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गाजियाबाद में अधिवक्ताओं के ऊपर हुए लाठी चार्ज का विरोध, अधिवक्ता न्यायिक कार्यों से रहे विरत

Mon, 04 Nov 2024 03:49 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: डिंपल सिरोही Updated Mon, 04 Nov 2024 03:49 PM IST
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Protest against the lathi charge on lawyers in Ghaziabad, lawyers abstained from judicial work
सहारनपुर में वकीलों की हड़ताल - फोटो : अमर उजाला

गाजियाबाद कांड को लेकर सहारनपुर अधिवक्ता एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओ ने  काली पट्टी पहनकर विरोध दिवस मनाते हुए न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया। गाज़ियाबाद मे अधिवक्ताओं पर हुए लाठीचार्ज को लेकर वकीलों में काफी आक्रोश है। अधिवक्ताओं ने आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। 

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 सहारनपुर अधिवक्ता एसोसिएशन  के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा कि गाजियाबाद में अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज होना  अधिवक्ताओं का अपमान है। जिसे अधिवक्ता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे।उन्होंने बताया कि 29 अक्तूबर को गाजियाबाद के जिला जज के न्यायालय में सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं से अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया। विरोध करने पर निहत्थे अधिवक्ताओं पर पुलिस से लाठी चार्ज कराया।

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अधिवक्ताओं ने  उच्च न्यायालय से न्यायाधीश की तत्काल निलंबन की मांग और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की न्यायालय कक्ष में घटित घटना पर बार काउंसिल ऑफ उप्र तत्काल संज्ञान लेकर आवश्यक व प्रभावी कार्यावाही अमल में लाए, जिससे कि भविष्य में अधिवक्ताओं के साथ न्यायालयों में इस प्रकार की शर्मनाक व दुखद घटनाएं दोबारा घटित नहीं हो और न्यायिक कार्य प्रभावित होने की संभावनाओं से बचा जा सके।

गाजियाबाद जनपद न्यायाधीश द्वारा न्याय व्यवस्था को छिन्नभिन्न करने का जो प्रयास न्यायालय कक्ष में किया गया वह हर प्रकार से निंदनीय है इस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा किसी भी न्यायिक अधिकारी से नहीं की जा सकती।

यह सर्व विदित है कि बेंच और बार एक रथ के दो पहिये हैं  लेकिन न्यायाधीश स्वयं को अधिवक्ताओं से अलग मानकर  कार्य करते चले आ रहे हैं। जिससे न्याय की गरिमा को ठेस पहुंच रही है और वादकारियों को उचित न्याय मिलने की संभावनाएं क्षीण होती है। अधिवक्ताओं को बोलने से रोका जाता है जबकि अधिवक्ता अपने वादी की आवाज को न्यायालय में रख रहा होता है।  जो किसी भी प्रकार से उचित नहीं है।

हड़ताल के कारण दूर दराज से आए वादकारी अपने मुकदमे में तारीख लेकर वापिस लौट गए अधिवक्ता न्यायालय में उपस्थित न होकर अपने चैम्बर और बार प्रांगण में काली पट्टी बांध कर बैठे रहे। दोपहर 1:30 बजे तक कचहरी परिसर खाली नजर आने लगा।

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