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Saharanpur News: रमजान रहमतों, बरकतों और मगफिरत का मुबारक महीना
Sat, 01 Mar 2025 12:17 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 01 Mar 2025 12:17 AM IST
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देवबंद। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व आलिम-ए-दीन मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने रमजान माह पर रोशनी डाली। कहा कि रमजान रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना है। अल्लाह इस माह में हर इंसान को बुरे कामों से तौबा करने का मौका देता है।
मुकद्दस रमजान का महीना शनिवार-रविवार से आरंभ हो रहा है। शुक्रवार को रमजान माह की विशेषता बताते हुए मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि रोजे का मकसद सिर्फ भूखा-प्यासा रहना नहीं, बल्कि प्रमुख रूप से इसके तीन मकसद हैं। एक तो भूख पर नियंत्रण रखने की क्षमता का विकास करना, दूसरा भूख से गरीबों के लिए एहसास पैदा करना, तीसरा खुदा में आस्था को गहरा करते हुए उसका शुक्रिया अदा करना है।
उन्होंने कहा कि अल्लाह ने रमजान का महीना इसलिए बनाया है ताकि हम सब लोग अपनी-अपनी तरबियत (प्रशिक्षण) करें। गरीबों की सहायता करना हमारी बुनियादी जिम्मेदारी है। कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि रमजान के महीने में बहुत लोग ऐसे भी हैं जिन्हें रोजा खोलने के लिए इफ्तारी से लेकर भर पेट खाना तक नसीब नहीं होता। ऐसे लोगो का हम खास ख्याल रखें। उन्होंने कहा कि इस मुबारक महीने में अल्लाह की राह में जो व्यक्ति एक रुपया खर्च करता है, उसे सत्तर रुपये खर्च करने के बराबर सवाब मिलता है। इसलिए इस्लाम के बताए हुक्म के मुताबिक रमजान में रोजे रखें, तरावीह पढ़ें और पांचों वक्त की नमाज पढ़ें और दूसरों का ख्याल रखें।
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मुकद्दस रमजान का महीना शनिवार-रविवार से आरंभ हो रहा है। शुक्रवार को रमजान माह की विशेषता बताते हुए मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि रोजे का मकसद सिर्फ भूखा-प्यासा रहना नहीं, बल्कि प्रमुख रूप से इसके तीन मकसद हैं। एक तो भूख पर नियंत्रण रखने की क्षमता का विकास करना, दूसरा भूख से गरीबों के लिए एहसास पैदा करना, तीसरा खुदा में आस्था को गहरा करते हुए उसका शुक्रिया अदा करना है।
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उन्होंने कहा कि अल्लाह ने रमजान का महीना इसलिए बनाया है ताकि हम सब लोग अपनी-अपनी तरबियत (प्रशिक्षण) करें। गरीबों की सहायता करना हमारी बुनियादी जिम्मेदारी है। कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि रमजान के महीने में बहुत लोग ऐसे भी हैं जिन्हें रोजा खोलने के लिए इफ्तारी से लेकर भर पेट खाना तक नसीब नहीं होता। ऐसे लोगो का हम खास ख्याल रखें। उन्होंने कहा कि इस मुबारक महीने में अल्लाह की राह में जो व्यक्ति एक रुपया खर्च करता है, उसे सत्तर रुपये खर्च करने के बराबर सवाब मिलता है। इसलिए इस्लाम के बताए हुक्म के मुताबिक रमजान में रोजे रखें, तरावीह पढ़ें और पांचों वक्त की नमाज पढ़ें और दूसरों का ख्याल रखें।
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