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लीकेज मरम्मत की गड़बड़ियों की जांच पर सवाल

Sat, 29 Jan 2022 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jan 2022 11:39 PM IST
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Question on investigation of leakage repair errors
सहारनपुर। नगर निगम के जल कल विभाग की लीकेज मरम्मत में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी की शिकायत की जांच पूरी हो गई है। रिपोर्ट भी मंडलायुक्त को सौंप दी गई है, लेकिन शिकायतकर्ता इससे संतुष्ट नहीं हैं। संतुष्ट नहीं होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि जिस विभाग की शिकायत थी निगम ने उसी विभाग के अधिकारी से जांच करा दी। ऐसे में शिकायतकर्ता लोकायुक्त से शिकायत करने की तैयारी में हैं।
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पार्षद मंसूर बदर ने 11 जनवरी 2022 को अपने साथी पार्षदों को साथ लेकर मंडलायुक्त लोकेश एम से मुलाकात कर उन्हें शिकायती पत्र सौंपा था। पार्षदों का आरोप था कि जल कल में ढाई वर्ष से एक ही दर पर टेंडर किए जा रहे हैं, जबकि अलग-अलग वित्तीय वर्ष में अलग-अलग कार्यों के लिए अलग निविदाएं आमंत्रित की जानी चाहिए, लेकिन नहीं की गई। पार्षद मंसूर बदर का यह भी आरोप था कि जलकल विभाग में ढाई साल से ठेकेदारों को 150 मदों जैसे पाइप पीवीसी, पाइप लोहा, सलूसवाल, बैंड-रेड्यूसर, फ्लैंच आदि यूनिट दर से जिनमें एक-एक यूनिट दर 12,000 से 13,000 रुपये की दर से ठेकेदारों को भुगतान किया गया है, चाहे वह सामान लगाया गया हो या नहीं। एक लीकेज जो कि सर्फ पाइप मरम्मत कराकर ठीक हो सकती थी उसे ठीक करने में एक से दो मीटर की पीवीसी या सीआई का पाइप लगाना दर्शाया गया है, जबकि मौके पर उक्त सामान लगा ही नहीं है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मंडलायुक्त ने नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह को पत्र लिखकर दिए गए तथ्यों की जांच गहनता से कराते हुए एक सप्ताह के भीतर सुस्पष्ट आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। पार्षद मंसूर बदर का आरोप है कि निगम ने गंभीर मामले की जांच जलकल के महाप्रबंधक मनोज आर्य को दी, जबकि जांच अन्य विभाग से कराने की मांग की गई थी। यह आरोप है कि जांच के लिए अधिकारी मौके पर नहीं गए हैं, जिससे पता चल सके कि लीकेज मरम्मत के नाम पर असल में होता क्या है और फाइल किस काम की बनती हैं। उन्होंने मामले की शिकायत लोकायुक्त से करने की बात कही है। जल कल के महाप्रबंधक मनोज आर्य का कहना है कि उनसे कुछ जानकारियां मांगी गई थी जो उन्होंने 28 जनवरी को सौंप दी हैं।
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पार्षदों की शिकायत के बाद मंडलायुक्त ने लीकेज मरम्मत को लेकर जांच के निर्देश दिए थे। जांच करा ली गई है, जिसकी रिपोर्ट मंडलायुक्त को रिपोर्ट सौंपी भी जा चुकी है।
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ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।
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