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Saharanpur News: फतवों की नगरी से दिल्ली तक का सफर नहीं कर पाया कोई
Mon, 08 Apr 2024 12:26 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Mon, 08 Apr 2024 12:26 AM IST
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देवबंद। देश में 18वीं लोकसभा के गठन के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है। हर तरफ सियासी सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। वर्ष 1952 से आम चुनाव की शुरुआत हुई, लेकिन फतवों की नगरी कहे जाने वाले देवबंद से आज तक लोकसभा में दिल्ली तक का सफर कोई नहीं कर सका।
देवबंद इस्लामी तालीम के एतबार से बहुत मायने रखता है। दारुल उलूम की वजह से यह देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी खासी पहचान रखता है। यहां से शिक्षा ग्रहण करके छात्र दुनिया के कोने कोने में तालीम की रोशनी फैला रहे हैं। लेकिन यहां के सियासी मिजाज की बात करें तो यह आश्चर्च में डालने वाला होगा कि यहां से पिछले 72 सालों में कोई भी लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में प्रतिनिधित्व नहीं कर सका। इसके इतर विधानसभा में देवबंद का प्रतिनिधित्व लगातार रहा है।
वरिष्ठ कांग्रेसी और पूर्व नगर अध्यक्ष अथर उस्मानी बताते हैं कि देवबंद से आज तक किसी भी शख्स ने लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ा। पहले हरिद्वार लोकसभा सीट में हरिद्वार सहित मंगलौर, भगवानपुर, देवबंद और नागल विधानसभा शामिल थे। जिसमें बाहरी व्यक्ति ही चुनाव लड़ें। उसके बाद सहारनपुर लोकसभा सीट अलग हुई तब भी देवबंद क्षेत्र से कोई भी चुनाव मैदान में किस्मत आजमाने नहीं उतरा। अथर उस्मानी बताते हैं कि हरिद्वार लोकसभा सीट पर अधिकांश कांग्रेस पार्टी की ही कब्जा रहा। पूर्व विधायक माविया अली ने बताया कि देवबंद क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ा है। हालांकि विधानसभा चुनाव में हर बार विभिन्न दलों के प्रत्याशी चुनाव लड़ते हैं। इस बार बसपा की तरफ से देवबंद से माजिद अली लोकसभा चुनाव के लिए मैदान में है।
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राज्यसभा में रह चुका है प्रतिनिधित्व
देवबंद से राज्यसभा सांसद की बात करें तो जमीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी के पिता स्वर्गीय मौलाना असद मदनी कांग्रेस पार्टी से तीन बार राज्यसभा सांसद रहे थे। मौलाना महमूद मदनी भी सपा पार्टी से 2006 से 2012 तक राज्यसभा सांसद रह चुके हैं।
चुने गए सांसद
2019- फजलुरर्हमान (बसपा)
2014-राघव लखनपाल शर्मा (भाजपा)
2009 - जगदीश राणा (बसपा)
2004 - रशीद मसूद (सपा)
1999 - मंसूर अली (बसपा)
1996 - नकली सिंह (भाजपा)
1991 - रशीद मसूद (जनता दल)
1989 - रशीद मसूद (जनता दल)
1984 - चौधरी यशपाल सिंह (कांग्रेस)
1980 - रशीद मसूद (लोकदल)
1987-राम सिंह (कांग्रेस)
1977- रशीद मसूद (जनता पार्टी)
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देवबंद इस्लामी तालीम के एतबार से बहुत मायने रखता है। दारुल उलूम की वजह से यह देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी खासी पहचान रखता है। यहां से शिक्षा ग्रहण करके छात्र दुनिया के कोने कोने में तालीम की रोशनी फैला रहे हैं। लेकिन यहां के सियासी मिजाज की बात करें तो यह आश्चर्च में डालने वाला होगा कि यहां से पिछले 72 सालों में कोई भी लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में प्रतिनिधित्व नहीं कर सका। इसके इतर विधानसभा में देवबंद का प्रतिनिधित्व लगातार रहा है।
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वरिष्ठ कांग्रेसी और पूर्व नगर अध्यक्ष अथर उस्मानी बताते हैं कि देवबंद से आज तक किसी भी शख्स ने लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ा। पहले हरिद्वार लोकसभा सीट में हरिद्वार सहित मंगलौर, भगवानपुर, देवबंद और नागल विधानसभा शामिल थे। जिसमें बाहरी व्यक्ति ही चुनाव लड़ें। उसके बाद सहारनपुर लोकसभा सीट अलग हुई तब भी देवबंद क्षेत्र से कोई भी चुनाव मैदान में किस्मत आजमाने नहीं उतरा। अथर उस्मानी बताते हैं कि हरिद्वार लोकसभा सीट पर अधिकांश कांग्रेस पार्टी की ही कब्जा रहा। पूर्व विधायक माविया अली ने बताया कि देवबंद क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ा है। हालांकि विधानसभा चुनाव में हर बार विभिन्न दलों के प्रत्याशी चुनाव लड़ते हैं। इस बार बसपा की तरफ से देवबंद से माजिद अली लोकसभा चुनाव के लिए मैदान में है।
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राज्यसभा में रह चुका है प्रतिनिधित्व
देवबंद से राज्यसभा सांसद की बात करें तो जमीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी के पिता स्वर्गीय मौलाना असद मदनी कांग्रेस पार्टी से तीन बार राज्यसभा सांसद रहे थे। मौलाना महमूद मदनी भी सपा पार्टी से 2006 से 2012 तक राज्यसभा सांसद रह चुके हैं।
चुने गए सांसद
2019- फजलुरर्हमान (बसपा)
2014-राघव लखनपाल शर्मा (भाजपा)
2009 - जगदीश राणा (बसपा)
2004 - रशीद मसूद (सपा)
1999 - मंसूर अली (बसपा)
1996 - नकली सिंह (भाजपा)
1991 - रशीद मसूद (जनता दल)
1989 - रशीद मसूद (जनता दल)
1984 - चौधरी यशपाल सिंह (कांग्रेस)
1980 - रशीद मसूद (लोकदल)
1987-राम सिंह (कांग्रेस)
1977- रशीद मसूद (जनता पार्टी)