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मौसम में बदलाव से बढ़ रहे निमोनिया के रोगी
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जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती निमोनिया, बुखार के भर्ती बच्चे
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। स्वास्थ्य को लेकर सावधानी बरतें। मौसम बदलने के साथ ही निमोनिया ने बच्चों और बड़ों को अपनी चपेट में ले लिया है। बीते तीन दिनों में जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में निमोनिया से पीड़ित 20 बच्चों को भर्ती किया गया। वहीं, निजी चिकित्सकों के पास भी बीमार बच्चों को लेकर अभिभावक पहुंच रहे हैं।
12 नवंबर यानी आज विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाएगा। सर्दी की शुरुआत बच्चों सहित बड़ों पर भारी पड़ती है। एसबीडी जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में प्रतिदिन 150 से 180 वायरल बुखार सहित सर्दी-खांसी और जुकाम के पहुंच रहे हैं। वहीं एक दिन में चार से पांच बच्चे निमोनिया के भी पहुंच रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या में दिनोंदिन इजाफा हो रहा है। एक दिन में पांच से छह बच्चों को वार्ड में भर्ती करना पड़ रहा है। यह बदलता मौसम बच्चों के लिए खतरनाक होता है। थोड़ी सी लापरवाही में वह बीमार पड़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि निमोनिया सांस से जुड़ी बीमारी है। इसमें फेफड़े में संक्रमण और सूजन आ जाती है। कई बार पानी भी भर जाता है। दो से तीन साल के बच्चों को इससे खतरा अधिक होता है।
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जिला अस्पताल में वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. बीएस सोढ़ी ने बताया कि सर्दी में निमोनिया की शिकायत बड़ों में भी होती है। उनकी सांस में तकलीफ बढ़ जाती है। ओपीडी में प्रतिदिन निमोनिया से पीड़ित 20 से 25 मरीज आ रहे हैं।
बचाव के उपाय
-बच्चों को सुबह-शाम गर्म कपड़े पहनाएं।
-बच्चों को सुबह शाम नंगे पैर न चलने दें।
- बच्चों का नियमित टीकाकरण कराए।
-जरा भी दिक्कत होने पर चिकित्सक से उपचार लें।
- बुजुर्ग धूम्रपान से परहेज करें।
निमोनिया के लक्षण
-सांस लेने या खांसने पर सीने में दर्द
-65 वर्ष व उससे अधिक उम्र के व्यक्तियों में मानसिक भ्रम की स्थिति
-खांसी, जो कफ पैदा कर सकती है।
-थकान महसूस होना
-बुखार, पसीना और कंपकंपी ठंड लगना
-सामान्य शरीर के तापमान से कम
-सांस लेने में परेशानी
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12 नवंबर यानी आज विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाएगा। सर्दी की शुरुआत बच्चों सहित बड़ों पर भारी पड़ती है। एसबीडी जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में प्रतिदिन 150 से 180 वायरल बुखार सहित सर्दी-खांसी और जुकाम के पहुंच रहे हैं। वहीं एक दिन में चार से पांच बच्चे निमोनिया के भी पहुंच रहे हैं।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या में दिनोंदिन इजाफा हो रहा है। एक दिन में पांच से छह बच्चों को वार्ड में भर्ती करना पड़ रहा है। यह बदलता मौसम बच्चों के लिए खतरनाक होता है। थोड़ी सी लापरवाही में वह बीमार पड़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि निमोनिया सांस से जुड़ी बीमारी है। इसमें फेफड़े में संक्रमण और सूजन आ जाती है। कई बार पानी भी भर जाता है। दो से तीन साल के बच्चों को इससे खतरा अधिक होता है।
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जिला अस्पताल में वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. बीएस सोढ़ी ने बताया कि सर्दी में निमोनिया की शिकायत बड़ों में भी होती है। उनकी सांस में तकलीफ बढ़ जाती है। ओपीडी में प्रतिदिन निमोनिया से पीड़ित 20 से 25 मरीज आ रहे हैं।
बचाव के उपाय
-बच्चों को सुबह-शाम गर्म कपड़े पहनाएं।
-बच्चों को सुबह शाम नंगे पैर न चलने दें।
- बच्चों का नियमित टीकाकरण कराए।
-जरा भी दिक्कत होने पर चिकित्सक से उपचार लें।
- बुजुर्ग धूम्रपान से परहेज करें।
निमोनिया के लक्षण
-सांस लेने या खांसने पर सीने में दर्द
-65 वर्ष व उससे अधिक उम्र के व्यक्तियों में मानसिक भ्रम की स्थिति
-खांसी, जो कफ पैदा कर सकती है।
-थकान महसूस होना
-बुखार, पसीना और कंपकंपी ठंड लगना
-सामान्य शरीर के तापमान से कम
-सांस लेने में परेशानी

वार्ड में भर्ती बच्चा- फोटो : SAHARANPUR

जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की लाइन- फोटो : SAHARANPUR