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संजीत के परिवार का मुआवजे से इंकार
ब्यूरो/अमर उजाला, सरसावा
Updated Mon, 15 Feb 2016 12:22 AM IST
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युवा डॉक्टर संजीत की मौत के बाद यहां गांव मंधोर स्थित घर में दूसरे दिन भी सन्नाटा पसरा रहा। घेर में गमगीन पिता को सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। दुखी पिता ने कहा कि उनका पुत्र संजीत पढ़ाई में निपुण होने साथ ही कबड्डी का राज्य स्तरीय खिलाड़ी भी था।
उसने कबड्डी में दर्जनों पुरस्कार हासिल किए थे। बेटे की मौत पर सरकार या अन्य माध्यम से किसी भी तरह की सहायता राशि लेने से परिवार ने इंकार कर दिया है। पिता का कहना है कि सहायता राशि से बेटा तो वापस नहीं आएगा।
गांव मंधोर निवासी तथा उप्र वन विभाग में वन दरोगा के पद पर तैनात मदन सिंह का सबसे बड़ा पुत्र संजीत 2010 के बैच में सीपीएमटी में चयनित होकर मेरठ कॉलेज से एमबीबीएस करने के बाद वहीं पर इंटर्नशिप कर रहा था। शुक्रवार को संजीत की चिकित्सकों की लापरवाही के कारण समय पर इलाज नहीं मिलने कारण मौत हो गई थी।
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पिता मदन सिंह ने बताया कि उनका दूसरा पुत्र विकास भी एमबीबीएस की डिग्री लेने के बाद मेरठ मेडिकल कॉलेज में ही चिकित्सक है। उनकी बेटी एमएससी तथा छोटा पुत्र भी पोस्ट ग्रेजुएट होने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि संजीत डॉक्टर होने के बाद अच्छा खिलाड़ी था। उसने कबड्डी में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अनेकों बार सम्मान प्राप्त किया है।
वहीं, मदन सिंह ने मेरठ कॉलेज के अधिकारियों की संवेदनशीलता पर भी दुख जताया। वहीं, गांव के प्रधान अजय सिंह, विजय प्रताप राणा, चंद्र किरण, प्रसादा राम, ओमप्रकाश, जयप्रकाश, सुरेद्र, धीर सिंह आदि ने साफ कहा कि दोषी चिकित्सको को सजा अवश्य मिलनी चाहिए।
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उसने कबड्डी में दर्जनों पुरस्कार हासिल किए थे। बेटे की मौत पर सरकार या अन्य माध्यम से किसी भी तरह की सहायता राशि लेने से परिवार ने इंकार कर दिया है। पिता का कहना है कि सहायता राशि से बेटा तो वापस नहीं आएगा।
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गांव मंधोर निवासी तथा उप्र वन विभाग में वन दरोगा के पद पर तैनात मदन सिंह का सबसे बड़ा पुत्र संजीत 2010 के बैच में सीपीएमटी में चयनित होकर मेरठ कॉलेज से एमबीबीएस करने के बाद वहीं पर इंटर्नशिप कर रहा था। शुक्रवार को संजीत की चिकित्सकों की लापरवाही के कारण समय पर इलाज नहीं मिलने कारण मौत हो गई थी।
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पिता मदन सिंह ने बताया कि उनका दूसरा पुत्र विकास भी एमबीबीएस की डिग्री लेने के बाद मेरठ मेडिकल कॉलेज में ही चिकित्सक है। उनकी बेटी एमएससी तथा छोटा पुत्र भी पोस्ट ग्रेजुएट होने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि संजीत डॉक्टर होने के बाद अच्छा खिलाड़ी था। उसने कबड्डी में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अनेकों बार सम्मान प्राप्त किया है।
वहीं, मदन सिंह ने मेरठ कॉलेज के अधिकारियों की संवेदनशीलता पर भी दुख जताया। वहीं, गांव के प्रधान अजय सिंह, विजय प्रताप राणा, चंद्र किरण, प्रसादा राम, ओमप्रकाश, जयप्रकाश, सुरेद्र, धीर सिंह आदि ने साफ कहा कि दोषी चिकित्सको को सजा अवश्य मिलनी चाहिए।