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सर्दियों में रखें दिल का विशेष ख्याल
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एसबीडी जिला अस्पताल में मरीज को देखते डॉ. अनिल वोहरा।
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। सर्दी बढ़ने के साथ ही उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या में एकाएक बढ़ोत्तरी हुई है। फिजीशियन की ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों में बीते एक सप्ताह में बीपी के मरीजों की संख्या बढ़ी है। चिकित्सकों की मानें तो इन दिनों बीपी के मरीजों की लापरवाही उन्हें खतरे में डाल सकती है।
एसबीडी जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. सतीश कुमार और डॉ. अनिल वोहरा ने बताया कि प्रतिदिन ओपीडी में 100 के आसपास मरीज पहुंच रहे हैं। मगर इनमें ज्यादातर बीपी और शुगर के मरीज हैं। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी ने बताया कि सर्दियों में केटीकोलामीन का रिसाव बढ़ जाता है, जो बीपी बढ़ने का मुख्य कारण है। यदि बीपी की अनदेखी की जाए तो यह ब्रेन हैमरेज या दिल का दौरा पड़ने की वजह बन सकता है। ऐसे में मरीजों को दिल और बीपी की दवा नहीं छोड़नी चाहिए। अच्छे चिकित्सक की सलाह से दवा लेनी चाहिए।
इन लोगों को अधिक खतरा
- धूम्रपान करने वालों और अधिक नमक खाने वालों।
- अधिक शराब पीने वालों और मोटे लोग।
- अधिक गुस्सा या अधिक चिंता करने वालों को।
- डायबिटीज के मरीजों या फिर व्यायाम नहीं करने वालों को।
बीपी बढ़ने के लक्षण
- सिर में दर्द रहना और चक्कर आना।
- दिल का घबराना, उल्टी आना और छाती में दर्द होना।
हाई बीपी के दुष्प्रभाव
- दिल का दौरा पड़ना, दिल का फेल होना, धड़कन का रुक जाना या दिल का फेल हो जाना।
- दिमाग की नस का बंद होकर फट जाना, जिसकी वजह से पैरालाइसिस होना।
- गुर्दे फेल हो जाना या हाथों व पैरों का फूल जाना।
- आंखों का पर्दा खराब होना या आंख में खून का थक्का जम जाना।
- टांगों की नसों में खून जमाव की वजह से दर्द रहना या नाक की नस का फटना।
हाई बीपी के लोग यह करें
- 24 घंटे में छह ग्राम से अधिक नमक न खाएं।
- पापड़, चटनी, बरगर, चिप्स, अचार, फ्राई पनीर कम से कम खाएं।
- धूम्रपान, तंबाकू और शराब का सेवन नहीं करें।
- तली हुई चीजों तथा चिकनाई से परहेज रखें।
- मोटापा कम करने के लिए व्यायाम करें।
- प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा व्यायाम करें।
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एसबीडी जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. सतीश कुमार और डॉ. अनिल वोहरा ने बताया कि प्रतिदिन ओपीडी में 100 के आसपास मरीज पहुंच रहे हैं। मगर इनमें ज्यादातर बीपी और शुगर के मरीज हैं। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी ने बताया कि सर्दियों में केटीकोलामीन का रिसाव बढ़ जाता है, जो बीपी बढ़ने का मुख्य कारण है। यदि बीपी की अनदेखी की जाए तो यह ब्रेन हैमरेज या दिल का दौरा पड़ने की वजह बन सकता है। ऐसे में मरीजों को दिल और बीपी की दवा नहीं छोड़नी चाहिए। अच्छे चिकित्सक की सलाह से दवा लेनी चाहिए।
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इन लोगों को अधिक खतरा
- धूम्रपान करने वालों और अधिक नमक खाने वालों।
- अधिक शराब पीने वालों और मोटे लोग।
- अधिक गुस्सा या अधिक चिंता करने वालों को।
- डायबिटीज के मरीजों या फिर व्यायाम नहीं करने वालों को।
बीपी बढ़ने के लक्षण
- सिर में दर्द रहना और चक्कर आना।
- दिल का घबराना, उल्टी आना और छाती में दर्द होना।
हाई बीपी के दुष्प्रभाव
- दिल का दौरा पड़ना, दिल का फेल होना, धड़कन का रुक जाना या दिल का फेल हो जाना।
- दिमाग की नस का बंद होकर फट जाना, जिसकी वजह से पैरालाइसिस होना।
- गुर्दे फेल हो जाना या हाथों व पैरों का फूल जाना।
- आंखों का पर्दा खराब होना या आंख में खून का थक्का जम जाना।
- टांगों की नसों में खून जमाव की वजह से दर्द रहना या नाक की नस का फटना।
हाई बीपी के लोग यह करें
- 24 घंटे में छह ग्राम से अधिक नमक न खाएं।
- पापड़, चटनी, बरगर, चिप्स, अचार, फ्राई पनीर कम से कम खाएं।
- धूम्रपान, तंबाकू और शराब का सेवन नहीं करें।
- तली हुई चीजों तथा चिकनाई से परहेज रखें।
- मोटापा कम करने के लिए व्यायाम करें।
- प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा व्यायाम करें।

जिला अस्पताल में फिजीशियन की ओपीडी के बाहर जमा मरीज।- फोटो : SAHARANPUR
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