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Saharanpur News: पुलिस को मृत व्यक्ति पर शक, करा सकता है गोकशी

Tue, 19 Mar 2024 12:53 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Tue, 19 Mar 2024 12:53 AM IST
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Police suspect dead person may be involved in cow slaughter
मुजफ्फर का फाइल फोटो। स्त्रोत - परिजन
सहारनपुर। पुरानी कहावत है कि पुलिस अपनी पर आए तो रस्सी काे भी सांप बना दे। ऐसा ही एक मामला मिर्जापुर थाने में सामने आया है। इसमें जिस व्यक्ति की पांच महीने पहले मौत हो चुकी है, उस पर पुलिस को शक है कि वह गोकशी करा सकता है। बाकायदा बाइस्तबा (बाइस्तबा का मतलब आरोपी नहीं कह सकते, शक के दायरे में होता है) लिखकर एफआईआर में मृतक का नाम शामिल कर दिया गया। सोमवार शाम पुलिस गांव में पहुंची तब पता चला कि व्यक्ति की मौत हो चुकी है।
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ऐसे समझें मामला

दरअसल, 15 मार्च को कुछ हिंदू संगठनों ने एक बाग में गोकशी किए जाने का आरोप लगाते हुए गंदेवड़-हथनीकुंड मार्ग पर जाम लगा दिया था। जब जांच के लिए पुलिस बाग में पहुंची तो वहां पर गोवंश के अवशेष पड़े मिले। इसके बाद मिर्जापुर थाना पुलिस ने एसआई राममेहर सिंह की तहरीर केस दर्ज कर लिया गया। एफआईआर में जो कॉलम आरोपी के नाम का होता है उसमें बाग मालिक बाइस्तबा मुजफ्फर पुत्र इकबाल निवासी रायपुर का नाम लिखा गया। तहरीर में लिखा गया कि आम के बाग में गाय की खाल व अवशेष पड़े हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि काफी दिन पहले किसी ने गोकशी करके डाल दिए गए। शक है कि गोकशी जिसका बाग है उसी ने की है या कराई है।
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पांच माह पहले हो चुकी है मौत



मुजफ्फर के छोटे भाई मरगूब हुसैन बीएसएफ से रिटायर हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार शाम जब पुलिस गांव में पहुंची तब बताया कि उसके भाई मुजफ्फर की 16 अक्टूबर 2023 को लंबी बीमारी के चलते मौत हो चुकी है। जो बेहट तहसील में दस्तावेज लेखक का काम करता था। वह चार भाई है और बाग भी चारों भाइयों का है। यह नाम गलत डाला गया है। हालांकि पुलिस का तर्क है कि मुजफ्फर को आरोपी नहीं बनाया गया है।
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यह उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि जो व्यक्ति इस दुनिया में ही नहीं है तो कैसे गोकशी करा सकता है। यदि पुलिस की मान भी लें कि शक के दायरे में आने पर नाम लिखा गया है तो एफआईआर में नाम लिखने से पहले जांच पड़ताल क्यों नहीं की गई। मुजफ्फर की मौत को पांच माह हो चुके हैं। क्या पांच माह तक किसी ने बाग में अवशेष नहीं देखे। अगर शक के दायरे में आने पर नाम लिखा भी है तो पुलिस कैसे उसे जांच में शामिल करेगी।




मामला संज्ञान में आने पर थाना पुलिस से जानकारी ली गई है। उस समय बाग मालिक को शक के दायरे में रखकर एफआईआर दर्ज हुई थी। एफआईआर में भी बाइस्तबा मुजफ्फर लिखा हुआ है। बाइस्तबा का मतलब है कि यह आरोपी नहीं है। शक के दायरे में है। जिसकी जांच की जाएगी।

- डॉ. विपिन ताडा, एसएसपी
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