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सहारनपुर: सर्किट हाउस रोड केस में पूर्व डीएम मनीष बंसल के खिलाफ कोर्ट में प्रार्थना पत्र, ये है पूरा मामला
Wed, 07 Oct 2026 07:45 PM IST
Mohd Mustakim
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
Published by: Mohd Mustakim
Updated Wed, 07 Oct 2026 07:45 PM IST
सार
सर्किट हाउस रोड पर चार अप्रैल 2026 तक अतिक्रमण खुद हटाने का नोटिस दिया गया था। मगर अधिकारियों ने एक अप्रैल को ही मौके पर जाकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी। मामले में कई लोग कोर्ट चले गए थे।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : AI
विस्तार
सर्किट हाउस रोड प्रकरण में अब पूर्व डीएम मनीष बंसल को भी प्रतिवादी बनाने की तैयारी चल रही है। विशेष न्यायाधीश एससी, एसटी कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है। इसमें तत्कालीन डीएम मनीष बंसल का भी नाम शामिल है।
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लोक निर्माण विभाग द्वारा सर्किट हाउस रोड की दोनों पटरियों का चौड़ीकरण किया जाना था। सड़कों का स्वामित्व सिंचाई विभाग के पास होने के चलते जिला प्रशासन के निर्देश पर सिंचाई विभाग ने अतिक्रमण चिह्नित किए थे। इसमें अनेक लोगों के मकानों और दुकानों को सड़क पर दर्शाकर नोटिस जारी किए थे। चार अप्रैल 2026 तक अतिक्रमण खुद हटाने को कहा था।
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आरोप है कि अधिकारियों ने एक अप्रैल को ही मौके पर जाकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी। मामले में कई लोग कोर्ट चले गए थे। एससी-एसटी कोर्ट में एक दर्जन से अधिक अपील की गई थीं। इनमें नगर आयुक्त, सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम सदर सहित विभिन्न विभागों के करीब नौ अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया था। इसमें पिछले सप्ताह नया मोड़ तब आया, जब एससी-एसटी कोर्ट ने 12 अपीलों को खारिज कर दिया।
अधिवक्ता राजकुमार ने बताया कि अब लक्कड़ माजरा निवासी ममता की ओर से अधिकारियों के खिलाफ एससी एक्ट सहित अनेक धाराओं में जांच की मांग एससी-एसटी कोर्ट से की गई है। ममता ने प्रार्थना पत्र में बताया कि सर्किट हाउस रोड पर उनका मकान है। अभिलेखों में ससुर रतिराम के नाम है। आरोप है कि तत्कालीन डीएम मनीष बंसल ने नौ मार्च 2026 को अधिकारियों से आपराधिक षड्यंत्र कराकर, धोखाधड़ी व कूटरचना से अभिलेख तैयार किए।
दावा किया कि उनके पास सिंचाई विभाग के 12 नवंबर 2015 के दस्तावेज हैं। उनमें सिंचाई विभाग ने लिखा है कि रजबाहा मेघछप्पर के मध्य से चार मील पांच फर्लांग से पांच मील पांच फर्लांग पर पटरी चौड़ाई बाईं तरफ 35 फीट व दाईं तरफ चौड़ाई 20 फीट है। इसके बावजूद पूर्व डीएम ने उनके मकान और दुकानें तुड़वा दिए।
28 मार्च के पत्र का दिया हवाला
ममता ने अपर खंड पूर्वी यमुना नहर देहरादून रोड के 28 मार्च 2026 के पत्र का भी हवाला दिया। बताया कि सिंचाई विभाग की तरफ से चार अप्रैल तक कब्जा हटवाने के नाम पर नोटिस दिया गया था, लेकिन अधिकारियों ने एक अप्रैल 2026 को ही उसके मकान सहित अनुसूचित जाति के अन्य लोगों के घर, दुकान आदि दो से चार फीट तक तोड़ दिए, जो संगठित अपराध है। आरोप लगाया कि उन्हें रोकने की कोशिश की तो लोक सेवकों ने जान से मारने की धमकी देते हुए जाति सूचक शब्द बोले।
ममता ने अपर खंड पूर्वी यमुना नहर देहरादून रोड के 28 मार्च 2026 के पत्र का भी हवाला दिया। बताया कि सिंचाई विभाग की तरफ से चार अप्रैल तक कब्जा हटवाने के नाम पर नोटिस दिया गया था, लेकिन अधिकारियों ने एक अप्रैल 2026 को ही उसके मकान सहित अनुसूचित जाति के अन्य लोगों के घर, दुकान आदि दो से चार फीट तक तोड़ दिए, जो संगठित अपराध है। आरोप लगाया कि उन्हें रोकने की कोशिश की तो लोक सेवकों ने जान से मारने की धमकी देते हुए जाति सूचक शब्द बोले।
इनको भी बनाया आरोपी
ममता ने तत्कालीन डीएम के अलावा नगर आयुक्त, सिटी मजिस्ट्रेट, तत्कालीन एसडीएम सदर, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग, तत्कालीन हल्का लेखपाल, तत्कालीन कानूनगो, तत्कालीन थाना प्रभारी सदर, तत्कालीन थाना प्रभारी कुतुबशेर को नामजद किया है। इनके अलावा 50 अज्ञात भी शामिल हैं।
ममता ने तत्कालीन डीएम के अलावा नगर आयुक्त, सिटी मजिस्ट्रेट, तत्कालीन एसडीएम सदर, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग, तत्कालीन हल्का लेखपाल, तत्कालीन कानूनगो, तत्कालीन थाना प्रभारी सदर, तत्कालीन थाना प्रभारी कुतुबशेर को नामजद किया है। इनके अलावा 50 अज्ञात भी शामिल हैं।