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Saharanpur News: जांच रिपोर्ट न देने पर एसडीएम नकुड़ को अदालत में पेश होने के आदेश
Wed, 13 May 2026 01:16 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 13 May 2026 01:16 AM IST
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सहारनपुर। विशेष न्यायधीश एससी-एसटी एक्ट की अदालत ने एसडीएम नकुड़ को अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं। अदालत में चल रहे एक मुकदमे में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। अदालत ने इसे न्यायालय के आदेशों की अवमानना भी माना है। कहा कि उनके खिलाफ क्यों न आदेश अवमानना की कार्रवाई अमल में लाई जाए। अदालत ने सुनवाई के लिए 21 मई की तिथि निर्धारित की है।
वादी सोनी निवासी गांव फतेहुपर थाना गंगोह ने न्यायालय में 12 मार्च 2026 को प्रार्थना पत्र दिया था। बताया कि उसका नाम वर्ष 2009 में शासन की बीपीएल सूची में दर्ज था। उसका ग्रामीण आवास योजना के तहत पात्रता सूची में नाम आया। इसके संबंध में विपक्षियों ग्राम विकास अधिकारी रविंद्र कश्यप, जयपाल प्रधान और सुधीर ने शासन प्रशासन को झूठी रिपोर्ट उपलब्ध कराते हुए उसके पास मोटर साइकिल, फ्रीज, वाशिंग मशीन व अन्य महंगे उपकरण व पांच पक्के कमरे दर्शा दिए। इस संबंध में सूचना अधिकार के तहत वर्ष 2019 में विपक्षीगणों से प्रमाणित प्रतिलिपि की सूची मांगी।
उसे विपक्षियों की ओर से समय पर सूचना नहीं दी गई। इस संबंध में राज्य सूचना आयोग को भी शिकायत की थी। इस पर आयोग ने लोकसेवकों को पदों का दुरुपयोग व आयोग के आदेशों की अवहेलना का भी दोषी मानते हुए 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया था। आरोप लगाया कि उसे अभी तक आवास क्षतिपूर्ति का रुपया नहीं दिया गया है। पीड़ित ने मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के भी आरोप लगाए। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए मामले में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे, लेकिन एसडीएम नकुड़ की ओर से जांच रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई। कई बार मौका देने के बाद भी जांच रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई। 12 मई को हुई सुनवाई में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए 21 मई को एसडीएम नकुड को न्यायालय में उपस्थित होने और जांच रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।
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वादी सोनी निवासी गांव फतेहुपर थाना गंगोह ने न्यायालय में 12 मार्च 2026 को प्रार्थना पत्र दिया था। बताया कि उसका नाम वर्ष 2009 में शासन की बीपीएल सूची में दर्ज था। उसका ग्रामीण आवास योजना के तहत पात्रता सूची में नाम आया। इसके संबंध में विपक्षियों ग्राम विकास अधिकारी रविंद्र कश्यप, जयपाल प्रधान और सुधीर ने शासन प्रशासन को झूठी रिपोर्ट उपलब्ध कराते हुए उसके पास मोटर साइकिल, फ्रीज, वाशिंग मशीन व अन्य महंगे उपकरण व पांच पक्के कमरे दर्शा दिए। इस संबंध में सूचना अधिकार के तहत वर्ष 2019 में विपक्षीगणों से प्रमाणित प्रतिलिपि की सूची मांगी।
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उसे विपक्षियों की ओर से समय पर सूचना नहीं दी गई। इस संबंध में राज्य सूचना आयोग को भी शिकायत की थी। इस पर आयोग ने लोकसेवकों को पदों का दुरुपयोग व आयोग के आदेशों की अवहेलना का भी दोषी मानते हुए 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया था। आरोप लगाया कि उसे अभी तक आवास क्षतिपूर्ति का रुपया नहीं दिया गया है। पीड़ित ने मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के भी आरोप लगाए। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए मामले में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे, लेकिन एसडीएम नकुड़ की ओर से जांच रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई। कई बार मौका देने के बाद भी जांच रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई। 12 मई को हुई सुनवाई में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए 21 मई को एसडीएम नकुड को न्यायालय में उपस्थित होने और जांच रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।
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