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पूरी तरह सफल नहीं हुआ राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान
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सहारनपुर। 14 से 18 वर्ष की आयु के विद्यार्थियों को अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा मुहैया कराने के उद्देश्य से वर्ष 2009 में शुरू किया गया राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान पूरी तरह सफल नहीं हो सका है। बीते 12 साल में जनपद में मात्र 33 विद्यालयों को ही उच्चीकृत कर हाई स्कूल बनाया गया है। इसके अलावा चार कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्रावास बनाते हुए आवासीय रूप में लाया गया है।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में खासे सुधार की उम्मीद के साथ शुरू किया गया था। अभियान के तहत प्रत्येक पांच किलोमीटर पर कम से कम एक हाई स्कूल बनाने तथा दस किलोमीटर पर इंटर कॉलेज तैयार किए जाने थे। जिससे माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़े। अभियान जनपद में भी वर्ष 2009 से संचालित है। शुरू में अभियान ने रफ्तार पकड़ी थी। कुल 63 उच्च प्राथमिक विद्यालयों को हाईस्कूल के रूप में विकसित करने के लिए चिह्नित किया गया था, जिनका प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। मगर बीते 12 साल में मात्र 33 ही विद्यालय उच्चीकृत किए गए हैं। यह सभी विद्यालय ऐसी जगहों पर चिह्नित किए गए थे, जहां पांच किलोमीटर के दायरे में हाईस्कूल नहीं था। इनके अलावा गंगोह, मुजफ्फराबाद, पुवांरका और साढौली कदीम के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्रावास बनाकर दिए गए थे। मगर बीते कई वर्ष से योजना धीमी गति से चल रही है।
यूपी में नहीं हुआ विलय
प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने माध्यमिक में संचालित राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और बेसिक में संचालित सर्व शिक्षा अभियान का विलय कर समग्र शिक्षा अभियान का नाम दिया है। मगर उत्तर प्रदेश में अभी तक विलय नहीं हो सका है, जबकि उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में विलय हो गया है।
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राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान को लेकर शासन के जो भी दिशा निर्देश रहे हैं उनका पालन करते हुए काम हुए हैं। 33 विद्यालय उच्चीकृत हुए हैं, जबकि चार छात्रावास भी बने हैं। योजना को आगे जारी रखने के लिए शासन के जो भी आदेश होंगे उनका अनुपालन किया जाएगा।- रविदत्त, जिला विद्यालय निरीक्षक।
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राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में खासे सुधार की उम्मीद के साथ शुरू किया गया था। अभियान के तहत प्रत्येक पांच किलोमीटर पर कम से कम एक हाई स्कूल बनाने तथा दस किलोमीटर पर इंटर कॉलेज तैयार किए जाने थे। जिससे माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़े। अभियान जनपद में भी वर्ष 2009 से संचालित है। शुरू में अभियान ने रफ्तार पकड़ी थी। कुल 63 उच्च प्राथमिक विद्यालयों को हाईस्कूल के रूप में विकसित करने के लिए चिह्नित किया गया था, जिनका प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। मगर बीते 12 साल में मात्र 33 ही विद्यालय उच्चीकृत किए गए हैं। यह सभी विद्यालय ऐसी जगहों पर चिह्नित किए गए थे, जहां पांच किलोमीटर के दायरे में हाईस्कूल नहीं था। इनके अलावा गंगोह, मुजफ्फराबाद, पुवांरका और साढौली कदीम के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्रावास बनाकर दिए गए थे। मगर बीते कई वर्ष से योजना धीमी गति से चल रही है।
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यूपी में नहीं हुआ विलय
प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने माध्यमिक में संचालित राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और बेसिक में संचालित सर्व शिक्षा अभियान का विलय कर समग्र शिक्षा अभियान का नाम दिया है। मगर उत्तर प्रदेश में अभी तक विलय नहीं हो सका है, जबकि उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में विलय हो गया है।
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राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान को लेकर शासन के जो भी दिशा निर्देश रहे हैं उनका पालन करते हुए काम हुए हैं। 33 विद्यालय उच्चीकृत हुए हैं, जबकि चार छात्रावास भी बने हैं। योजना को आगे जारी रखने के लिए शासन के जो भी आदेश होंगे उनका अनुपालन किया जाएगा।- रविदत्त, जिला विद्यालय निरीक्षक।