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Saharanpur News: रोहिंग्या गिरफ्तार, दलाल ने बनवाकर दिए थे आधार और पैन कार्ड
Fri, 27 Feb 2026 12:59 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 27 Feb 2026 12:59 AM IST
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रोहिंग्या शहाबुद्दीन।
- फोटो : संवाद
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश आतंकवाद विरोधी दस्ता (यूपी एटीएस) ने थाना कुतुबशेर क्षेत्र की एकता कॉलोनी से रोहिंग्या को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से मोबाइल फोन, आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, मकान के बैनामे सहित कई दस्तावेज मिले हैं। वह कई सालों से जिले में रहकर एक मीट फैक्टरी में काम कर रहा था, जो म्यांमार का रहने वाला है।
पिछले कई दिनों से एटीएस को सूचना मिल रही थी कि म्यांमार के कुछ लोग अवैध रूप से भारत में आकर जिले की मीट फैक्टरियों में काम कर रहे हैं। फर्जी तरीके से भारतीय दस्तावेज कराकर रह रहे हैं। बुधवार शाम को एटीएस यूनिट की टीम देवबंद से टपरी क्षेत्र पहुंची। एकता कॉलोनी के पास मैदान में एक संदिग्ध व्यक्ति के खड़े होने की सूचना मिली। इसके पास एटीएस तलाश में जुट गई। एकता कॉलोनी में एटीएस ने संदिग्ध व्यक्ति को घेरकर पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम शाहबुद्दीन पुत्र सैय्यद अकबर निवासी नदीम कॉलोनी बताया, जो मूलरूप से म्यांमार का रहने वाला है। उसकी जेब से मोबाइल फोन बरामद हुआ।
मोबाइल में सिम नंबर और दो आईएमईआई नंबर दर्ज पाए गए। फोन को सील कर कब्जे में लिया गया। इसके अलावा नीले रंग की एक स्लिप मिली, जिस पर संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त का उल्लेख था। उस पर शाहबुद्दीन का नाम, फोटो, रेफरेंस आईडी थी। आधार कार्ड भी मिला। पॉलिथीन में रखे दस्तावेजों में जमीन के बैनामे, बैंक खाता, बिजली बिल की रसीद, पैन कार्ड की प्रति और अन्य व्यक्तियों के आधार कार्ड की छायाप्रतियां बरामद हुईं।
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-- 20-25 वर्ष पहले अवैध रूप से आया भारत
पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह मूल रूप से म्यांमार का निवासी है और 20-25 वर्ष पूर्व अवैध रूप से भारत आया था। उसने बताया कि मीट फैक्ट्री में काम करने और अन्य मजदूरी करने के लिए भारतीय पहचान पत्र की आवश्यकता होती है, इसलिए एजेंट के माध्यम से आधार कार्ड बनवाया। एजेंट का नाम याद नहीं होने की बात कही। उसने बताया कि उसकी मां सारा खातून और पिता अब्दुल हुसैन (उर्फ अकबर) के भी यूएनएचसीआर(संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त) कार्ड की प्रतियां उसके पास हैं।
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-- स्थानीय पुलिस और एलआईयू को नहीं लगी भनक
एकता कॉलोनी में रोहिंग्या कई सालों से रह रहा था। इसकी भनक स्थानीय पुलिस और एलआईयू को नहीं लगी। यह हाल तब है जब छह नवंबर 2025 को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सहारनपुर से अनंतनाग निवासी संदिग्ध आतंकी डॉ. आदिल अहमद को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जिलेभर में दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों की जांच हुई थी। इसके बावजूद न पुलिस रोहिंग्या को तलाश पाई थी और न ही एलआईयू को पता चला था।
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-- पहले भी पकड़े जा चुके हैं जिले में छिपे रोहिंग्या
जिले में पहले भी यूपी एटीएस रोहिंग्याओं को पकड़ चुकी है। 25 जुलाई 2023 में एटीएस ने महानगर की कमेला और एकता कॉलोनी से दो रोहिंग्याओं को गिरफ्तार किया था। तब इनके पास से मोबाइल फोन, फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज भी बरामद हुए थे। पूछताछ में सामने आया था कि वह यहां आठ साल से रह रहे थे। दोनों प्लाॅट खरीदने की तैयारी कर रहे थे।
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पिछले कई दिनों से एटीएस को सूचना मिल रही थी कि म्यांमार के कुछ लोग अवैध रूप से भारत में आकर जिले की मीट फैक्टरियों में काम कर रहे हैं। फर्जी तरीके से भारतीय दस्तावेज कराकर रह रहे हैं। बुधवार शाम को एटीएस यूनिट की टीम देवबंद से टपरी क्षेत्र पहुंची। एकता कॉलोनी के पास मैदान में एक संदिग्ध व्यक्ति के खड़े होने की सूचना मिली। इसके पास एटीएस तलाश में जुट गई। एकता कॉलोनी में एटीएस ने संदिग्ध व्यक्ति को घेरकर पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम शाहबुद्दीन पुत्र सैय्यद अकबर निवासी नदीम कॉलोनी बताया, जो मूलरूप से म्यांमार का रहने वाला है। उसकी जेब से मोबाइल फोन बरामद हुआ।
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मोबाइल में सिम नंबर और दो आईएमईआई नंबर दर्ज पाए गए। फोन को सील कर कब्जे में लिया गया। इसके अलावा नीले रंग की एक स्लिप मिली, जिस पर संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त का उल्लेख था। उस पर शाहबुद्दीन का नाम, फोटो, रेफरेंस आईडी थी। आधार कार्ड भी मिला। पॉलिथीन में रखे दस्तावेजों में जमीन के बैनामे, बैंक खाता, बिजली बिल की रसीद, पैन कार्ड की प्रति और अन्य व्यक्तियों के आधार कार्ड की छायाप्रतियां बरामद हुईं।
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पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह मूल रूप से म्यांमार का निवासी है और 20-25 वर्ष पूर्व अवैध रूप से भारत आया था। उसने बताया कि मीट फैक्ट्री में काम करने और अन्य मजदूरी करने के लिए भारतीय पहचान पत्र की आवश्यकता होती है, इसलिए एजेंट के माध्यम से आधार कार्ड बनवाया। एजेंट का नाम याद नहीं होने की बात कही। उसने बताया कि उसकी मां सारा खातून और पिता अब्दुल हुसैन (उर्फ अकबर) के भी यूएनएचसीआर(संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त) कार्ड की प्रतियां उसके पास हैं।
एकता कॉलोनी में रोहिंग्या कई सालों से रह रहा था। इसकी भनक स्थानीय पुलिस और एलआईयू को नहीं लगी। यह हाल तब है जब छह नवंबर 2025 को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सहारनपुर से अनंतनाग निवासी संदिग्ध आतंकी डॉ. आदिल अहमद को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जिलेभर में दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों की जांच हुई थी। इसके बावजूद न पुलिस रोहिंग्या को तलाश पाई थी और न ही एलआईयू को पता चला था।
जिले में पहले भी यूपी एटीएस रोहिंग्याओं को पकड़ चुकी है। 25 जुलाई 2023 में एटीएस ने महानगर की कमेला और एकता कॉलोनी से दो रोहिंग्याओं को गिरफ्तार किया था। तब इनके पास से मोबाइल फोन, फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज भी बरामद हुए थे। पूछताछ में सामने आया था कि वह यहां आठ साल से रह रहे थे। दोनों प्लाॅट खरीदने की तैयारी कर रहे थे।