देवबंद: वसीम रिजवी के खिलाफ प्रदर्शन, मुस्लिम समाज के लोगों ने की बड़ी कार्रवाई की मांग
- देवबंद में वसीम रिजवी के खिलाफ जमीयत का प्रदर्शन
- जमीयत उलमा-ए-हिंद की तहसील यूनिट के बैनर तले हुआ प्रदर्शन
- राष्ट्रपति के नाम दिया ज्ञापन, रिजवी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग
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सहारनपुर के देवबंद में जमीयत उलमा-ए-हिंद के बैनर तले शुक्रवार को जुमा की नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोगों ने शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। इस मौके पर राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित कर रिजवी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की।
जमीयत उलमा-ए-हिंद (मौलाना महमूद मदनी गुट) की तहसील यूनिट के आह्वान पर शुक्रवार को जुमा की नमाज के बाद मुस्लिम समाज के सैकड़ों लोग नगर के इस्लामिया बाजार में इकट्ठा हुए। यहां से वह सुप्रीम कोर्ट में कुरआन की 26 आयतों को हटाए जाने संबंधी याचिका दाखिल करने वाले शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी के खिलाफ प्रदर्शन कर दारुल उलूम चौक और खानकाह से होते हुए ईदगाह मैदान में पहुंची। जहां आयोजित सभा में जमीयत के जिलाध्यक्ष मौलाना जहूर अहमद ने कहा कि कुरआन-ए-करीम अल्लाह का कलाम है। इसमें बदलाव की मांग करने वाला सीधे तौर पर अल्लाह का मुजरिम है। जिसे बख्शा नहीं जा सकता।
वहीं जिला महासचिव जहीन अहमद ने कहा कि देश का संविधान किसी को धार्मिक भावनाओं को आहत करने की इजाजत नहीं देता है। उन्होंने कहा कि वसीम रिजवी जैसे लोग साजिश के तहत देश का माहौल खराब करना चाहते हैं। ऐसे लोगों की जगह सलाखों के पीछे है। तहसील अध्यक्ष मौलाना इरफान, मौलाना शमशाद कासमी, कारी दिलशाद कासमी आदि ने भी विचार व्यक्त किए। इस दौरान बीच बीच में लोग वसीम रिजवी मुर्दाबाद और रिजवी को फांसी दो के नारे लगा रहे थे। अंत में जमीयत पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति को प्रेषित ज्ञापन सीओ रजनीश कुमार उपाध्याय को सौंपा। जिसमें राष्ट्रपति से रिजवी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की गई। अध्यक्षता मौलाना जहूर अहमद और संचालन मौलाना महमूद ने किया।
इस दौरान अंसार मसूदी, सिद्दीक अहमद मदनी, मौलाना शमशीर कासमी, मौलाना अब्दुल मन्नान, मौलाना मुफ्ती शाकिर, नजम उस्मानी, मौलाना जाकिर, शाहनवाज मलिक, फैजी सिद्दीकी, हाफिज असजद, सैयद हारिस आदि मौजूद रहे।
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वहीं वसीम रिजवी के कुरआन की 26 आयतों को हटाए जाने संबंधी अदालत में दायर की गई याचिका को लेकर उलमा और मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने कड़ी नाराजगी जताई थी। उलमा का कहना है कि रिजवी की घटिया मानसिकता से दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसलिए उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि वसीम रिजवी हमेशा विवादित बयान देने के साथ ही इस प्रकार के कार्य करते हैं, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। ताजा मामले को लेकर उनके बयान की चारों तरफ आलोचना हो रही है। उन्होंने कहा कि कुरआन एक आसमानी किताब है जिसमें एक शब्द न हटाया जा सकता है न ही जोड़ा जा सकता है।
मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना था कि वसीम रिजवी अपने आकाओं को खुश करने और पुराने मामलों में जेल में जाने से बचने के लिए मुल्क का माहौल खराब करने वाले काम कर रहे हैं।
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