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सहारनपुर का गुलाब महका रहा कई राज्य
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर
Updated Sat, 14 Apr 2018 12:39 AM IST
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सहारनपुर में होती फूलों की खेती।
- फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर में अपनी गुणवत्ता के लिए मशहूर सहारनपुर का गुलाब देश के कई राज्यों में अपनी खुशबू फैला रहा है। यहां की नर्सरियों में तैयार गुलाब के पौध देहरादून से लेकर कोलकाता तक धूम मचा रही हैं। जिले के कई गांवों की नर्सरियों में प्रति वर्ष 10 लाख गुलाब के पौधों का उत्पादन होता है।
जिसमें एक दर्जन से अधिक प्रजातियों के पौधे तैयार किए जाते हैं। दूसरे राज्यों के ग्राहक सीधे नर्सरियों से ही गुलाब के पौधे खरीदकर ले जाते हैं। परंपरागत खेती में बढ़ती लागत और घटती आय के चलते किसानों ने कृषि विविधीकरण को अपनाना शुरू कर दिया है।
शहर से सटे ज्ञानागढ़, बिशनपुर, खुब्बनपुर, हसनपुर आदि गांवों में करीब 500 बीघा क्षेत्रफल में किसान गुलाब के पौधों की नर्सरी तैयार कर रहे हैं। गुलाब की पौध की कई राज्यों में भारी मांग होने केेेेे कारण नर्सरियों का क्षेत्रफल लगातार बढ़ रहा है। फिलहाल जिले से प्रतिवर्ष करीब 10 लाख पौधों को दूसरे राज्यों में बेचा जा रहा है।
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गुलाब की खेती करने राम सिंह, पप्पू, रवि कपिल, प्रेम प्रमुख, साधूराम, नरेंद्र सिंह, यशपाल, नरेश के मुताबिक गुलाब की नर्सरी के लिए देशी पौधे की कलम की रोपाई अक्तूबर के महीने में रोपा जाता है। जिस पर उन्नतशील प्रजातियों के गुलाब की आंख को लगा दिया जाता है।
गुलाब की पौध को मेढ़ बनाकर उसके दोनों ओर रोपा जाता है। किसान इस पौध को अगस्त से बेचना शुरू कर देते हैं। एक बीघा खेत से किसान को करीब 10 हजार पौधे बेचने के लिए मिल जाते हैं जिसे प्रति पौधा 7 रुपये से लेकर 15 रुपये तक बेचा दिया जाता है। इस प्रकार प्रति बीघा नर्सरी से किसान को 40 से 60 हजार रुपये तक की आय प्राप्त हो जाती है।
इन प्रजातियों की है सबसे अधिक मांग
जनपद की नर्सरियों में करीब एक दर्जन से अधिक प्रजातियों के पौधे तैयार होते हैं। गुलाब में सबसे अधिक मांग सुपर रेड, गोल्डन जैफ, सुपर स्टार, केयरलेस, ब्लू मून, केशव फायर, आइसबर्ग, रंजना, पारसले और विल्गो प्रजातियों की है। दूसरे राज्यों में इन वैरायटियों में अधिक पसंद किया जाता है।
यहां धूम मचा रहा है सहारनपुर का गुलाब
सहारनपुर के गुलाब के पौधों की कई राज्यों में भारी मांग हैं। इनमें उत्तराखंड, पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, मध्यप्रदेश, हिमाचल, कर्नाटक, पश्चिमी बंगाल शामिल है।
शहर से सटे कई गांवों के किसान बड़ी संख्या में गुलाब के पौधे तैयार कर रहे हैं। यहां से कई राज्यों में गुलाब के पौधों की सप्लाई हो रही हैं। किसान के लिए ये नर्सरियां काफी लाभप्रद साबित हो रही हैं। करीब एक दर्जन प्रजातियों के गुलाब की पौध यहां पर तैयार होती हैं। 10 लाख से अधिक पौधे प्रतिवर्ष बाहरी राज्यों में सप्लाई हो जाते हैं।
अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।
जिसमें एक दर्जन से अधिक प्रजातियों के पौधे तैयार किए जाते हैं। दूसरे राज्यों के ग्राहक सीधे नर्सरियों से ही गुलाब के पौधे खरीदकर ले जाते हैं। परंपरागत खेती में बढ़ती लागत और घटती आय के चलते किसानों ने कृषि विविधीकरण को अपनाना शुरू कर दिया है।
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शहर से सटे ज्ञानागढ़, बिशनपुर, खुब्बनपुर, हसनपुर आदि गांवों में करीब 500 बीघा क्षेत्रफल में किसान गुलाब के पौधों की नर्सरी तैयार कर रहे हैं। गुलाब की पौध की कई राज्यों में भारी मांग होने केेेेे कारण नर्सरियों का क्षेत्रफल लगातार बढ़ रहा है। फिलहाल जिले से प्रतिवर्ष करीब 10 लाख पौधों को दूसरे राज्यों में बेचा जा रहा है।
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गुलाब की खेती करने राम सिंह, पप्पू, रवि कपिल, प्रेम प्रमुख, साधूराम, नरेंद्र सिंह, यशपाल, नरेश के मुताबिक गुलाब की नर्सरी के लिए देशी पौधे की कलम की रोपाई अक्तूबर के महीने में रोपा जाता है। जिस पर उन्नतशील प्रजातियों के गुलाब की आंख को लगा दिया जाता है।
गुलाब की पौध को मेढ़ बनाकर उसके दोनों ओर रोपा जाता है। किसान इस पौध को अगस्त से बेचना शुरू कर देते हैं। एक बीघा खेत से किसान को करीब 10 हजार पौधे बेचने के लिए मिल जाते हैं जिसे प्रति पौधा 7 रुपये से लेकर 15 रुपये तक बेचा दिया जाता है। इस प्रकार प्रति बीघा नर्सरी से किसान को 40 से 60 हजार रुपये तक की आय प्राप्त हो जाती है।
इन प्रजातियों की है सबसे अधिक मांग
जनपद की नर्सरियों में करीब एक दर्जन से अधिक प्रजातियों के पौधे तैयार होते हैं। गुलाब में सबसे अधिक मांग सुपर रेड, गोल्डन जैफ, सुपर स्टार, केयरलेस, ब्लू मून, केशव फायर, आइसबर्ग, रंजना, पारसले और विल्गो प्रजातियों की है। दूसरे राज्यों में इन वैरायटियों में अधिक पसंद किया जाता है।
यहां धूम मचा रहा है सहारनपुर का गुलाब
सहारनपुर के गुलाब के पौधों की कई राज्यों में भारी मांग हैं। इनमें उत्तराखंड, पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, मध्यप्रदेश, हिमाचल, कर्नाटक, पश्चिमी बंगाल शामिल है।
शहर से सटे कई गांवों के किसान बड़ी संख्या में गुलाब के पौधे तैयार कर रहे हैं। यहां से कई राज्यों में गुलाब के पौधों की सप्लाई हो रही हैं। किसान के लिए ये नर्सरियां काफी लाभप्रद साबित हो रही हैं। करीब एक दर्जन प्रजातियों के गुलाब की पौध यहां पर तैयार होती हैं। 10 लाख से अधिक पौधे प्रतिवर्ष बाहरी राज्यों में सप्लाई हो जाते हैं।
अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।