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एडीएम एफ कोर्ट ने शत्रु संपत्ति पर दर्ज भूमिधरी की खारिज

Sat, 25 Jul 2020 11:30 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2020 11:30 PM IST
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Order to declare enemy property as landlocked
सहारनपुर। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की कोर्ट ने करीब 171 बीघा (57 बीघा पुख्ता) जमीन को पुन: शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज करने और एसडीएम सदर को इस जमीन पर कब्जा लेने का आदेश दिया है। गांव मल्हीपुर के शहर के नजदीक होने के चलते यहां का सर्किल रेट भी काफी अधिक है। इस संपत्ति का मूल्य 12 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है।
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शिकायत मिलने पर दो वर्ष पूर्व तत्कालीन जिलाधिकारी ने इसकी चकबंदी विभाग के डीडीसी से कराई थी। जांच में पता चला कि सहायक चकबंदी अधिकारी ने 171 बीघा (57 बीघा पुख्ता) शत्रु संपत्ति की जमीन 13 मार्च 1963 के आदेश से कई लोगों को आवंटित कर भूमिधर बना दिया। शत्रु संपत्ति पर गलत तरीके से दर्ज हुए नामों को खारिज कराने और रिकार्ड दुरुस्त कराने के लिए डीडीसी ने डीएम कोर्ट में वाद दायर कराया था। डीएम ने मामले को अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) विनोद कुमार की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया था।
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जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) अजय त्यागी ने कोर्ट में विपक्षी अधिवक्ता के तथ्यों को नकारते हुए कहा कि आपत्ति करने वालों के पिता के नाम से कोई आवंटन नहीं है और शत्रु संपत्ति की कोई भी भूमि आवंटित नहीं हो सकती। सहायक चकबंदी अधिकारी ने आपत्ति करने वालों के पिता का नाम वर्ष 1963 में आसामी के रूप में दर्ज किया था जो गलत और नियम विरुद्ध है। शत्रु संपत्ति पर चकबंदी विभाग को नाम दर्ज करने का अधिकार नहीं होता है। इसलिए चकबंदी विभाग के आदेश को निरस्त करना उचित होगा।
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जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व अजय त्यागी ने बताया कि अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) विनोद कुमार ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध रिकार्ड का गंभीरता से परीक्षण करने के बाद दिए आदेश में कहा कि स्पष्ट है कि ग्राम मल्हीपुर की भूमि खतौनी में 1369 से 1373 फसली के खाता संख्या 43 महकमा असिस्टेंट कस्टोडियन सहारनपुर का नाम अंकित है। इसमें चकबंदी के दौरान 63 खेत बनाकर कई नाम दर्ज किए गए हैं, इन सभी को निरस्त करते हुए पूर्व नवैयत के अनुसार महकमा असिस्टेंट कस्टोडियन सहारनपुर का नाम बहाल रखा जाता है। एसडीएम सदर इस जमीन को अपने कब्जे में ले लें ।

इस मामले में शत्रु संपत्ति की भूमिधरी खारिज कर दी गई है। संपत्ति पर कब्जा लेने के लिए एसडीएम सदर को आदेश दे दिया है। -- विनोद कुमार, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व)
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