Saharanpur: दारुल उलूम पर फिर FIR दर्ज करने के आदेश, इस मामले में हुई कार्रवाई
NCPCR के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा कि आयोग को दारुल उलूम देवबंद मदरसा की वेबसाइट पर आपत्तिजनक सामग्री मिली है।
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने एक बार फिर से दारुल उलूम पर गंभीर आरोप लगाते हुए पत्र भेजकर जिलाधिकारी व एसएसपी को केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। पत्र में लिखा है कि संस्था ने अपनी वेबसाइट पर भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री डाली हुई है।
पत्र में एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा कि आयोग को दारुल उलूम देवबंद मदरसा की वेबसाइट पर आपत्तिजनक सामग्री मिली है। इसमें कहा गया कि संस्था की आधिकारिक वेबसाइट पर उन्हें फतवे की एक प्रति मिली है, जिसमें पाकिस्तान के एक व्यक्ति ने गैर-मुस्लिम ताकतों पर आत्मघाती हमले के बारे में सवाल पूछा था, जिसके जवाब में दारुल ने यह मामला अमान्य और अवैध प्रकृति बताने के बजाए अपने स्थानीय विद्वान से परामर्श लेने को कहा है।
कानूनगो ने कहा कि यह एक बार फिर उजागर हुआ है कि इस तरह के फतवे देश को आतंकित करने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़े हुए हैं। लोगों को ऐसी जानकारी मुहैया कराना उकसाने की तरह है।
सीपीसीआर अधिनियम, 2005 की धारा 13 (1) (जे) के तहत मामले का संज्ञान लेते हुए आयोग ने दारुल उलूम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत कार्रवाई करने के आदेश दिए। आयोग ने कार्रवाई की रिपोर्ट जल्द ही रिपोर्ट भेजे जाने के आदेश दिए हैं। पत्र को यूपी के मुख्य सचिव और राज्य गृह विभाग के सचिव को भी भेजा गया था।
पूर्व में भी कार्रवाई के दिए थे निर्देश
इससे पूर्व भी आयोग ने मदरसे द्वारा अपनी वेबसाइट पर पोस्ट की गई आपत्तिजनक सामग्री पर अधिकारियों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसमें गजवा-ए-हिंद को लेकर महिमामंडन करने का मुद्दा अधिक चर्चा का विषय बना, जिसमें अभी जांच जारी है।
आयोग की तरफ से पत्र मिला है, जिसको देखा जा रहा है। आयोग के आदेशानुसार जांच कर कार्रवाई की जाएगी।- डॉ. विपिन ताडा, एसएसपी
वेबसाइट पर नहीं कोई फतवा, नोटिस मिलने पर देंगे जवाब
इस संबंध में कोई नोटिस नहीं मिला है। इस तरह की जानकारी मिली थी, जिस पर हमने संस्था की वेबसाइट को चेक कराया, लेकिन ऐसा कोई फतवा नहीं है। न ही इस विषय या शीर्षक से वेबसाइट पर कोई फतवा पड़ा है। जब हमसे पूछा जाएगा तो इसका जवाब दिया जाएगा। - अशरफ उस्मानी, उप प्रभारी, तंजीम ओ तरक्की विभाग, दारुल उलूम