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Saharanpur News: सामाजिक और भयावहता समेत के सात बिंदु बने सजा-ए-मौत के आधार

Sat, 08 Jun 2024 02:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jun 2024 02:06 AM IST
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Seven points including social and horror became the basis for death penalty
सहारनपुर। अधिवक्ता कर्मवीर छाबड़ा हत्याकांड में पांच दोषियों को सजा-ए-मौत के फैसले पीछे सात बिंदु आधार बने हैं। इन बिंदुओं में हत्या का तरीका, मकसद, अपराध की भयावहता, मृतक का व्यक्तिव, पारिवारिक पृष्ठभूमि, अपराधियों की सामाजिक आर्थिक स्थिति, समाज पर प्रभाव शामिल है। इसके साथ ही अदालत ने कई ऐसे समाज केसों का भी उदाहरण दिया है, जिसमें दोषियों को ऐसी ही सजा हुई है।
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बिंदु : 1
हत्या करने का तरीका : अदालत ने कहा कि अधिवक्ता कर्मवीर की हत्या बर्बरता पूर्ण और निर्मम तरीके से की गई थी। सीने के बायीं तरफ दिल पर चाकू और कृपाण से वार किए गए थे, जिससे दिल कट गया था। चौथी और पांचवीं पसली टूट गई थी। लोहे की रॉड और सरिया से भी वार किए गए थे। चाकू और कृपाण को शरीर में घोंप-घोंपकर हत्याकांड को अंजाम दिया गया था।
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बिंदु : 2
हत्या का मकसद : दोषी भूपेंद्र सिंह बतरा, अमर जीत सिंह, गुरु प्रताप सिंह, गुरनीत सिंह और गुरमीत सिंह के पास हत्या का उद्देश्य था, जो साक्ष्यों के आधार पर साबित हुआ है।
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बिंदु : 3
अपराध की भयावहता : मृतक कर्मवीर छाबड़ा नौजवान अधिवक्ता थे। इस घटना को लेकर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश द्वारा पूरे प्रदेश में एक दिन की हड़ताल भी की गई थी। कैंडल मार्च तक निकाले गए। अधिवक्ता बार संघ सहारनपुर और व्यापारी संघ में भी काफी रोष था। इससे समाज में असुरक्षा की भावना पैदा हुई है और एक भयावह स्थिति भी उत्पन्न हुई है।

बिंदु : 4
मृतक का व्यक्तिव : अदालत ने कहा कि अधिवक्ता कर्मवीर छाबड़ा ने सहारनपुर में वकालत शुरू की थी और सिविल सर्विस की परीक्षा भी दी थी। अधिवक्ता के रूप में कर्मवीर छाबड़ा की छवि अच्छी बताई गई है। इसमें कोई संदेह नहीं कि वकालत का पेशा सम्मानजनक होता है।

बिंदु : 5
मृतक की पारिवारिक पृष्ठभूमि : अधिवक्ता कर्मवीर छाबड़ा की पत्नी और बेटी उन पर आश्रित थी। बतौर अधिवक्ता प्रैक्टिस कर अपना और परिवार का जीवन यापन कर रहे थे, लेकिन अभियुक्तों द्वारा कर्मवीर छाबड़ा की हत्या करने के बाद उसके परिवार की स्थिति बदतर हो गई है। बच्ची ने अपना पिता और पत्नी ने पति को खो दिया।

बिंदु : 6
दोषियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति : पांचों दोषियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति अच्छी है। कुछ व्यवसाय करते हैं तो कोई कंपनी में नौकरी करता है। ऐसे में वह प्रतिकर धनराशि अदा करने में भी सक्षम है।

बिंदु : 7
हत्या का समाज पर प्रभाव : अधिवक्ता की हत्या के बाद समाज पर गहरा प्रभाव पड़ा है और असुरक्षा की भावना पैदा हुई है। जिस तरीके से अधिवक्ता की हत्या की गई थी वह बेहद निर्मम था। इसका प्रभाव सबसे अधिक पीड़ित परिवार पर पड़ा और समाज भी अछूता नहीं रहा।


इन केसों का दिया उदाहरण
अदालत ने सजा-ए-मौत का फैसला सुनाने से पहले बचन सिंह वर्सेज स्टेट ऑफ पंजाब, देवेंद्र पाल सिंह वर्सेज स्टेट ऑफ एनसीटी दिल्ली के केस का उदाहरण दिया। उन केसों का भी समाज पर बुरा प्रभाव पड़ा था और वह भी विरल से विरलतम की श्रेणी में थे।
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