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Saharanpur News: शादी से पहले मिलाएं स्वास्थ्य कुंडली, रोक सकते हैं थैलेसीमिया

Sun, 07 May 2023 11:55 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 07 May 2023 11:55 PM IST
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Mix health horoscope before marriage, can prevent thalassemia
विश्व थैलेसीमिया दिवस:
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-थैलेसीमिया अनुवांशिक बीमारी, इसमें नहीं बनता हीमोग्लोबिन
-ब्लड की कमी के चलते मरीजों को बार-बार चढ़ाना पड़ता है खून
फोटो समाचार

संवाद न्यूज एजेंसी

सहारनपुर। विश्व थैलेसीमिया दिवस आज है। थैलेसीमिया अनुवांशिक बीमारी है। इसमें हीमोग्लोबिन नहीं बनता है। शरीर में खून की कमी होने लगती है। खून की कमी दूर करने के लिए बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है। ऐसे में चिकित्सकों का कहना है कि शादी से पहले युवक-युवती की स्वास्थ्य कुंडली जरूर मिलाएं, तभी इस बीमारी से दूर रह सकते हैं।
एसबीडी जिला अस्पताल में थैलेसीमिया के अभी 104 मरीज पंजीकृत हैं। अस्पताल के ब्लड बैंक से एक महीने में 130 से 140 यूनिट थैलेसीमिया मरीजों के लिए जाता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एके चौधरी ने बताया कि थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की पहचान छह माह की आयु के बाद ही होती है। अस्पताल में पंजीकृत थैलेसीमिया पीड़ितों को खून लियूकोसाइट फिल्टर लगाकर चढ़ाया जाता है। इसमें बार-बार ब्लड चढ़ाने से रिएक्शन की संभावना कम हो जाती है। सीरम फेरीटीन जांच प्रति तीन माह पर कराई जाती है। जिसकी रिपोर्ट के आधार पर डिफेरासिरोक्स नामक दवाई चलाई जाती है। हर महीने पांच से छह मरीज थैलेसीमिया के बढ़ते हैं।
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आनुवांशिक रोग होने के कारण माता एवं पिता से बच्चे में यह बीमारी आती है। हीमोग्लोबिन आयरन और ग्लोबिन प्रोटीन से मिलकर बनता है। थैलेसीमिया के मरीजों में हीमोग्लोबिन नहीं बनने से लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट हो जाती है। हीमोग्लोबिन की काफी कमी हो जाने पर मरीज को बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि शादी से पहले युवक-युवती की स्वास्थ्य कुंडली को अवश्य मिलाएं, तभी इस रोग को रोका जा सकता है।
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ये हैं लक्षण-

-बच्चे के जन्म से छह माह में बीमारी का पता चल जाता है।

-त्वचा, आंखें, जीभ और नाखून पीले होने लगते हैं।

-दांत निकलने में कठिनाई आती है।

-बच्चे का विकास बाधित होने लगता है।

-माथा उभर आता है। सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।
बचाव के उपाय-
-विवाह से पहले युवक-युवती खून की जांच कराएं।

-मरीज का हीमोग्लोबिन 10 ग्राम प्रतिशत से ज्यादा रखें।

-गर्भावस्था के दौरान थैलेसीमिया की जांच कराएं।

-मरीज समय पर दवाएं लें और पूरा इलाज कराएं।
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