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शिक्षकों ने विज्ञान के सिद्घांतों को प्रयोगात्मक तरीके से समझा
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अनु
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में सोमवार से शुरू हुई पांच दिवसीय विज्ञान शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यशाला में शिक्षकों का अनुभव अलग ही रहा। कार्यशाला इतनी रोचक रही कि राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के 40 शिक्षक विद्यार्थी की तरह छह घंटे तक कार्यशाला से जुड़े रहे। शिक्षकों ने विज्ञान के सिद्धांतों को पहली बार प्रयोगात्मक तरीके से समझा।
कार्यशाला का शुभारंभ संयुक्त शिक्षा निदेशक आरपी शर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक रवि दत्त, राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य शोभा चौधरी और मास्टर ट्रेनर दीपक शर्मा ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती की मूर्ति के समक्ष दीप जलाकर और माल्यार्पण कर किया। इसके बाद मास्टर ट्रेनर दीपक शर्मा ने कम लागत में विज्ञान शिक्षण और प्रयोगात्मक सामग्री बनाने की जानकारी शिक्षकों को दी। दीपक शर्मा ने आज सबसे पहले एक पाइप की मदद से हथेली में छेद करके दिखाया, फिर उसके रहस्य को बताया। इसके बाद रस्सी में ईंट का टुकड़ा बांधकर उसे पाइप के बीच से निकालकर हेलिकाप्टर के उड़ने के सिद्धांत को समझाया। उन्होंने कम कीमत (मुश्किल से एक रुपया) में स्ट्रा और कागज के टुकड़े से बाजा बनाकर और शिक्षकों से बनवाकर व बजवाकर दिखाया। उन्होंने बाजा बजने के पीछे के सिद्धांत को भी प्रयोगात्मक तरीके से समझाया। प्लास्टिक की खोखली बाल और स्ट्रा से जेम्स वाट के भाप के इंजन की कल्पना को साकार करते दिखा और उसके सिद्धांत को समझाया। अंत में सौर घड़ी बनाने के लिए पांच ग्रुप बनाए। दीपक शर्मा ने बताया कि मंगलवार की कार्यशाला सुबह नौ बजे से शुरू होगी।
प्रशिक्षणार्थी शिक्षकों की बात
अब बच्चों को ऐसे ही पढ़ाऊंगी
राजकीय इंटर कॉलेज कैलाशपुर की भौतिक विज्ञान विषय की प्रवक्ता टीना सराव कार्यशाला को लेकर काफी उत्सुक नजर आईं। उनका कहना है कि कार्यशाला में उन्होंने यह सीखा है कि कैसे विज्ञान के बड़े से बड़े सिद्धांतों को प्रयोगात्मक तरीके से बच्चों को आसानी से समझाया जा सकता है।
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प्रोफेसर तक ने ऐसे नहीं पढ़ाया
राजकीय हाई स्कूल, टाबर में बायोलॉजी की सहायक शिक्षक तनु सैनी कार्यशाला के पहले दिन ही काफी खुश दिखीं। उनका कहना है कि वह पीएचडी हैं। विज्ञान विषय को लगातार पढ़ा है और अब पढ़ा भी रही हैं, लेकिन इतने रोचक तरीके से कभी प्रोफेसर ने भी नहीं पढ़ाया। उनका कहना है कि वह अब बच्चों को प्रयोगात्मक तरीके से ही पढ़ाएंगी।
प्रेक्टिकल के साथ पढ़ाई से बोर नहीं होते बच्चे
राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, पुल जोगियान की गणित और विज्ञान की शिक्षक रश्मि मेहता कई साल से पढ़ा रही हैं। खाली किताब पढ़ाने से बच्चे बोर हो जाते हैं और अक्सर कक्षा ही में सो जाते हैं। यदि हम कार्यशाला में बताए तरीके से यानी प्रयोगात्मक तरीके से बच्चों को पढ़ाएंगे तो वह पढ़ाई से जुड़ेंगे और बेहतरी तरीके से समझेंगे भी।
वेस्ट सामान से प्रयोग करना सीखा
राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, देवला की गणित एवं विज्ञान की शिक्षक अनु का कहना है कि कार्यशाला में उन्होंने सीखा कि किस तरह वेस्ट सामान, जिसे कचरा भी कह सकते हैं, से चीजें लेकर हम विज्ञान के प्रयोग कर सकते हैं। वह इस पर जरूर काम करेंगी।
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कार्यशाला का शुभारंभ संयुक्त शिक्षा निदेशक आरपी शर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक रवि दत्त, राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य शोभा चौधरी और मास्टर ट्रेनर दीपक शर्मा ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती की मूर्ति के समक्ष दीप जलाकर और माल्यार्पण कर किया। इसके बाद मास्टर ट्रेनर दीपक शर्मा ने कम लागत में विज्ञान शिक्षण और प्रयोगात्मक सामग्री बनाने की जानकारी शिक्षकों को दी। दीपक शर्मा ने आज सबसे पहले एक पाइप की मदद से हथेली में छेद करके दिखाया, फिर उसके रहस्य को बताया। इसके बाद रस्सी में ईंट का टुकड़ा बांधकर उसे पाइप के बीच से निकालकर हेलिकाप्टर के उड़ने के सिद्धांत को समझाया। उन्होंने कम कीमत (मुश्किल से एक रुपया) में स्ट्रा और कागज के टुकड़े से बाजा बनाकर और शिक्षकों से बनवाकर व बजवाकर दिखाया। उन्होंने बाजा बजने के पीछे के सिद्धांत को भी प्रयोगात्मक तरीके से समझाया। प्लास्टिक की खोखली बाल और स्ट्रा से जेम्स वाट के भाप के इंजन की कल्पना को साकार करते दिखा और उसके सिद्धांत को समझाया। अंत में सौर घड़ी बनाने के लिए पांच ग्रुप बनाए। दीपक शर्मा ने बताया कि मंगलवार की कार्यशाला सुबह नौ बजे से शुरू होगी।
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प्रशिक्षणार्थी शिक्षकों की बात
अब बच्चों को ऐसे ही पढ़ाऊंगी
राजकीय इंटर कॉलेज कैलाशपुर की भौतिक विज्ञान विषय की प्रवक्ता टीना सराव कार्यशाला को लेकर काफी उत्सुक नजर आईं। उनका कहना है कि कार्यशाला में उन्होंने यह सीखा है कि कैसे विज्ञान के बड़े से बड़े सिद्धांतों को प्रयोगात्मक तरीके से बच्चों को आसानी से समझाया जा सकता है।
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प्रोफेसर तक ने ऐसे नहीं पढ़ाया
राजकीय हाई स्कूल, टाबर में बायोलॉजी की सहायक शिक्षक तनु सैनी कार्यशाला के पहले दिन ही काफी खुश दिखीं। उनका कहना है कि वह पीएचडी हैं। विज्ञान विषय को लगातार पढ़ा है और अब पढ़ा भी रही हैं, लेकिन इतने रोचक तरीके से कभी प्रोफेसर ने भी नहीं पढ़ाया। उनका कहना है कि वह अब बच्चों को प्रयोगात्मक तरीके से ही पढ़ाएंगी।
प्रेक्टिकल के साथ पढ़ाई से बोर नहीं होते बच्चे
राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, पुल जोगियान की गणित और विज्ञान की शिक्षक रश्मि मेहता कई साल से पढ़ा रही हैं। खाली किताब पढ़ाने से बच्चे बोर हो जाते हैं और अक्सर कक्षा ही में सो जाते हैं। यदि हम कार्यशाला में बताए तरीके से यानी प्रयोगात्मक तरीके से बच्चों को पढ़ाएंगे तो वह पढ़ाई से जुड़ेंगे और बेहतरी तरीके से समझेंगे भी।
वेस्ट सामान से प्रयोग करना सीखा
राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, देवला की गणित एवं विज्ञान की शिक्षक अनु का कहना है कि कार्यशाला में उन्होंने सीखा कि किस तरह वेस्ट सामान, जिसे कचरा भी कह सकते हैं, से चीजें लेकर हम विज्ञान के प्रयोग कर सकते हैं। वह इस पर जरूर काम करेंगी।

टीना- फोटो : SAHARANPUR

रश्मि- फोटो : SAHARANPUR

तनु सैनी- फोटो : SAHARANPUR

राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में आयोजित विज्ञान पर कार्यशाला में भाग लेते शिक्षक- फोटो : SAHARANPUR