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नगर निगम में 42.50 लाख का गबन
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 23 Dec 2016 12:26 AM IST
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सहारनपुर नगर निगम में बड़ा गोलमाल सामने आया है। नवंबर 2015 में जिस हाईड्रोट्रैक इंटरनेशनल कंपनी से दो ट्रिपर ट्रक की खरीद की गई थी। ट्रक तो आज तक नगर निगम को पहुंचे ही नहीं, जबकि मार्च में उनका भुगतान भी जारी कर दिया गया।
लेखाधिकारी ने मामले की जांच की तो गोलमाल का खुलासा हुआ। नगर निगम के स्वास्थ्य गैराज अनुभाग में आयशर कंपनी के 2 ट्रिपर ट्रक के लिए 3 अक्तूबर 2015 को टेंडर किए गए।
टेंडर के बाद कंपनी को 30 अक्तूबर 2015 को ही आपूर्ति के आदेश निर्गत कर दिए गए। 18 नवंबर को अनुबंध हुआ और एक माह में आपूर्ति का समय दिया गया। 18 दिसंबर को ट्रकों की आपूर्ति की जानी थी। शर्त यह भी लगाई गई थी कि 18 दिसंबर के बाद देरी हुई तो 500 रुपये रोजाना का अर्थदंड लगेगा।
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अनुबंध करने के बाद नगर निगम और गैराज के अधिकारी ट्रकों को भूल गए। जब 31 मार्च आया और बजट को ठिकाने लगाने की बारी आई तो दोनों ट्रकों का 42.50 लाख रुपये स्टोर कीपर फैसल अहमद रजा के नाम में अग्रिम भुगतान कर दिए गए।
उसके बाद आज तक न तो ट्रक ही नगर निगम में आए और न ही फैसल अहमद रजा को दिए गए 42.50 लाख का ही कोई पता है। किसी ने भी न तो पैसे ही वापस मांगे और न ही ट्रक मंगाए।
लेखाधिकारी एके मिश्रा द्वारा जब गैराज अनुभाग की जांच की गई तो इस बड़े गबन का खुलासा हुआ। लेखाधिकारी एके मिश्रा ने स्टोर कीपर फैसल रजा के नाम जारी 42.50 लाख रुपये एवं उसका 1 प्रतिशत प्रतिमाह की न्यूनतम दर से अब तक के 9 माह का ब्याज 382500 रुपये वसूल करने की संस्तुति की है।
जिससे निगम को हुई वित्तीय क्षति की भरपाई हो सके। मूलधन से ही संबंधित वाहनों की तत्काल आपूर्ति किए जाने और आपूर्ति की तिथि से ही गारंटी लिए जाने की संस्तुति की है। साथ ही कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने के लिए भी कहा है।
इसके अलावा संबंधित गैराज इंचार्ज एवं लिपिक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की भी संस्तुति की है। 9 माह तक उन्होंने इस प्रकरण को छिपाए रखा।
ट्रकों की धनराशि में गबन के मामले में नगरायुक्त ओपी वर्मा का कहना है कि उन्हें हाल में ही इस प्रकरण की जानकारी हुई है। इस मामले की जांच कराएंगे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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लेखाधिकारी ने मामले की जांच की तो गोलमाल का खुलासा हुआ। नगर निगम के स्वास्थ्य गैराज अनुभाग में आयशर कंपनी के 2 ट्रिपर ट्रक के लिए 3 अक्तूबर 2015 को टेंडर किए गए।
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टेंडर के बाद कंपनी को 30 अक्तूबर 2015 को ही आपूर्ति के आदेश निर्गत कर दिए गए। 18 नवंबर को अनुबंध हुआ और एक माह में आपूर्ति का समय दिया गया। 18 दिसंबर को ट्रकों की आपूर्ति की जानी थी। शर्त यह भी लगाई गई थी कि 18 दिसंबर के बाद देरी हुई तो 500 रुपये रोजाना का अर्थदंड लगेगा।
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अनुबंध करने के बाद नगर निगम और गैराज के अधिकारी ट्रकों को भूल गए। जब 31 मार्च आया और बजट को ठिकाने लगाने की बारी आई तो दोनों ट्रकों का 42.50 लाख रुपये स्टोर कीपर फैसल अहमद रजा के नाम में अग्रिम भुगतान कर दिए गए।
उसके बाद आज तक न तो ट्रक ही नगर निगम में आए और न ही फैसल अहमद रजा को दिए गए 42.50 लाख का ही कोई पता है। किसी ने भी न तो पैसे ही वापस मांगे और न ही ट्रक मंगाए।
लेखाधिकारी एके मिश्रा द्वारा जब गैराज अनुभाग की जांच की गई तो इस बड़े गबन का खुलासा हुआ। लेखाधिकारी एके मिश्रा ने स्टोर कीपर फैसल रजा के नाम जारी 42.50 लाख रुपये एवं उसका 1 प्रतिशत प्रतिमाह की न्यूनतम दर से अब तक के 9 माह का ब्याज 382500 रुपये वसूल करने की संस्तुति की है।
जिससे निगम को हुई वित्तीय क्षति की भरपाई हो सके। मूलधन से ही संबंधित वाहनों की तत्काल आपूर्ति किए जाने और आपूर्ति की तिथि से ही गारंटी लिए जाने की संस्तुति की है। साथ ही कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने के लिए भी कहा है।
इसके अलावा संबंधित गैराज इंचार्ज एवं लिपिक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की भी संस्तुति की है। 9 माह तक उन्होंने इस प्रकरण को छिपाए रखा।
ट्रकों की धनराशि में गबन के मामले में नगरायुक्त ओपी वर्मा का कहना है कि उन्हें हाल में ही इस प्रकरण की जानकारी हुई है। इस मामले की जांच कराएंगे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।