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तालाब की भूमि पर बना दिए शोरूम

Sun, 19 Dec 2021 11:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 19 Dec 2021 11:36 PM IST
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Showroom built on the land of the pond
बेहट रोड स्थित तालाब का मामला, 1983 में आवंटित पट्टे 2008 में हुए थे निरस्त
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। महानगर में तालाब की भूमि पर शोरूम और कई मकान खडे़ कर दिए गए। इसके बावजूद नगर निगम व तहसील अधिकारी सोते रहे। इस माह नगर निगम ने तालाब की भूमि खाली कराने की कार्रवाई शुरू की है। इसके चलते निगम के अधिकारियों को मुआयना किया है।
बेहट रोड स्थित रसूलपुर के समीप तालाब है। इस पर सरकार ने 1983 में पट्टे आवंटित कर दिए थे। हिंचक लाल तिवारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2001 में आदेश दिया। जिसमें कहा कि तालाब की भूमि का उपयोग बदला नहीं जा सकता है। आदेश यह भी था कि जौहड़ की भूमि पर यदि पक्का निर्माण है तो उसे हटाया जाए। इस मामले में सदर तहसील की ओर से कार्रवाई नहीं की गई। उस समय तालाब क्षेत्र शहर का हिस्सा नहीं था। वर्ष 2008 में तालाब पर पट्टे निरस्त किए गए, मगर उसे खाली नहीं कराया। इसके बाद पालिका को नगर निगम बनाने के लिए रसूलपुर क्षेत्र को शहर में मिलाया। इसके बाद उक्त तालाब नगर निगम अंतर्गत आ गया। इसे खाली कराने के लिए तहसील व नगर निगम स्तर से कार्रवाई नहीं की गई। अब निगम को इसकी याद आई। अधिकारियों ने मुआयना किया तो वहां शोरूम बने हैं। वहीं, आधा दर्जन से अधिक पक्के मकान भी हैं।
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आठ लोगों को नोटिस जारी
नगर निगम की ओर से तालाब की भूमि पर निर्माण करने वाले आठ लोगों को बीती 13 दिसंबर को नोटिस जारी किए गए हैं। नगर निगम ने कब्जा हटाने तथा वर्ष 2008 से कब्जे की एवज अर्थदंड भी लगाया। यह एक करोड़ 67 लाख 30 हजार 144 रुपये है। इसमें एक व्यक्ति पर 60 लाख 39 हजार 744 रुपये तथा शेष सात लोगों में प्रत्येक पर 15 लाख 27 हजार 200 रुपये दंड लगाया। नोटिस मिलने के सात दिन के भीतर भूमि खाली कर अर्थदंड जमा कराने के लिए कहा है।
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करोड़ों की है भूमि
तालाब की कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई है। ऐसे में नगर निगम के अधिकारी उक्त भूमि को छोड़ने के मूड में नहीं हैं। यही वजह है कि नोटिस जारी किए गए हैं। जवाब नहीं मिलने पर निगम अगला कदम उठाने की तैयारी में है।

रसूलपुर के समीप नगर निगम का जौहड़ है। जिस पर 1983 में पट्टे आवंटित किए थे। 2001 के सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि तालाब की नवैयत नहीं बदली जा सकती है। ऐसे में 2008 में पट्टे निरस्त हो गए थे। इसके बावजूद तालाब पर निर्माण कर लिये। आठ लोगों को नोटिस जारी किए हैं।-दिनेश यादव, प्रभारी संपत्ति अधिकारी, नगर निगम
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