फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   No sense of obligations, democracy becomes meaningless

दायित्वों का नहीं बोध, बेमानी बना लोकतंत्र

Tue, 15 Sep 2020 12:30 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 15 Sep 2020 12:30 AM IST
विज्ञापन
No sense of obligations, democracy becomes meaningless
विश्व लोकतंत्र दिवस - पूर्व विधायक वीरेंद्र ठाकुर - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। आज विश्व लोकतंत्र दिवस है। लोकतंत्र का मतलब है, जनता की मर्जी से जनता के लिए चुनी गई सरकार। यानि न कोई राजा है और न ही कोई तानाशाह। सरकार का चुनाव तो जनता ही करती है। वर्तमान परिवेश में नागरिक अपने दायित्व भूल बैठे हैं। जागरूकता का अभाव तो, नैतिक मूल्यों का ह्रास हुआ है। पेश है रिपोर्ट...
विज्ञापन

विरोध करना गैरकानूनी कैसे : वीरेंद्र ठाकुर
- पूर्व विधायक वीरेंद्र ठाकुर बताते हैं कि 1989 में वह पहली बार विधायक बने। उससे कुछ वर्ष पूर्व जब सहारनपुर में अस्पताल पुल को पार करने पर टैक्स लगा दिया गया था। तब श्रीपति मिश्र मुख्यमंत्री थे और सहारनपुर में उनका कार्यक्रम होना था, हमने विरोध किया, तो पुलिस पकड़कर थाने ले गई और फिर घर भिजवा दिया था। तब मुख्यमंत्री ने उस टैक्स को खत्म कर दिया था। वहीं, 1993 में नौचंदी एक्सप्रेस ट्रेन को लेकर आंदोलन चल रहा था। तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव सहारनपुर में सभा करने वाले थे, जिसका हमने विरोध कर दिया था तो, दो मंत्रियों को बात सुनने भेजा गया और सरसावा एयरपोर्ट पर ही पीएम से मुलाकात कराई गई। आज दौर उल्टा है, यदि सरकार को विरोध करो तो मुकदमा दर्ज हो जाता है, जबकि विरोध करना गैरकानूनी कैसे हो सकता है।
विज्ञापन

अब लोकतंत्र है कहां : राम सिंह
पूर्व गृहमंत्री राम सिंह मांडेबांस कहते हैं कि अब लोकतंत्र रह कहां गया है, अब तो व्यक्ति तंत्र है। 1957 का किस्सा सुनाकर बताया कि पंडित जवाहर लाल नेहरू की इच्छा थी कि राधा कृष्णनन राष्ट्रपति बने, लेकिन कांग्रेस पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक ने राजेंद्र प्रसाद का नाम तय कर लिया था। इस पर जवाहरलाल नेहरू ने मीडिया के सवाल पूछने पर कहा था कि पार्लियामेंट्री बोर्ड ने राजेंद्र प्रसाद का नाम तय किया है, इसलिए वही दोबारा से राष्ट्रपति चुने गए। राम सिंह कहते हैं कि आज वैसा नहीं होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इमरजेंसी के समर्थकों को खराब लग रहा लोकतंत्र : पुंडीर
- लोकतंत्र सेनानी एवं पूर्व विधायक सुखबीर सिंह पुंडीर कहते हैं कि आज का लोकतंत्र उस समय के लोकतंत्र से बेहतर है, जब देश में इमरजेंसी लगा दी गई थी और लोगों को जेलों में ठूंस दिया गया था। आज लोग अपनी बात आसानी से कह सकते हैं, विरोध भी जता सकते हैं। लोकतंत्र उन्हीं को खतरे में नजर आ रहा है, जो इमरजेंसी लगाने वालों के समर्थक हैं।

अधिकारों और दायित्वों के प्रति जागरूकता जरूरी : पाण्डेय
- महाराज सिंह डिग्री कॉलेज में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर प्रमोद पांडेय का कहना है कि लोकतंत्र की जो परिभाषा है, उसके हिसाब से लोगों को शिक्षित होना और अधिकारों के प्रति जागरूक होना है। कर्तव्य को समझकर इस लोकतंत्र को और आगे ले जाया जा सकता है, अन्यथा इसे समझने में विफल रहे तो लोकतंत्र नहीं, बल्कि भीड़तंत्र बन जाएगा। बगैर सोचे एक दूसरे के मेसेज आगे भेज देना गलत है।

विश्व लोकतंत्र दिवस  - लोकतंत्र सेनानी एवं पूर्व विधायक सुखबीर सिंह पुंडीर

विश्व लोकतंत्र दिवस - लोकतंत्र सेनानी एवं पूर्व विधायक सुखबीर सिंह पुंडीर- फोटो : SAHARANPUR

विश्व लोकतंत्र दिवस  - पूर्व मंत्री राम सिंह मांडेबांस

विश्व लोकतंत्र दिवस - पूर्व मंत्री राम सिंह मांडेबांस- फोटो : SAHARANPUR

विश्व लोकतंत्र दिवस  - प्रमोद पाण्डेय, प्रोफेसर राजनीति शास्त्र, महाराज सिंह कॉलेज

विश्व लोकतंत्र दिवस - प्रमोद पाण्डेय, प्रोफेसर राजनीति शास्त्र, महाराज सिंह कॉलेज- फोटो : SAHARANPUR

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed