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दीपावली पर कम घुला हवा में जहर
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सहारनपुर में कोर्ट रोड़ पर दीपावली पर आतिशबाजी के दौरान पटाखो से निकलता धूंआ
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। दीपावली पर हुई आतिशबाजी ने बीतेे वर्ष की तुलना में इस बार हवा में कम जहर घोला है। तीन वर्षों की तुलना करें तो आतिशबाजी कम हो रही है। इसकी तस्दीक एक्यूआई (हवा की गुणवत्ता) के आंकड़े कर रहे हैं। इस बार दीपावली पर एक्यूआई 270 दर्ज किया गया, जो बीते वर्षों के मुकाबले करीब 100 कम है।
वर्ष 2019 में दीपावली पर आतिशबाजी के करण एक्यूआई 381 तक रहा था, जो वर्ष 2020 में घटकर 374 पर आ गया था। यानी 2019 की तुलना में 2020 में कम आतिशबाजी हुई थी। इस बार दीपावली पर एक्यूआई 270 रहा है। हवा की गुणवत्ता मापने के लिए शहर में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की दो मशीनें स्थापित हैं, जिनमें एक घंटाघर पर है तो दूसरी आईआईटी परिसर में लगी है। दीपावली पर इस बार एक्यूआई घंटाघर पर 268 और आईआईटी परिसर में 283 दर्ज किया गया है, जो कि सामान्य दिनों में 150 से 175 तक रहता है। यानी आईआईटी परिसर और उसके आसपास के क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता घंटाघर के मुकाबले खराब रही। एक्यूआई का 270 तक रहना भी खराब स्थिति में आता है। क्योंकि यह स्थिति भी दिल और सांस के मरीजों के साथ ही गर्भवती महिलाओं, बच्चों और सामान्य लोगों के लिए भी कम खतरनाक नहीं है।
हवा की गुणवत्ता और उसकी स्थिति
एक्यूआई शून्य से 50 के बीच रहे तो ‘अच्छा’, 51 और 100 के बीच रहे तो ‘संतोषजनक’, 101 और 200 के बीच रहे तो ‘सामान्य’ 201 और 300 के बीच रहे तो ‘खराब’, 301 और 400 के बीच रहे तो ‘बेहद खराब’ और 401 से 500 के बीच रहे तो ‘गंभीर’ श्रेणी में माना जाता है।
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ध्वनि प्रदूषण में बढ़ोतरी
सामान्य दिनों में शहर का ध्वनि प्रदूषण 55 से 60 डेसीबल तक रहता है, जो दीपावली पर बढ़कर 71.9 डेसीबल तक दर्ज किया गया। ध्वनि प्रदूषण शहर में तीन जगहों पर मापा गया। चंद्रनगर में 72.4, दिल्ली रोड स्थित हसनपुर में 74 और घंटाघर पर 69.2 डेसीबल दर्ज किया गया। यानी हसनपुर में सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण रहा।
तो लोगों में आ रही जागरूकता
प्रदूषण किसी भी तरह का हो वह लगातार बढ़ रहा है, जो प्रकृति के साथ ही मानव जीवन के लिए भी खतरा है। यही वजह है कि बीते कई वर्षों से लगातार आतिशबाजी पर अंकुश लगाने की अपील की जाती रही है। स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित कर प्रदूषण रहित दीपावली मनाने की अपील की जा रही हैं। वहीं कोरोना काल ने भी लोगों को प्रदूषण को लेकर गंभीर किया है। शायद यही वजह है कि लोग जागरूक हो रहे हैं, जिसका नतीजा दीपावली पर एक्यूआई का आंकड़ा है।
इस बार दीपावली पर एक्यूआई 270 दर्ज किया गया है। घंटाघर की तुलना में आईआईटी परिसर और आसपास अधिक प्रदूषण रहा है। ध्वनि प्रदूषण में भी बढ़ोतरी हुई है। मगर बीते वर्षों से तुलना करें तो दोनों तरह के प्रदूषण में कमी आई है। -- डॉ. डीसी पांडेय, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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वर्ष 2019 में दीपावली पर आतिशबाजी के करण एक्यूआई 381 तक रहा था, जो वर्ष 2020 में घटकर 374 पर आ गया था। यानी 2019 की तुलना में 2020 में कम आतिशबाजी हुई थी। इस बार दीपावली पर एक्यूआई 270 रहा है। हवा की गुणवत्ता मापने के लिए शहर में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की दो मशीनें स्थापित हैं, जिनमें एक घंटाघर पर है तो दूसरी आईआईटी परिसर में लगी है। दीपावली पर इस बार एक्यूआई घंटाघर पर 268 और आईआईटी परिसर में 283 दर्ज किया गया है, जो कि सामान्य दिनों में 150 से 175 तक रहता है। यानी आईआईटी परिसर और उसके आसपास के क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता घंटाघर के मुकाबले खराब रही। एक्यूआई का 270 तक रहना भी खराब स्थिति में आता है। क्योंकि यह स्थिति भी दिल और सांस के मरीजों के साथ ही गर्भवती महिलाओं, बच्चों और सामान्य लोगों के लिए भी कम खतरनाक नहीं है।
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हवा की गुणवत्ता और उसकी स्थिति
एक्यूआई शून्य से 50 के बीच रहे तो ‘अच्छा’, 51 और 100 के बीच रहे तो ‘संतोषजनक’, 101 और 200 के बीच रहे तो ‘सामान्य’ 201 और 300 के बीच रहे तो ‘खराब’, 301 और 400 के बीच रहे तो ‘बेहद खराब’ और 401 से 500 के बीच रहे तो ‘गंभीर’ श्रेणी में माना जाता है।
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ध्वनि प्रदूषण में बढ़ोतरी
सामान्य दिनों में शहर का ध्वनि प्रदूषण 55 से 60 डेसीबल तक रहता है, जो दीपावली पर बढ़कर 71.9 डेसीबल तक दर्ज किया गया। ध्वनि प्रदूषण शहर में तीन जगहों पर मापा गया। चंद्रनगर में 72.4, दिल्ली रोड स्थित हसनपुर में 74 और घंटाघर पर 69.2 डेसीबल दर्ज किया गया। यानी हसनपुर में सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण रहा।
तो लोगों में आ रही जागरूकता
प्रदूषण किसी भी तरह का हो वह लगातार बढ़ रहा है, जो प्रकृति के साथ ही मानव जीवन के लिए भी खतरा है। यही वजह है कि बीते कई वर्षों से लगातार आतिशबाजी पर अंकुश लगाने की अपील की जाती रही है। स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित कर प्रदूषण रहित दीपावली मनाने की अपील की जा रही हैं। वहीं कोरोना काल ने भी लोगों को प्रदूषण को लेकर गंभीर किया है। शायद यही वजह है कि लोग जागरूक हो रहे हैं, जिसका नतीजा दीपावली पर एक्यूआई का आंकड़ा है।
इस बार दीपावली पर एक्यूआई 270 दर्ज किया गया है। घंटाघर की तुलना में आईआईटी परिसर और आसपास अधिक प्रदूषण रहा है। ध्वनि प्रदूषण में भी बढ़ोतरी हुई है। मगर बीते वर्षों से तुलना करें तो दोनों तरह के प्रदूषण में कमी आई है। -- डॉ. डीसी पांडेय, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

- सहारनपुर में आतिशबाजी के कारण फैला धुआं- फोटो : SAHARANPUR