सहारनपुर: ...जब देवबंद आए थे मुलायम सिंह यादव, काजी रशीद-चौधरी यशपाल से रहा आत्मीय लगाव, पढ़ें खास यादें
सपा के संस्थापक एवं पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के निधन की सूचना से जनपद में उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई। उनका जनपद से गहरा नाता रहा है। उन्होंने जनपद में कई बार राजनीतिक एवं निजी कार्यक्रमों में शिरकत की। उनका जनपद के कई नेताओं से राजनीतिक एवं आत्मीय लगाव रहा।
समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन की खबर से सपा कार्यकर्ताओं से लेकर उनके चाहने वाले शोकाकुल हो गए। जनपद के कई नेताओं से उनका करीबी रिश्ता रहा। इनमें सपा के आजीवन प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री चौधरी रामशरण दास उनके दाहिने हाथ रहे, वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री काजी रशीद मसूद, पूर्व मंत्री एवं सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे चौधरी यशपाल सिंह, पूर्व मंत्री जगदीश राणा, पूर्व मंत्री राजेंद्र राणा, पूर्व मंत्री संजय गर्ग, पूर्व सांसद बाबू मुल्कीराज सैनी, चौधरी बख्तावर सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष जगपाल दास एवं चौधरी रुद्रसेन, पूर्व विधायक इमरान मसूद, सरफराज खान, फैसल सलमानी, ब्रिजेश शर्मा आदि से भी उनके आत्मीय संबंध रहे। उन्होंने जनपद में कई विधानसभा और लोकसभा चुनाव में सपा के प्रत्याशियों के पक्ष में जनसभाएं कीं। जनपद में उनकी अंतिम जनसभा फरवरी 2014 में राजकीय मेडिकल कॉलेज में हुई थी।
1987 में क्रांति रथ लेकर आए
जनपद में सपा संस्थापक वर्ष 1987 में क्रांति रथ लेकर आए थे, जब उनके साथ अमेठी के राजा संजय सिंह, रामशरण दास, वीके जैन आदि भी साथ थे। जनपद में नानौता, गंगोह, नकुड़ और सरसावा के डीसी जैन इंटर कॉलेज में जनसभा की थी। ग्राम सांपला स्थित इंटर कॉलेज मैदान में हुई जनसभा में मुख्य भूमिका अदा करने वाले बसंत कुमार बताते हैं कि मुलायम सिंह यादव ने किसानों, मजदूरों, पिछड़ों और वंचित समाज के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया था। यहां से क्रांति रथ सहारनपुर पहुंचा था और रात को जनमंच में सभा हुई थी। रात को देहरादून चौक स्थित लोक निर्माण विभाग के अतिथिगृह में रुकने के बाद अगले दिन उन्होंने गागलहेड़ी इंटर कॉलेज में भी सभा की और ग्राम तिवाया भी पहुंचे। इसके बाद क्रांति रथ देवबंद पहुंचा था।
मुलायम सिंह यादव का देवबंद से भी गहरा नाता रहा है। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव एक चुनावी जनसभा को संबोधित करने के लिए देवबंद आए थे।
यहां जामिया तिब्बिया मेडिकल कॉलेज में जनसभा को संबोधित करने से पूर्व मुलायम सिंह यादव ने इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के तत्कालीन मोहतमिम मौलाना मरगूबुर्रहमान और जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी से मुलाकात की थी। उस दौरान मुलायम सिंह ने मोहतमिम मौलाना मरगूबुर्रहमान से उनका हाथ अपने सिर पर रखवाकर उनसे आशीर्वाद लिया था। मोहतमिम से मुलाकात के बाद मुलायम सिंह यादव चर्चाओं में आ गए थे।
बाद में मुलायम सिंह ने जमीयत अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी से उनके आवास पर भी जाकर मुलाकात की थी। उस दौरान दोनों के बीच लंबी वार्ता हुई थी। अरशद मदनी की मांग पर ही उन्होंने सहारनपुर मेडिकल कॉलेज का नाम शेखुल हिंद रखा था।
मुस्लिम समाज से मांगा था समर्थन
मुलायम सिंह यादव ने जनसभा में लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के लिए मुस्लिम समाज से समर्थन मांगा था, साथ ही पार्टी की मजबूती के लिए कार्य करने को कार्यकर्ताओं में जोश भरा था। देवबंद के वरिष्ठ सपा नेता असद जमाल फैजी, पूर्व विधायक माविया अली और डॉ. अनवर सईद बताते हैं कि नेताजी उस दौरान करीब दो घंटे देवबंद में रुके थे। मुलायम सिंह के निधन से सपाइयों को गहरा दुख पहुंचा है।
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पूर्व सूचना आयुक्त की शादी में पहुंचे थे नेताजी
सपा युवजन सभा के नेता व पूर्व सूचना आयुक्त मोहम्मद उस्मान अंबेहटवी की शादी में वर्ष 1991 में मुलायम सिंह यादव शिरकत करने उनके पैतृक गांव अंबेहटा शेखां पहुंचे, जहां कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया गया।
सहारनपुर में छपे थे सपा के स्थापना दिवस के लिए पोस्टर
सपा का स्थापना दिवस कार्यक्रम लखनऊ में हुआ था, लेकिन इसके लिए पोस्टर सहारनपुर की इलेक्ट्रिक प्रेस में छपे थे। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष जगपाल दास याद करते हैं कि स्थापना दिवस से एक सप्ताह पहले मुलायम सिंह यादव ने फोन करके कार्यक्रम से दो दिन पहले पोस्टर लखनऊ भिजवाने के लिए कहा था, लेकिन वे स्वयं ही जीप चलाकर पोस्टर पहुंचाने तय दिन से पहले ही पहुंच गए थे। जिस पर मुलायम सिंह उनकी पीठ थपथपाई थी।
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चार बार आए रामशरण दास के गांव
सपा के आजीवन प्रदेश अध्यक्ष रहे चौधरी रामशरण दास से राजनीतिक से लेकर निजी तौर पर बेहद आत्मीयता रही। वे उनके गांव में शादियों से लेकर उनकी शोक सभा तक में पहुंचे। पहली बार में 1986 में उनके बेटे जगपाल दास के मंढे में आए थे। दो बार उनकी पौत्रियों की शादी में और अंतिम बार रामशरण दास की शोकसभा में 11 नवंबर 2008 को शामिल हुए थे।