लिए मेसर्स नम्रता कंपनी प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स गिरियाशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड का सहारा लिया गया था। यह दोनों कंपनी किसी सुरेश कुमार गुप्ता से खरीदी गई थीं, लेकिन कंपनियों में डायरेक्टर बनाने से लेकर इनका संचालन दिखाने में गलतियां की गईं। मोहम्मद इकबाल के विरोधियों ने जब न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, तो इसकी जांच गंभीर कपट अन्वेषण विभाग (एसएफआईओ) ने की। जांच में पता चला कि कंपनी के शेयर सर्टिफिकेट और शेयर न तो आवंटित किए गए और न ही हस्तांतरित किए गए थे, यह अभिलेखों से जांच एजेंसी को पता चला था। बैलेंस शीट में दिखाई कंपनी का नेटवर्थ, संपत्ति एवं दायित्व की रकम काल्पनिक थी। कंपनी के खातों में कोई वास्तविक लेनदेन नहीं हुआ था। इसके अलावा गिरियाशो कंपनी में निदेशक बनाई गई सुमन शर्मा ने एक फरवरी 2017 को शपथपूर्वक बयान दिया था कि कंपनी के कार्यालय के रूप में जिस जगह का जिक्र किया है, वह उनका निजी आवास है तथा यहां कंपनी का कार्यालय संचालित नहीं है और न ही कोई कर्मचारी कार्य करता है। नम्रता कंपनी के निदेशक बनाए धर्मेंद्र गुप्ता ने भी 10 मार्च और 14 मार्च 2017 को जांच एजेंसी को बयान में बताया था कि वह तो दोनों कंपनी बेचने वाले सुरेश कुमार गुप्ता के यहां कर्मचारी था, उसी के इशारे पर निदेशक बनाया गया। यह सब बातों का उल्लेख 2017 में लखनऊ के गोमतीनगर थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में किया गया था।
इनके खिलाफ दर्ज हुई थी रिपोर्ट
राकेश शर्मा पुत्र केडी शर्मा, रोहिणी दिल्ली, धर्मेंद्र गुप्ता पुत्र सुरेंद्र गुप्ता इंदिरापुरम गाजियाबाद, सौरभ मुकुंद पुत्र मनमोहन निवासी साउथ सिटी सहारनपुर, मोहम्मद जावेद पुत्र मोहम्मद इकबाल निवासी मिर्जापुर, सहारनपुर सुमन शर्मा पत्नी राकेश शर्मा निवासी रोहिणी दिल्ली, मोहम्मद नसीम अहमद पत्र अब्दुल गफ्फार निवासी मिर्जापुर सहारनपुर, मोहम्मद वाजिद पत्र मोहम्मद इकबाल निवासी मिर्जापुर। उसमें धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का आरोप लगा था।
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- चार अप्रैल 2019 को सीबीआई को भेजा था पत्र
एसएफआईओ की जांच के बाद गोमतीनगर थाना लखनऊ में दर्ज रिपोर्ट की जांच सीबीआई को ट्रांसफर कराने के लिए गत चार अप्रैल 2019 को प्रदेश शासन के सचिव भगवान स्वरूप ने पुलिस अधीक्षक सीबीआई शाखा प्रमुख एसीबी लखनऊ को पत्र भेजा था। इसके बाद 25 अप्रैल को सीबीआई लखनऊ ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
- कंपनियां और उनके निदेशक
- मेसर्स नम्रता कंपनी प्राइवेट लिमिटेड में राकेश शर्मा, धर्मेंद्र गुप्ता, सौरभ मुकुंद और मोहम्मद जावेद को निदेशक बनाया गया था। इन निदेशकों में से मोहम्मद जावेद हाजी इकबाल का बेटा है।
- मेसर्स गिरियाशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड में सुमन शर्मा, धर्मेंद्र गुप्ता, मोहम्मद नसीम और मोहम्मद वाजिद को निदेशक बनाया गया था। इन निदेशकों में मोहम्मद वाजिद हाजी इकबाल का बेटा है।
यह चीनी मिलें खरीदी गई थीं
नम्रता कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के जरिये 11 अक्तूबर 2010 को देवरिया, बरेली और लक्ष्मीगंज (कुशीनगर) की चीनी मिलें खरीदी गई थीं, जबकि गिरियाशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के जरिए 19 अक्तूबर 2010 को रामकोला, छितौनी और बाराबंकी की चीनी मिल खरीदने के लिए आरएफक्यू (एक्सप्रेशन आफ इंट्रेस्ट कम रिक्वेस्ट फॉर क्वालि फिकेशन) प्रस्तुत किया था। निदेशकों द्वारा कंपनी की बैलेंस शीट लगाई थी, जिसके बाद शासन द्वारा गठित समिति ने सलाहकारों की संस्तुति के आधार पर दोनों कंपनियों को नीलामी प्रक्रिया के लिए अर्ह माना और विक्रय प्रक्रिया पूर्ण कराकर चीनी मिलें बिक्री कर दी गई थीं।
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दरअसल, उत्तर प्रदेश की बंद पड़ी चीनी मिलों को खरीदने के लिए मेसर्स नम्रता कंपनी प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स गिरियाशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड का सहारा लिया गया था। यह दोनों कंपनी किसी सुरेश कुमार गुप्ता से खरीदी गई थीं, लेकिन कंपनियों में डायरेक्टर बनाने से लेकर इनका संचालन दिखाने में गलतियां की गईं। मोहम्मद इकबाल के विरोधियों ने जब न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, तो इसकी जांच गंभीर कपट अन्वेषण विभाग (एसएफआईओ) ने की। जांच में पता चला कि कंपनी के शेयर सर्टिफिकेट और शेयर न तो आवंटित किए गए और न ही हस्तांतरित किए गए थे, यह अभिलेखों से जांच एजेंसी को पता चला था। बैलेंस शीट में दिखाई कंपनी का नेटवर्थ, संपत्ति एवं दायित्व की रकम काल्पनिक थी। कंपनी के खातों में कोई वास्तविक लेनदेन नहीं हुआ था। इसके अलावा गिरियाशो कंपनी में निदेशक बनाई गई सुमन शर्मा ने एक फरवरी 2017 को शपथपूर्वक बयान दिया था कि कंपनी के कार्यालय के रूप में जिस जगह का जिक्र किया है, वह उनका निजी आवास है तथा यहां कंपनी का कार्यालय संचालित नहीं है और न ही कोई कर्मचारी कार्य करता है। नम्रता कंपनी के निदेशक बनाए धर्मेंद्र गुप्ता ने भी 10 मार्च और 14 मार्च 2017 को जांच एजेंसी को बयान में बताया था कि वह तो दोनों कंपनी बेचने वाले सुरेश कुमार गुप्ता के यहां कर्मचारी था, उसी के इशारे पर निदेशक बनाया गया। यह सब बातों का उल्लेख 2017 में लखनऊ के गोमतीनगर थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में किया गया था।
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इनके खिलाफ दर्ज हुई थी रिपोर्ट
राकेश शर्मा पुत्र केडी शर्मा, रोहिणी दिल्ली, धर्मेंद्र गुप्ता पुत्र सुरेंद्र गुप्ता इंदिरापुरम गाजियाबाद, सौरभ मुकुंद पुत्र मनमोहन निवासी साउथ सिटी सहारनपुर, मोहम्मद जावेद पुत्र मोहम्मद इकबाल निवासी मिर्जापुर, सहारनपुर सुमन शर्मा पत्नी राकेश शर्मा निवासी रोहिणी दिल्ली, मोहम्मद नसीम अहमद पत्र अब्दुल गफ्फार निवासी मिर्जापुर सहारनपुर, मोहम्मद वाजिद पत्र मोहम्मद इकबाल निवासी मिर्जापुर। उसमें धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का आरोप लगा था।
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- चार अप्रैल 2019 को सीबीआई को भेजा था पत्र
एसएफआईओ की जांच के बाद गोमतीनगर थाना लखनऊ में दर्ज रिपोर्ट की जांच सीबीआई को ट्रांसफर कराने के लिए गत चार अप्रैल 2019 को प्रदेश शासन के सचिव भगवान स्वरूप ने पुलिस अधीक्षक सीबीआई शाखा प्रमुख एसीबी लखनऊ को पत्र भेजा था। इसके बाद 25 अप्रैल को सीबीआई लखनऊ ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
- कंपनियां और उनके निदेशक
- मेसर्स नम्रता कंपनी प्राइवेट लिमिटेड में राकेश शर्मा, धर्मेंद्र गुप्ता, सौरभ मुकुंद और मोहम्मद जावेद को निदेशक बनाया गया था। इन निदेशकों में से मोहम्मद जावेद हाजी इकबाल का बेटा है।
- मेसर्स गिरियाशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड में सुमन शर्मा, धर्मेंद्र गुप्ता, मोहम्मद नसीम और मोहम्मद वाजिद को निदेशक बनाया गया था। इन निदेशकों में मोहम्मद वाजिद हाजी इकबाल का बेटा है।
यह चीनी मिलें खरीदी गई थीं
नम्रता कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के जरिये 11 अक्तूबर 2010 को देवरिया, बरेली और लक्ष्मीगंज (कुशीनगर) की चीनी मिलें खरीदी गई थीं, जबकि गिरियाशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के जरिए 19 अक्तूबर 2010 को रामकोला, छितौनी और बाराबंकी की चीनी मिल खरीदने के लिए आरएफक्यू (एक्सप्रेशन आफ इंट्रेस्ट कम रिक्वेस्ट फॉर क्वालि फिकेशन) प्रस्तुत किया था। निदेशकों द्वारा कंपनी की बैलेंस शीट लगाई थी, जिसके बाद शासन द्वारा गठित समिति ने सलाहकारों की संस्तुति के आधार पर दोनों कंपनियों को नीलामी प्रक्रिया के लिए अर्ह माना और विक्रय प्रक्रिया पूर्ण कराकर चीनी मिलें बिक्री कर दी गई थीं।