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देसी बासमती की जैविक खेती, सेहत और स्वाद में उत्तम
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देशी बासमती की जैविक खेती करने वाले किसान संजय चौहान
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। फसलों का अधिक उत्पादन लेने की दौड़ में शामिल किसान उर्वरकों और कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग कर रहे हैं। इसका न सिर्फ भूमि बल्कि फसल उत्पादों का उपभोग करने वाले मनुष्यों पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। इसके नुकसान को देखते हुए जनपद के जागरूक किसानों का रुझान जैविक खेती की ओर बढ़ रहा है। इनमें से कुछ देसी बासमती धान की जैविक खेती कर रहे हैं।
खेती में उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अधिक प्रयोग से खेती के लिए लाभकारी मित्र कीट मर जाते हैं। इससे न सिर्फ भूमि की उत्पादकता प्रभावित होती है, बल्कि इसका फसलों की उत्पादकता पर भी विपरीत असर पड़ता है। रासायनिक कीटनाशकों का असर फसल में रहने के चलते उसका उपभोग करने वाले व्यक्तियों पर भी पड़ता है। इसके चलते जिले के किसानों ने जैविक तरीके से खेती करना शुरू कर दिया है। इसमें खाद्यान्न फसलें, सब्जियां और फल शामिल हैं। इस बार कई किसानों ने बासमती की देशी प्रजाति की जैविक खेती की है। जिसकी मांग अधिक होने से बढ़िया भाव भी मिल रहे हैं।
जैविक कीटनाशकों का होता है प्रयोग
जैविक खेती में किसी भी प्रकार के उर्वरक या रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता है। किसानों ने देशी बासमती की जैविक खेती में पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए गोबर की खाद, हरी खाद और वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग किया गया है। बीमारियों एवं कीटों से बचाव के लिए नीमास्त्र आदि का छिड़काव किया जाता है। इसे नीम की पत्तियों को उबालकर एवं नीम ऑयल से तैयार किया जाता है, इसमें लाल मिर्च, लहसुन, सड़ी हुई खट्टी लस्सी और तंबाकू को भी मिलाया जाता है। खेत से फसल अवशेषों का अपघटित करने के लिए डी-कंपोजर का उपयोग होता है।
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जैविक बासमती का मिल रहा बढ़िया भाव
पिछले कई वर्षों से देशी बासमती की जैविक खेती कर रहे हैं। इस प्रजाति का प्रति बीघा उत्पादन एक से डेढ़ क्विंटल हो जाता है। इस बार इसका भाव सात हजार रुपये प्रति क्विंटल मिला है। जैविक खेती में लागत नाममात्र की आती है। जिससे इससे अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है। --- संजय चौहान, ग्राम कोठड़ी बहलोलपुर।
सेहत और स्वाद में उत्तम
जैविक खेती मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। जैविक तरीके से पैदा की गई देशी बासमती का स्वाद और खुशबू दोनों उत्तम हैं। डिमांड अच्छी होने से बाजार में भी भाव बेहतर रहता है। इस बार मात्र दो बीघा में जैविक बासमती की खेती की है। अगले वर्ष इसे बढ़ाया जाएगा। -- सतीश कुमार, ग्राम आलमपुर खुर्द।
जैविक खेती के प्रति बढ़ रही जागरुकता
जनपद में जैविक खेती की ओर जागरुकता बढ़ रही है। हालांकि अभी कम किसान ही इसे कर रहे हैं। इसके फायदों को देखते हुए जैविक खेती करने वाले किसानों की संख्या में बढ़ोतरी हो है। -- डॉ. राकेश कुमार, उप निदेशक कृषि।
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खेती में उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अधिक प्रयोग से खेती के लिए लाभकारी मित्र कीट मर जाते हैं। इससे न सिर्फ भूमि की उत्पादकता प्रभावित होती है, बल्कि इसका फसलों की उत्पादकता पर भी विपरीत असर पड़ता है। रासायनिक कीटनाशकों का असर फसल में रहने के चलते उसका उपभोग करने वाले व्यक्तियों पर भी पड़ता है। इसके चलते जिले के किसानों ने जैविक तरीके से खेती करना शुरू कर दिया है। इसमें खाद्यान्न फसलें, सब्जियां और फल शामिल हैं। इस बार कई किसानों ने बासमती की देशी प्रजाति की जैविक खेती की है। जिसकी मांग अधिक होने से बढ़िया भाव भी मिल रहे हैं।
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जैविक कीटनाशकों का होता है प्रयोग
जैविक खेती में किसी भी प्रकार के उर्वरक या रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता है। किसानों ने देशी बासमती की जैविक खेती में पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए गोबर की खाद, हरी खाद और वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग किया गया है। बीमारियों एवं कीटों से बचाव के लिए नीमास्त्र आदि का छिड़काव किया जाता है। इसे नीम की पत्तियों को उबालकर एवं नीम ऑयल से तैयार किया जाता है, इसमें लाल मिर्च, लहसुन, सड़ी हुई खट्टी लस्सी और तंबाकू को भी मिलाया जाता है। खेत से फसल अवशेषों का अपघटित करने के लिए डी-कंपोजर का उपयोग होता है।
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जैविक बासमती का मिल रहा बढ़िया भाव
पिछले कई वर्षों से देशी बासमती की जैविक खेती कर रहे हैं। इस प्रजाति का प्रति बीघा उत्पादन एक से डेढ़ क्विंटल हो जाता है। इस बार इसका भाव सात हजार रुपये प्रति क्विंटल मिला है। जैविक खेती में लागत नाममात्र की आती है। जिससे इससे अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है। --- संजय चौहान, ग्राम कोठड़ी बहलोलपुर।
सेहत और स्वाद में उत्तम
जैविक खेती मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। जैविक तरीके से पैदा की गई देशी बासमती का स्वाद और खुशबू दोनों उत्तम हैं। डिमांड अच्छी होने से बाजार में भी भाव बेहतर रहता है। इस बार मात्र दो बीघा में जैविक बासमती की खेती की है। अगले वर्ष इसे बढ़ाया जाएगा। -- सतीश कुमार, ग्राम आलमपुर खुर्द।
जैविक खेती के प्रति बढ़ रही जागरुकता
जनपद में जैविक खेती की ओर जागरुकता बढ़ रही है। हालांकि अभी कम किसान ही इसे कर रहे हैं। इसके फायदों को देखते हुए जैविक खेती करने वाले किसानों की संख्या में बढ़ोतरी हो है। -- डॉ. राकेश कुमार, उप निदेशक कृषि।

देशी बासमती की जैविक खेती करने वाले किसान सतीश कुमार- फोटो : SAHARANPUR