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Saharanpur News: हाथों के हुनर को तकनीक का सहारा, निखर रही नक्काशी
Tue, 07 Jul 2026 01:19 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 07 Jul 2026 01:19 AM IST
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सहारनपुर। लकड़ी पर नक्काशी की पहचान रखने वाला जिला अब परंपरागत हुनर और आधुनिक तकनीक का अनोखा संगम बनता जा रहा है। कभी महीनों तक हाथों की बारीक कारीगरी से तैयार होने वाले उत्पाद अब लेजर और सीएनसी मशीनों की मदद से कुछ घंटों या एक-दो दिन में तैयार हो रहे हैं। इससे गुणवत्ता, एकरूपता और समयबद्ध आपूर्ति में बड़ा सुधार आया है। हालांकि मशीनों ने रफ्तार बढ़ाई है, लेकिन नए डिजाइन गढ़ने और कलात्मक नक्काशी की आत्मा आज भी कारीगरों के हाथों में ही बसती है।
जिले में लकड़ी पर हाथों से नक्काशी का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। पहले जहां कारीगर हाथों के हुनर से लकड़ी पर नक्काशी करते थे, वहीं अब समय बदलने और तकनीक के उच्च होने के बाद मशीनों का इस्तेमाल वुडन हैंडीक्राफ्ट में भी होने लगा है। इसके लिए लेजर और सीएनसी मशीन इस्तेमाल में लाई जा रही है। लेजर मशीन से लकड़ी पर बारीक नक्काशी की जाती है। सीएनसी मशीन के जरिये लकड़ी पर कटिंग की जाती है। इन मशीन का फायदा यह है कि लेजर से नक्काशी होने पर वह एक समान होती है।
इसमें बदलाव नहीं होता। वहीं, सीएनसी मशीन से कटिंग भी एक समान होती है। मशीनों के जरिये यह तकनीक फर्नीचर, घर की सजावट का सामान, आभूषण, साइनबोर्ड और हाथ के जरिये कारीगरी और कटिंग करने के मुकाबले इसमें समय भी कम लगता है, साथ ही नक्काशी के टूटने का भी डर नहीं रहता। लेजर मशीन की कीमत करीब साढ़े तीन से चार लाख और सीएनसी मशीन की कीमत सात से आठ लाख रुपये हैं।
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- समय पर पूरे हो रहे ऑर्डर
लेजर और सीएनसी मशीन के उद्योग में इस्तेमाल से उद्यमियों को भी फायदा हो रहा है। मशीनों के इस्तेमाल से समय से ऑर्डर पूरे हो रहे हैं, साथ ही निर्यात होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। हाथ से किसी उत्पाद को तैयार करने में कम से कम एक सप्ताह लगता है। यदि डिजाइन जटिल है तो 15 से महीना भी लग जाता है, लेकिन मशीन और तकनीक से यह समय घटकर एक से दो दिन और कुछ घंटे रह गया है।
- हाथ की नक्काशी की अभी भी पसंद
वुडन हैंडीक्राफ्ट एसोसिएशन के महासचिव और उद्यमी आरिफ खान बताते हैं कि मशीनों और तकनीक ने काम तो आसान किया है, लेकिन अभी भी नए डिजाइन के लिए कारीगरों पर निर्भरता है। हाथ की नक्काशी को अभी भी लोग अधिक पसंद करते हैं।
- उद्यमी और निर्यातक मयंक अग्रवाल बताते हैं कि लेजर मशीन के इस्तेमाल से नक्काशी काफी आसान हो गई है। कारीगरों को भी अब उत्पाद तैयार करने में काफी कम समय लगता है। इससे उद्योग को काफी फायदा भी हो रहा है।
- कारीगर अरशद बताते हैं कि पहले जहां एक उत्पाद को तैयार करने में काफी समय लग जाता था, लेकिन अब तकनीक के इस्तेमाल से काफी कम समय में उत्पाद बनकर तैयार हो रहा है।
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जिले में लकड़ी पर हाथों से नक्काशी का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। पहले जहां कारीगर हाथों के हुनर से लकड़ी पर नक्काशी करते थे, वहीं अब समय बदलने और तकनीक के उच्च होने के बाद मशीनों का इस्तेमाल वुडन हैंडीक्राफ्ट में भी होने लगा है। इसके लिए लेजर और सीएनसी मशीन इस्तेमाल में लाई जा रही है। लेजर मशीन से लकड़ी पर बारीक नक्काशी की जाती है। सीएनसी मशीन के जरिये लकड़ी पर कटिंग की जाती है। इन मशीन का फायदा यह है कि लेजर से नक्काशी होने पर वह एक समान होती है।
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इसमें बदलाव नहीं होता। वहीं, सीएनसी मशीन से कटिंग भी एक समान होती है। मशीनों के जरिये यह तकनीक फर्नीचर, घर की सजावट का सामान, आभूषण, साइनबोर्ड और हाथ के जरिये कारीगरी और कटिंग करने के मुकाबले इसमें समय भी कम लगता है, साथ ही नक्काशी के टूटने का भी डर नहीं रहता। लेजर मशीन की कीमत करीब साढ़े तीन से चार लाख और सीएनसी मशीन की कीमत सात से आठ लाख रुपये हैं।
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- समय पर पूरे हो रहे ऑर्डर
लेजर और सीएनसी मशीन के उद्योग में इस्तेमाल से उद्यमियों को भी फायदा हो रहा है। मशीनों के इस्तेमाल से समय से ऑर्डर पूरे हो रहे हैं, साथ ही निर्यात होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। हाथ से किसी उत्पाद को तैयार करने में कम से कम एक सप्ताह लगता है। यदि डिजाइन जटिल है तो 15 से महीना भी लग जाता है, लेकिन मशीन और तकनीक से यह समय घटकर एक से दो दिन और कुछ घंटे रह गया है।
- हाथ की नक्काशी की अभी भी पसंद
वुडन हैंडीक्राफ्ट एसोसिएशन के महासचिव और उद्यमी आरिफ खान बताते हैं कि मशीनों और तकनीक ने काम तो आसान किया है, लेकिन अभी भी नए डिजाइन के लिए कारीगरों पर निर्भरता है। हाथ की नक्काशी को अभी भी लोग अधिक पसंद करते हैं।
- उद्यमी और निर्यातक मयंक अग्रवाल बताते हैं कि लेजर मशीन के इस्तेमाल से नक्काशी काफी आसान हो गई है। कारीगरों को भी अब उत्पाद तैयार करने में काफी कम समय लगता है। इससे उद्योग को काफी फायदा भी हो रहा है।
- कारीगर अरशद बताते हैं कि पहले जहां एक उत्पाद को तैयार करने में काफी समय लग जाता था, लेकिन अब तकनीक के इस्तेमाल से काफी कम समय में उत्पाद बनकर तैयार हो रहा है।