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छात्र सिद्धार्थ ने बनाया सोशल नेटवर्क एप
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- छात्र सिद्धार्थ त्यागी ने बनाया सोशल नेटवर्क एप
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। कक्षा 12वीं में पढ़ाई करते हुए छात्र सिद्धार्थ त्यागी ने सोशल नेटवर्क एप तैयार कर दिया। इसे तैयार करने में उसे करीब डेढ़ साल का समय लगा। सिद्धार्थ का कहना है कि यह एप एनॉनिमस लोकेशन पर आधारित है, जिसमें अब तक 300 से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं।
गांव सरसोहेड़ी निवासी सिद्धार्थ त्यागी के पिता प्रवीन त्यागी फैक्टरी में नौकरी करते हैं। बीते परीक्षा परिणाम में ही सिद्धार्थ ने सेंट मैरी एकेडमी से इंटर उत्तीर्ण की, लेकिन इसी दौरान उसने एप बनाने का कार्य शुरू कर दिया था। इस एप को सिद्धार्थ ने स्टोमेंट नाम दिया है। सिद्धार्थ का दावा है कि यह एप अन्य एप से ज्यादा कारगर है, जो स्थानीय लोगों को जोड़ने और उनके कार्यक्रम आदि को प्रसारित करने में मददगार है। यह एप करीब ढाई किलोमीटर के एरिया में रहने वाले लोगों को आपस में जोड़ता है और एकता को बढ़ावा देता है। सिद्धार्थ ने बताया कि कोरोना काल में उसने कुछ अलग करने की सोची थी। एप बनाने के लिए प्राइवेट कंपनी रजिस्टर्ड कराई और जीएसटी नंबर भी लिया। इस पर पिता प्रवीन त्यागी ने उसे पूरा सहयोग किया।
शिवांश ने बनाई थी वेबसाइट
कोरोना काल में घर में खाली बैठने के बजाय कुछ नया करने की सोच रखने वाले सहारनपुर में अन्य भी लोग हैं। ऐसे ही लोगों में छात्र शिवांश पंवार भी शामिल हैं, जो रामपुर मनिहारान क्षेत्र के रहने वाले हैं। शिवांश ने कोरोना काल में वेबसाइट बनाई थी, जिसके जरिये अस्पताल, ऑक्सीजन की उपलब्धता, ब्लड बैंक आदि की टेलीफोन और मोबाइल नंबर सहित जानकारी का डाटा तैयार किया था। वहीं, सहारनपुर शहर के रहने वाले अंश गर्ग ने मेरठ निवासी अपने दोस्त ऋषि गुप्ता और अवनी सिंह के साथ मिलकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म स्टूडोमैट्रिक्स कोविड-19 सहायता केंद्र बनाया था। इससे देशभर के युवाओं को जोड़ा था और कोरोना काल में जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाने में मददगार बने थे।
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गांव सरसोहेड़ी निवासी सिद्धार्थ त्यागी के पिता प्रवीन त्यागी फैक्टरी में नौकरी करते हैं। बीते परीक्षा परिणाम में ही सिद्धार्थ ने सेंट मैरी एकेडमी से इंटर उत्तीर्ण की, लेकिन इसी दौरान उसने एप बनाने का कार्य शुरू कर दिया था। इस एप को सिद्धार्थ ने स्टोमेंट नाम दिया है। सिद्धार्थ का दावा है कि यह एप अन्य एप से ज्यादा कारगर है, जो स्थानीय लोगों को जोड़ने और उनके कार्यक्रम आदि को प्रसारित करने में मददगार है। यह एप करीब ढाई किलोमीटर के एरिया में रहने वाले लोगों को आपस में जोड़ता है और एकता को बढ़ावा देता है। सिद्धार्थ ने बताया कि कोरोना काल में उसने कुछ अलग करने की सोची थी। एप बनाने के लिए प्राइवेट कंपनी रजिस्टर्ड कराई और जीएसटी नंबर भी लिया। इस पर पिता प्रवीन त्यागी ने उसे पूरा सहयोग किया।
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शिवांश ने बनाई थी वेबसाइट
कोरोना काल में घर में खाली बैठने के बजाय कुछ नया करने की सोच रखने वाले सहारनपुर में अन्य भी लोग हैं। ऐसे ही लोगों में छात्र शिवांश पंवार भी शामिल हैं, जो रामपुर मनिहारान क्षेत्र के रहने वाले हैं। शिवांश ने कोरोना काल में वेबसाइट बनाई थी, जिसके जरिये अस्पताल, ऑक्सीजन की उपलब्धता, ब्लड बैंक आदि की टेलीफोन और मोबाइल नंबर सहित जानकारी का डाटा तैयार किया था। वहीं, सहारनपुर शहर के रहने वाले अंश गर्ग ने मेरठ निवासी अपने दोस्त ऋषि गुप्ता और अवनी सिंह के साथ मिलकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म स्टूडोमैट्रिक्स कोविड-19 सहायता केंद्र बनाया था। इससे देशभर के युवाओं को जोड़ा था और कोरोना काल में जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाने में मददगार बने थे।
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