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बुखार में लापरवाही आठ दिन में ले सकती है गंभीर रूप

Thu, 02 Sep 2021 11:53 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 02 Sep 2021 11:53 PM IST
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Negligence in fever can take serious form in eight days
डा अनिल वोहरा - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। मौसम बदलने के साथ ही वायरल बुखार और टायफाइड के मामले बढ़ गए हैं। डेंगू का भी मामला सामने आ चुका है, जबकि मलेरिया का खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि बुखार में लापरवाही बरतने पर बुखार होने के आठ दिन के भीतर गंभीर लक्षण सामने आ सकते हैं। इतना ही नहीं, मरीज को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि लापरवाही न बरतें।
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वायरल बुखार तेजी से पैर पसार रहा है। एसबीडी जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 30 से 40 लोग वायरल बुखार के आ रहे हैं। निजी चिकित्सकों के यहां भी भीड़ है। लोग बुखार के साथ हल्का जुकाम और शरीर में दर्द की शिकायत कर रहे हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. अनिल वोहरा की सलाह है कि बुखार के लक्षण आने पर झोलाछाप डॉक्टर के चक्कर में न पड़ें, तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में इलाज कराएं। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी ने बताया कि बुखार होने के बाद पहले आठ दिन बेहद खतरनाक होते हैं। यदि अच्छे चिकित्सक से इलाज लिया जाए तो मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाता है, लेकिन लापरवाही बरतने पर तीन से सात दिन के भीतर मरीज में जटिल लक्षण सामने आ सकते हैं, जो मरीज को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि मरीज लापरवाही ना बरतें।
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बुखार के गंभीर लक्षण
-ब्लड प्रेशर का 90 एमएम से नीचे जाना और पल्स रेट का 110 से ऊपर होना।
-हाथों और पैरों का ठंडा पड़ना तथा बुखार के साथ पेशाब का पीला आना।
-बुखार उतरने के बाद पेट में दर्द और उल्टी का बने रहना।
-लीवर का साइज बढ़ जाना और सांस लेने में तकलीफ होना।
-बुखार के साथ दौरे पड़ना और कभी कभी बेहोश तक हो जाना।
-बुखार के साथ नाक, आंख, मुंह, पेशाब या लेट्रिन के रास्ते खून आना।
-हाथ और पैरों में सूजन और शरीर पर लाल दाने होना।
-पेट का फूल जाना और शरीर में अधिक बेचैनी होना।
इनको अधिक खतरा
-एक से 12 साल की उम्र के बच्चे।
-गर्भवती महिलाएं और 65 वर्ष से अधिक आयु के लोग।
-डायबिटीज यानी शुगर, किडनी और दिल के मरीज।
बचाव के लिए यह करें
-घर के आसपास गंदा पानी जमा न होने दें।
-नालियों में मिट्टी के तेल का छिड़काव कर दें।
-कूलर और बर्तन में रखे पानी को 24 घंटे में बदलते रहें।
-पूरी बाजे के कपड़े और पैंट या पायजामा पहनें।
-मच्छरों के खात्मे के लिए क्वायल या अन्य उपकरणों का इस्तेमाल करें।
-दूध या दूध से बनी चीजों जैसे मावा आदि का सेवन न करें।
-आइसक्रीम, पेस्ट्री, बाहर की चाट और चाऊमीन, बाहर का ठंडा पेय पदार्थ न लें।
-अधपका मीट न खाएं तथा साफ व शुद्ध पानी ही पीएं।
-बासी भोजन करने से बचें

डा संजीव मिगलानी

डा संजीव मिगलानी- फोटो : SAHARANPUR

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