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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Rain: Fierce flood in Siddhapeeth Shakambhari Devi, river water entered the population, houses submerged

आफत की बारिश: सिद्धपीठ शाकंभरी देवी में भयंकर बाढ़, आबादी में घुसा नदियों का जल, मकान डूबे, घर छोड़कर निकले लोग

Tue, 11 Jul 2023 10:32 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 11 Jul 2023 10:32 PM IST
सार

सहारनपुर में बारिश के कारण शाकंभरी देवी में भयंकर बाढ़ आ गई। पानी के बहाव के कारण फसलें बर्बाद हो गई हैं तो संपर्क मार्ग ध्वस्त हो गए हैं। वहीं कई स्थानों पर भूमि का कटाव हो रहा है। प्रशासन ने तटवर्ती इलाकों में अलर्ट जारी किया है।

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Rain: Fierce flood in Siddhapeeth Shakambhari Devi, river water entered the population, houses submerged
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को निकाला बाहर - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पहाड़ी व मैदानी क्षेत्र में हो रही भारी बारिश से मंगलवार की सुबह क्षेत्र की बरसाती नदियों में भयंकर बाढ़ आ गईं। कलसिया, दबकौरा समेत दर्जनों गांवों की आबादी में गांगरोह नदी की बाढ़ का पानी भर गया है। साढ़ौली कदीम, सलेमपुर, नगला झंड़ा व बाबैल बुजुर्ग में जलभराव से तीन-चार फीट आबादी में भरा है। गांव बाबैल बुजुर्ग में दिल्ली-यमनोत्री हाईवे पर कई फीट पानी बह रहा है, जिससे हाईवे पर छोटे वाहनों का आवागमन बंद है, केवल बड़े वाहन ही आ जा रहे हैं। गोविंदपुरम में देर रात बारिश का पानी घरों पहुंचने पर लोग बाहर निकलकर आ गए। जिसके बाद पुलिस ने लोगों को वहां से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
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अब्दुल्लापुर गांव का संपर्क मार्ग कटाव के चलते ध्वस्त हो गया है। बुबका के पास बुबका-कोठड़ी सड़क मार्ग में कटाव हुआ है। इसी सड़क मार्ग से दयालपुर गांव को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग व पुलिया भी ध्वस्त हो गई है। इस मार्ग पर बनी पुलिया भी टूट गई है। आबादी से लेकर खेत खलिहान तक जलमग्न है।
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नदियों से घिरे तहसील क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों का तहसील व जनपद मुख्यालय से संपर्क कटा हुआ है। सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी में माता के मंदिर की सीढ़ियों तक नदी का पानी पहुंच गया है। माता के मंदिर के आस-पास लगी प्रसाद व अन्य की दुकानें नदी की जलधारा में डूब गई है। इससे दुकानदारों को काफी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने सुरक्षित स्थान पर शरण ली है।
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ग्रामीणों द्वारा पैसा इकट्ठा कर बनाए गये नौशेरा-डुडू माजरा का कच्चा संपर्क मार्ग बूढ़ी यमुना में आई बाढ़ से पूरी ध्वस्त हो गया। इससे अकबरपुर बांस, डुडूमाजरा, शाहपुर बांस, माजरी, छज्जा आदि गांवों का संपर्क तहसील मुख्यालय से कट गया है।

छुटमलपुर क्षेत्र के रेडी गांव में आबादी में दो से तीन फीट तक हिंडन नदी का पानी घुस गया। इससे ग्रामीणों के घरों में रखा सामान और खाद्यान्न आदि खराब हो गया। गांव जीवाला में भी बाहरी आबादी में हिंडन का पानी घुस गया। गांव मांडुवाला में हिंडन से खेतों में हुए कटाव के चलते किसान मीनू रानी के यूकेलिप्टिस के सौ पेड़, जगपाल के पचास तथा प्रेमवती के चालीस पेड़ नदी की भेंट चढ़ गए। पीड़ित किसानों ने मुआवजे की मांग की है।

साढ़ौली कदीम के हथौली, सलेमपुर गदा, रसूलपुर, रोगला हथौली, दबकोरा, चकखीजरपुर आदि सहित अनेक गांवों में लोगों के घरों में पानी भरा है। गन्देवड़ चिलकाना मुख्य मार्ग पर जलभराव होने से आवागमन बाधित हो रहा है। इसके चलते स्थानीय ग्रामीणों का तहसील एवं जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है।

तीन दिन हुई बारिश ढमोला और पांवधोई नदी के किनारे बसे लोगों के लिए आफत बनकर बरसी है। बारिश बंद होने के बाद भी नदियों का जल स्तर बढ़ा है, जिसके साथ बाढ़ प्रभावित परिवारों की समस्याएं भी बढ़ी हैंं। वर्तमान में एक दर्जन से अधिक कॉलोनियां और सैकड़ों परिवार बाढ़ से प्रभावित हैं। हालांकि बारिश रुकने से कुछ लोगों को राहत मिली है।

जनपद में शनिवार की सुबह पांच बजे बारिश शुरू हुई थी, जो कभी हल्की, कभी झमाझम तो कभी मूसलाधार बरसी। सोमवार की रात आठ बजे तक यानी करीब 63 घंटे तक लगातार हुई बारिश से महानगर के बीच से गुजरने वाली ढमोला और पांवधोई नदी उफान पर आ गई, लेकिन सोमवार की रात आठ बजे से मंगलवार की प्रात: तीन बजे तक बारिश बंद रही।

प्रात: तीन बजे फिर बूंदाबांदी शुरू हुई जो करीब सात बजे तक हुई। उसके बाद दिन भर बादलों और सूरज की आंख मिचौली चलती रही। शाम साढ़े छह बजे धूप निकली हुई थी। लेकिन इसके बावजूद बाढ़ प्रभावित यानी ढमोला और पांवधोई किनारे बसे लोगों की मुसीबत कम नहीं हुई। बारिश के ब्रेक के बावजूद नदियों का जल स्तर बढ़ा। सोमवार की रात नौ बजे पुल खुमरान से भूतेश्वर इंटर कॉलेज मैदान तक पांवधोई का पानी सड़कों पर कमर तक था। ऐसे में पुलिस ने संबंधित मार्गों पर आवाजाही बंद करा दी। इसके अलावा पुल खुमरान से बेहट अड्डा जाने वाले मार्ग पर भी घुटनों से ऊपर तक पानी रहा। लोगों को चकराता मार्ग से होकर निकलना पड़ा।

रात में सात घंटे बारिश बंद रहने के बावजूद नदी का जल स्तर बढ़ा। मंगलवार की सुबह पानी पुल खुमरान को पार कर दालमंडी पुल तक दोनों सड़कों पर भर गया। दूसरी ओर भूतेश्वर इंटर कॉलेज मैदान को पार कर सौ मीटर और आगे तक पानी कॉलोनी में घुस गया।

उधर, ढमोला नदी में जल स्तर कुछ कम हुआ। साकेत कॉलोनी में घुसा पानी करीब तीन फीट नीचे आया, लेकिन जिन परिवारों के मकान नदियों की बाढ़ में दो से सात और आठ फीट तक डूब गए उनके सामने परेशानी रही। लोगों के लिए भोजन और पानी की समस्या रही। ऐसे में स्थानीय लोग मदद के लिए आगे आए। उन्होंने घरों की छतों पर फंसे लोगों के लिए पेयजल और भोजन के पैकेट की व्यवस्था की।
 
साकेत कॉलोनी में आई बाढ़ में फंसे लोकेश ने बताया कि उनका पूरा परिवार दो दिन से छत पर है। नीचे घरों में रखा सामान खराब हो चुका है। पेयजल और बिजली की किल्लत है। पड़ोसियों ने भोजन आदि की मदद मिल रही है।
-न्यू साकेत कॉलोनी निवासी अजय कुमार शर्मा प्रशासन और नगर निगम से नाराज हैं। उनका कहना है कि प्रशासन शिविर लगाकर राहत देने की बात कह रहा है, लेकिन मोहल्लों में फंसे लोग भोजन तक से तरस रहे हैं। पानी तक नहीं मिल रहा है।
-कुसुम शर्मा ने बताया कि वह और उनका परिवार मुसीबत में हैं। सामान खराब होने के साथ ही घरों में सीलन आ चुकी है। पूरी रात जागकर काटनी पड़ी है। सभी में डर बना हुआ है।

75 घंटे में हुई 436 एमएम बारिश
जनपद में शनिवार की सुबह पांच बजे से मंगलवार की सुबह तक कुल 436 एमएम बारिश हुई है। सबसे अधिक बारिश सोमवार की सुबह आठ बजे से मंगलवार की सुबह आठ बजे तक हुई, जो 225 एमएम दर्ज की गई। इस अंतराल में शहर में कम और पहाड़ों में अधिक बारिश हुई, जो ढमोला और पांवधोई के जल स्तर बढ़ने का कारण बनी।

गिरे दो मकान, मलबे में दबा सामान
बारिश रुकने के बाद पुराने शहर में दो मकान गिरे हैं। पार्षद मंसूर बदर ने बताया कि भैया बाग में गुलजार के दो कमरों की छत गिरी, जिससे सामान दबकर खत्म हो गया। इसके अलावा सराय शाहजी में गुल्फाम पुत्र सुल्तान का मकान गिर गया। मंसूर बदर ने तुरंत प्रशासन को सूचना दी, जिसके बाद सदर तहसील के पटवारी ने मौके का मुआयना किया। गनीमत रही कि किसी को चोट नहीं आई, लेकिन दोनों मकानों में सामान दब जाने से आर्थिक नुकसान हुआ है।
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