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मरीज सावधान, हवा में घुलने लगा प्रदूषण का जहर
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सहारनपुर। सर्दी शुरू होने के साथ ही हवा में प्रदूषण का जहर घुलने लगा है। बीते 24 घंटे में एक्यूआई 70 से बढ़कर 110 तक पहुंच गया है। हवा में धूल और धुएं के कणों की मात्रा का बढ़ना सांस और दिल के मरीजों के लिए घातक साबित हो सकता है। हवा की यह गुणवत्ता एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी अच्छी नहीं है।
जनपद में बीते करीब दस दिन पहले ठंड ने दस्तक दी। बारिश और ओलावृष्टि के बाद से ठंड और बढ़ गई है। ठंड बढ़ने के साथ ही सांस और दिल के मरीजों की चुनौती भी बढ़ गई है। इसकी प्रमुख वजह हवा में प्रदूषण का बढ़ना है, जो एक्यूआई कई दिन से 60 और 70 तक चल रहा था बुधवार को वह बढ़कर 110 तक पहुंच गया। पड़ोसी जनपद मुजफ्फरनगर में एक्यूआई 232 और यमुनानगर में 166 रहा है। हवा में प्रदूषण के बढ़ने से खांसी और सांस के मरीज बढ़े हैं।
एसबीडी जिला अस्पताल के चेस्ट फिजीशियन की ओपीडी में बीते कई दिन से मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। ज्यादातर मरीज खांसी के हैं, जिसकी वजह मौसम परिवर्तन है। ठंड के साथ ही हवा में घुला प्रदूषण इसकी प्रमुख वजह है, क्योंकि वाहनों, उद्योगों और अन्य स्रोतों से निकलने वाला धुआं तथा धूल के कण ऊपर ना जाकर नम हवा में धरती के आसपास ही तैरते रहते हैं। जो सांस के जरिये शरीर में प्रवेश कर सांस के मरीजों की समस्या बढ़ा रहे हैं।
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धूल के गुबार भी बड़ी वजह
इन दिनों शहर में जगह-जगह सीवर लाइन बिछाने, नाला निर्माण, भवन निर्माण आदि चल रहे हैं। सड़कों को जगह-जगह खोदकर छोड़ा है। वाहनों के चलने से सड़कों पर खोदकर छोड़ी गई मिट्टी उड़कर हवा को दूषित कर रही है।
वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियां
जुकाम होना और सांस लेने में तकलीफ।
आंखों में जलन, खांसी का होना और गले में इंफेक्शन
अस्थमा, फेफड़ों से संबंधित बीमारियां।
वायु प्रदूषण से बचाव
घर से बाहर निकलते वक्त हमेशा मुंह पर मास्क का उपयोग करें। आंखों पर चश्मा लगाएं।
मास्क का बार-बार प्रयोग न करें। इससे वायरस और कई तरह के इंफेक्शन फैलाने वाले बैक्टीरिया की चपेट में आ सकते हैं।
वायु प्रदूषण वाले क्षेत्रों जैसे औद्योगिक क्षेत्र, बाजार आदि में बेवजह ना जाएं।
ठंड शुरू होने के साथ ही ओपीडी में सांस और खांसी के मरीज बढ़ गए हैं। इसकी प्रमुख वजह ठंड और हवा में प्रदूषण का बढ़ना है। ठंड के दिनों में सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। - डॉ. जी रहमान, चेस्ट फिजीशियन, एसबीडी जिला अस्पताल।
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जनपद में बीते करीब दस दिन पहले ठंड ने दस्तक दी। बारिश और ओलावृष्टि के बाद से ठंड और बढ़ गई है। ठंड बढ़ने के साथ ही सांस और दिल के मरीजों की चुनौती भी बढ़ गई है। इसकी प्रमुख वजह हवा में प्रदूषण का बढ़ना है, जो एक्यूआई कई दिन से 60 और 70 तक चल रहा था बुधवार को वह बढ़कर 110 तक पहुंच गया। पड़ोसी जनपद मुजफ्फरनगर में एक्यूआई 232 और यमुनानगर में 166 रहा है। हवा में प्रदूषण के बढ़ने से खांसी और सांस के मरीज बढ़े हैं।
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एसबीडी जिला अस्पताल के चेस्ट फिजीशियन की ओपीडी में बीते कई दिन से मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। ज्यादातर मरीज खांसी के हैं, जिसकी वजह मौसम परिवर्तन है। ठंड के साथ ही हवा में घुला प्रदूषण इसकी प्रमुख वजह है, क्योंकि वाहनों, उद्योगों और अन्य स्रोतों से निकलने वाला धुआं तथा धूल के कण ऊपर ना जाकर नम हवा में धरती के आसपास ही तैरते रहते हैं। जो सांस के जरिये शरीर में प्रवेश कर सांस के मरीजों की समस्या बढ़ा रहे हैं।
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धूल के गुबार भी बड़ी वजह
इन दिनों शहर में जगह-जगह सीवर लाइन बिछाने, नाला निर्माण, भवन निर्माण आदि चल रहे हैं। सड़कों को जगह-जगह खोदकर छोड़ा है। वाहनों के चलने से सड़कों पर खोदकर छोड़ी गई मिट्टी उड़कर हवा को दूषित कर रही है।
वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियां
जुकाम होना और सांस लेने में तकलीफ।
आंखों में जलन, खांसी का होना और गले में इंफेक्शन
अस्थमा, फेफड़ों से संबंधित बीमारियां।
वायु प्रदूषण से बचाव
घर से बाहर निकलते वक्त हमेशा मुंह पर मास्क का उपयोग करें। आंखों पर चश्मा लगाएं।
मास्क का बार-बार प्रयोग न करें। इससे वायरस और कई तरह के इंफेक्शन फैलाने वाले बैक्टीरिया की चपेट में आ सकते हैं।
वायु प्रदूषण वाले क्षेत्रों जैसे औद्योगिक क्षेत्र, बाजार आदि में बेवजह ना जाएं।
ठंड शुरू होने के साथ ही ओपीडी में सांस और खांसी के मरीज बढ़ गए हैं। इसकी प्रमुख वजह ठंड और हवा में प्रदूषण का बढ़ना है। ठंड के दिनों में सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। - डॉ. जी रहमान, चेस्ट फिजीशियन, एसबीडी जिला अस्पताल।