{"_id":"61fd6843e53b88214d0b020f","slug":"sc-women-dominated-the-politics-of-the-district-saharanpur-news-mrt575716998","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले की राजनीति में एससी महिलाओं का रहा बोलबाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले की राजनीति में एससी महिलाओं का रहा बोलबाला
विज्ञापन
-अभी तक चुनी गईं छह महिला विधायकों में से चार एससी महिलाएं, जिनमें मायावती भी शामिल
-जिले की पहली महिला विधायक भी एससी महिला शकुंतला देवी रहीं, जो 1962 में विधायक बनी
जगदीप कुमार
सहारनपुर। आर्थिक और सामाजिक तौर पर पिछड़ा होने के बावजूद जिले की राजनीति में अनुसूचित जाति की महिलाओं ने आधी आबादी का सर्वाधिक बार मान बढ़ाया है। जनपद की पहली महिला विधायक से लेकर सबसे अधिक छह बार विधायक बनने तक का रिकॉर्ड उन्हीं के नाम है। जिले में 15 बार विधायक चुनी गईं महिलाओं में 13 बार एससी महिलाओं के सिर ताज सजा है। हरौड़ा विधानसभा सीट जो अब सहारनपुर देहात है की जनता ने सर्वाधिक 12 बार महिलाओं को चुनकर विधानसभा में भेजा। इन सभी 12 बार में एससी महिलाएं ही विधायक बनीं, जिनमें शकुंतला देवी, विमला राकेश और उसके बाद मायावती विधायक रहीं। नागल सीट पर हुए उप चुनाव में सत्तो देवी भी जीत हासिल कर विधानसभा पहुंची थीं। इनके अलावा दो अन्य महिलाएं विधायक बनी हैं, जिनमें शशिबाला पुंडीर और रानी देवलता शामिल हैं। यह क्रमश: देवबंद और मुजफ्फराबाद सीट से भाजपा की विधायक रही हैं। आजादी के बाद से अभी तक जनपद में 18 बार विधानसभा के चुनाव और उप चुनाव हुए। इनमें अलग-अलग सीट से कुल 103 लोग जीतकर विधानसभा पहुंचे, जबकि आधी आबादी कही जाने वाली महिलाएं केवल 15 बार चुनाव जीती हैं। 15 बार में 13 बार एससी महिलाएं विधायक बनी हैं।
-------
कौन महिला कब चुनी गई विधायक
सहारनपुर में शकुंतला देवी 1962 में सरसावा से कांग्रेस के टिकट पर जीती थीं। वह जनपद की पहली महिला विधायक बनी थीं। इसके बाद वे 1967 से 1974 तक हरौड़ा से विधायक रहीं। विमला राकेश 1977 से 1980 तक हरौड़ा से जनता पार्टी की विधायक रहीं। इसके बाद वे 1985 में इसी सीट पर लोकदल के प्रत्याशी के रूप में विजयी हुई। वह 1989 से 1991 तक जनता दल से विधायक रहीं। शशिबाला पुंडीर 1993 में देवबंद से भाजपा की विधायक रहीं। रानी देवलता 1993 में मुजफ्फराबाद सीट से भाजपा की विधायक रहीं। मायावती 1996 और 2002 में हरौड़ा से बसपा की विधायक रहीं। सपा की विमला राकेश ने 2003 के उप चुनाव में हरौड़ा सीट जीती थी। सत्तोदेवी 2005 के उपचुनाव में नागल से विधायक बनी। विमला राकेश सर्वाधिक छह बार, शकुंतला देवी चार बार, मायावती दो बार और सत्तोदेवी, शशिबाला पुंडीर व रानी देवलता एक-एक बार विधायक रहीं।
-------
यह महिलाएं आजमा चुकी हैं भाग्य
आजादी के बाद जनपद में अभी तक हुए विधानसभा चुनाव और उप चुनावों में बेशक छह महिलाएं जीतकर विधानसभा पहुंची हों, लेकिन ऐसी महिलाओं की फेहरिस्त लंबी है, जिन्होंने विधानसभा चुनावों में भाग्य आजमाया है। जिनमें शकुंतला देवी पत्नी बीपी सिंह, प्रेमवती, अंगूरी, विमलेश, शांति, इशरत, शगुफ्ता खान, चंपा, कलमा, शकूरा, उमा भूषण, जीनत नाज, सुशीला, पदमलता निम, अंजो, ममता चौधरी, कुसुम, निशा देवी, सीता देवी, रेखा, संगीता, शीला, संध्या रानी, शाहीन खान आदि अलग-अलग सीट से अलग-अलग बार चुनाव लड़ चुकी हैं।
विज्ञापन
------
बीते 17 साल से नहीं बनी कोई महिला विधायक
सहारनपुर। जनपद की सात विधानसभा सीट पर बीते 17 साल से कोई महिला एमएलए नहीं बनी है। 2005 में नागल सीट पर हुए उपचुनाव में मंत्री इलम सिंह के निधन होने पर उनकी पत्नी सत्तो देवी विधायक बनी थी। इसके बाद से आधी आबादी विधानसभा नहीं पहुंची।
------------------
इस बार केवल तीन महिला प्रत्याशी
विधानसभा चुनाव 2022 में जनपद की सात सीटों पर मात्र तीन महिलाएं चुनाव मैैदान में हैं। कांग्रेस ने सहारनपुर नगर सीट से सुखविंदर कौर और बेहट सीट से पूनम कांबोज को चुनाव मैदान में उतारा है। तीसरी महिला प्रत्याशी रिजवाना हैं, जो एआईएमआईएम के टिकट पर नकुड़ सीट से चुनाव मैैदान में हैं।
विज्ञापन
-जिले की पहली महिला विधायक भी एससी महिला शकुंतला देवी रहीं, जो 1962 में विधायक बनी
जगदीप कुमार
सहारनपुर। आर्थिक और सामाजिक तौर पर पिछड़ा होने के बावजूद जिले की राजनीति में अनुसूचित जाति की महिलाओं ने आधी आबादी का सर्वाधिक बार मान बढ़ाया है। जनपद की पहली महिला विधायक से लेकर सबसे अधिक छह बार विधायक बनने तक का रिकॉर्ड उन्हीं के नाम है। जिले में 15 बार विधायक चुनी गईं महिलाओं में 13 बार एससी महिलाओं के सिर ताज सजा है। हरौड़ा विधानसभा सीट जो अब सहारनपुर देहात है की जनता ने सर्वाधिक 12 बार महिलाओं को चुनकर विधानसभा में भेजा। इन सभी 12 बार में एससी महिलाएं ही विधायक बनीं, जिनमें शकुंतला देवी, विमला राकेश और उसके बाद मायावती विधायक रहीं। नागल सीट पर हुए उप चुनाव में सत्तो देवी भी जीत हासिल कर विधानसभा पहुंची थीं। इनके अलावा दो अन्य महिलाएं विधायक बनी हैं, जिनमें शशिबाला पुंडीर और रानी देवलता शामिल हैं। यह क्रमश: देवबंद और मुजफ्फराबाद सीट से भाजपा की विधायक रही हैं। आजादी के बाद से अभी तक जनपद में 18 बार विधानसभा के चुनाव और उप चुनाव हुए। इनमें अलग-अलग सीट से कुल 103 लोग जीतकर विधानसभा पहुंचे, जबकि आधी आबादी कही जाने वाली महिलाएं केवल 15 बार चुनाव जीती हैं। 15 बार में 13 बार एससी महिलाएं विधायक बनी हैं।
-------
कौन महिला कब चुनी गई विधायक
सहारनपुर में शकुंतला देवी 1962 में सरसावा से कांग्रेस के टिकट पर जीती थीं। वह जनपद की पहली महिला विधायक बनी थीं। इसके बाद वे 1967 से 1974 तक हरौड़ा से विधायक रहीं। विमला राकेश 1977 से 1980 तक हरौड़ा से जनता पार्टी की विधायक रहीं। इसके बाद वे 1985 में इसी सीट पर लोकदल के प्रत्याशी के रूप में विजयी हुई। वह 1989 से 1991 तक जनता दल से विधायक रहीं। शशिबाला पुंडीर 1993 में देवबंद से भाजपा की विधायक रहीं। रानी देवलता 1993 में मुजफ्फराबाद सीट से भाजपा की विधायक रहीं। मायावती 1996 और 2002 में हरौड़ा से बसपा की विधायक रहीं। सपा की विमला राकेश ने 2003 के उप चुनाव में हरौड़ा सीट जीती थी। सत्तोदेवी 2005 के उपचुनाव में नागल से विधायक बनी। विमला राकेश सर्वाधिक छह बार, शकुंतला देवी चार बार, मायावती दो बार और सत्तोदेवी, शशिबाला पुंडीर व रानी देवलता एक-एक बार विधायक रहीं।
विज्ञापन
-------
यह महिलाएं आजमा चुकी हैं भाग्य
आजादी के बाद जनपद में अभी तक हुए विधानसभा चुनाव और उप चुनावों में बेशक छह महिलाएं जीतकर विधानसभा पहुंची हों, लेकिन ऐसी महिलाओं की फेहरिस्त लंबी है, जिन्होंने विधानसभा चुनावों में भाग्य आजमाया है। जिनमें शकुंतला देवी पत्नी बीपी सिंह, प्रेमवती, अंगूरी, विमलेश, शांति, इशरत, शगुफ्ता खान, चंपा, कलमा, शकूरा, उमा भूषण, जीनत नाज, सुशीला, पदमलता निम, अंजो, ममता चौधरी, कुसुम, निशा देवी, सीता देवी, रेखा, संगीता, शीला, संध्या रानी, शाहीन खान आदि अलग-अलग सीट से अलग-अलग बार चुनाव लड़ चुकी हैं।
विज्ञापन
------
बीते 17 साल से नहीं बनी कोई महिला विधायक
सहारनपुर। जनपद की सात विधानसभा सीट पर बीते 17 साल से कोई महिला एमएलए नहीं बनी है। 2005 में नागल सीट पर हुए उपचुनाव में मंत्री इलम सिंह के निधन होने पर उनकी पत्नी सत्तो देवी विधायक बनी थी। इसके बाद से आधी आबादी विधानसभा नहीं पहुंची।
------------------
इस बार केवल तीन महिला प्रत्याशी
विधानसभा चुनाव 2022 में जनपद की सात सीटों पर मात्र तीन महिलाएं चुनाव मैैदान में हैं। कांग्रेस ने सहारनपुर नगर सीट से सुखविंदर कौर और बेहट सीट से पूनम कांबोज को चुनाव मैदान में उतारा है। तीसरी महिला प्रत्याशी रिजवाना हैं, जो एआईएमआईएम के टिकट पर नकुड़ सीट से चुनाव मैैदान में हैं।