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कोरोना काल में बढ़ा औषधीय खेती से मुनाफा

Fri, 18 Jun 2021 12:07 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 18 Jun 2021 12:07 AM IST
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Profits from medicinal farming increased during the Corona period
सहारनपुर। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कोरोना काल में लोगों ने विभिन्न प्रकार की जड़ी बूटी पर भरोसा किया है। उन्होंने काढ़े तक का भरपूर सेवन किया है। इसके चलते बाजार में औषधीय फसलों की मांग और भाव में इजाफा हुआ है। इससे औषधीय खेती करने वाले किसानों का मुनाफा बढ़ा है।
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जनपद में करीब 95 हेक्टेयर क्षेत्रफल में औषधीय फसलों की खेती होती है। यहां पर तुलसी, सतावर, घृत कुमारी (एलोविरा), रूसा (कारडस मेरिनक मिल्क थिसिल), राखी बेल (पेसी फ्लोरा), अल्फा-अल्फा (लुरसन) आदि की खेती करीब 95 हेक्टेयर में होती है। कोरोना काल में विभिन्न प्रकार की औषधियों का प्रयोग करके लोगों ने अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया है। इससे बाजार में मांग बढ़ने से औषधीय खेती कर रहे किसानों का मुनाफा बढ़ा है।
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किसान बोले
औषधीय फसलों को बेचने के लिए कंपनियों से अनुबंध कर रखा है। शेष फसल को थोक व्यापारियों को बेचते हैं। कोरोना काल में तुलसी, कैंडुला फ्लावर, अल्फा अल्फा आदि औषधीय फसलों के भाव में इजाफा हुआ है। कोरोना संकट से पहले 35 रुपये बिकने वाली तुलसी 40 से 45 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही है। - सतीश कुमार, किसान ग्राम खुर्रमपुर।
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कोरोना काल में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली औषधियों की मांग बढ़ी है। इस दौरान घृतकुमार (एलोविरा) की मांग बढ़ी है। इसके चलते 35 रुपये प्रति किलो बिकने वाला पल्प अब 40 रुपये और 40 रुपये प्रति लीटर बिकने वाला जूस अब 50 रुपये हो गया है। - मतलूब अहमद, किसान ग्राम फतेहपुर।
जनपद में 95 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल औषधीय फसलों की खेती हो रही है। कई किसान सीधे कंपनियों के साथ अनुबंध कर उन्हें औषधीय फसलों की सप्लाई करते हैैं। जबकि कई किसान थोक व्यापारियों को अपना माल बेचते हैं। कोरोना काल में औषधीय फसलों की मांग बढ़ने से इनके रेट में इजाफा हुआ है। - अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।

जनपद में औषधीय खेती
फसल ----------- क्षेत्रफल
तुलसी ----------- 20 हेक्टेयर
सतावर ---------- 05 हेक्टेयर
घृतकुमारी ------- 30 हेक्टेयर
रूसा -------------- 20 हेक्टेयर
राखी बेल -------- 10 हेक्टेयर
अल्फा-अल्फा -----10 हेक्टेयर
नोट: उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार
औषधीय खेती के लिए मिलेगा निशुल्क प्रशिक्षण
पीएनबी ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान माटकी झरौली पर ग्रामीण युवाओं को औषधीय फसलों की खेती के लिए प्रशिक्षण देगा। इसके लिए दस दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें औषधीय फसलों की खेती, प्रोसेसिंग और बाजार के बारे में जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण पूूरी तरह से निशुल्क रहेगा। इसके लिए इच्छुक ग्रामीण युवाओं से आवेदन मांगे गए हैं।
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