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कहानी संघर्ष की: 13 साल की उम्र में घर छोड़ा, खुद कपड़े धोए-खाना बनाया, सात साल की तपन से निखरा प्रशांतवीर

Thu, 18 Dec 2025 03:29 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: डिंपल सिरोही Updated Thu, 18 Dec 2025 03:29 PM IST
सार

13 साल की उम्र में घर छोड़कर क्रिकेट के सपने के पीछे निकले प्रशांतवीर ने सात साल तक संघर्ष किया। खुद कपड़े धोए, खाना बनाया और आज चेन्नई सुपर किंग्स के लिए आईपीएल में चुने गए।

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Prashantveer Inspiring Journey: From Struggles to IPL Stardom with Chennai Super Kings
क्रिकेटर प्रशांतवीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जिस दिन से चला हूं मेरी मंजिल पे नजर है,

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आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा।
ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं,
तुमने मेरा कांटों भरा बिस्तर नहीं देखा।
यह पंक्तियां क्रिकेटर प्रशांतवीर पर सटीक बैठती हैं। आज वह जिस मुकाम पर हैं। वहां तक पहुंचने के लिए उन्हें छोटी सी उम्र में सात साल तक परिवार का त्याग करना पड़ा।

वर्ष 2018 में जब वह सहारनपुर आए उस समय उनकी उम्र मात्र 13 वर्ष थी। इतनी कम उम्र में माता-पिता और परिवार से दूर होना और दूसरे शहर में आकर अजनबी लोगों के बीच रहना हर किसी के लिए आसान नहीं होता, लेकिन प्रशांतवीर के सिर पर बड़ा क्रिकेटर बनने का जुनून था।
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छोटी उम्र में परिवार को छोड़कर प्रशांत अपने कोच के घर जिस कमरे में रहे। उस कमरे की हालत बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है। बिस्तर से लेकर तमाम चीजें अव्यवस्थित मिली। प्रशांत के कमरे की रंगाई-पुताई पता नहीं कब हुई होगी। बैड भी बहुत अच्छा नहीं है। गद्दे हैं, लेकिन बैडशीट नहीं है। बैड पर सामान्य रजाई और टूटा हुआ सोफा रखा है। सात साल से अपने कपड़े खुद धुलना और खाना खुद बनाना यह सब प्रशांतवीर की दिनचर्या का हिस्सा रहा।

कमरे के एक कोने में प्रशांतवीर के कपड़े, पुराने बल्ले और खेल का अन्य सामान एक कोने में पड़ा है। भले ही वह फिलहाल कानपुर में कैंप कर रहे हैं, लेकिन जिस तरह से उन्होंने अपनी रोजमर्रा की जरूरत का सामान यहां छोड़ा हुआ है। उससे उन्हें उम्मीद थी कि वह लौटकर फिर यहीं आएंगे, लेकिन एकाएक आईपीएल में 14.20 करोड़ रुपये में बिक्री ने प्रशांतवीर की जिंदगी बदल दी है। अब मुश्किल ही है कि वह सहारनपुर में रहें, लेकिन प्रशांतवीर को यहां तक पहुंचने के लिए आराम और परिवार त्यागना पड़ा।
 

प्रशांत रोटी बनाते थे दोस्त सेकता था
प्रशांतवीर को मैनपुरी हॉस्टल से सहारनपुर लाने वाले उनके साथी रक्षित गर्ग ने बताया कि वह प्रशांतवीर के जोड़ीदार रहे हैं। प्रशांत रोटी बनाता था तो वह सेकता था। अक्सर चिकन बनाते थे, क्योंकि चिकन प्रशांत का फेवरेट भोजन है। कपड़ों में भी कोई किसी का लोअर और टी-शर्ट पहनकर मैदान पर चला जाता था।

प्रशांतवीर की सफलता ही मेरी सफलता
रक्षित गर्ग के अंडर-14 में चयन से प्रभावित होकर ही प्रशांत वीर सहारनपुर आए थे। रक्षित अंडर-16 भी खेले, लेकिन प्रशांतवीर उससे भी चूक गए थे लेकिन उसके बाद प्रशांतवीर लगातार अंडर-19, रणजी सहित अनेक स्तर पर चुने जाते रहे और रक्षित पिछड़ते चले गए।

रक्षित अभी अंडर-19 हैं, जिन्होंने प्रयास नहीं छोड़ा है। प्रशांतवीर के आगे निकल जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें उतनी ही खुशी हो रही है, जितना खुद के चयन पर होती, क्योंकि उसने प्रशांत के साथ मिलकर जिंदगी को जिया है। प्रशांत की सफलता उनकी सफलता है।

 चेन्नई से खेलने का था सपना
प्रशांतवीर का एक साक्षात्कार वायरल हो रहा है, जिसमें वह बता रहे हैं कि चेन्नई सुपर किंग्स से खेलने का उनका सपना रहा है, लेकिन यह उम्मीद नहीं थी कि उन्हें चेन्नई के लिए चुना और खरीदा जाएगा। साक्षात्कार में वह अपनी सफलता का श्रेय बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला, सहारनपुर डिस्टि्रक्ट क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन मोहम्मद अकरम और कोच राजीव गोयल उर्फ टप्पू को दे रहे हैं।

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