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सुविधा के नाम पर यात्रियों को छल कर रहे हैं सहारनपुर डिपो के अधिकारी
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 19 Oct 2016 04:03 PM IST
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सहारनपुर में सड़क पर रोडवेज।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में परिवहन निगम यात्री सुविधा के नाम पर यात्रियों से छल कर रहा है। निगम यात्री सुविधा के नाम पर प्रत्येक यात्री से एक रुपया वसूलता है। रीजन की सभी 543 बसों में प्रतिदिन दो लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं।
यानी प्रतिदिन कम से कम दो लाख रुपये और प्रत्येक महीने 60 लाख से रुपये अधिक यात्री सुविधा शुल्क के नाम पर वसूला जाता है, जिसके बदले में परिवहन निगम की ओर से यात्रियों को सुविधा देने की बजाय ठेंगा दिखाया जा रहा है।
शहर में परिवहन निगम के दो बस स्टैंड हैं। इनमें पहला स्टैंड रेलवे रोड पर है, जिसके पास बस स्टैंड के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। ऐसे में ज्यादातर बसें स्टैंड की जगह की बजाय सड़क पर रहती हैं।
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जगह कम होने की वजह से ही स्टैंड पर यात्रियों के लिए शुद्ध पेयजल और शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। यहां केवल एक हैंडपंप लगा है, जो नाकाफी है। यहां यात्रियों के विश्राम या बसों का इंतजार करने के लिए बैठने तक की व्यवस्था नहीं है।
इसके अलावा दूसरा बस स्टैंड अंबाला रोड पर है। यहां एक शौचालय है, जो पेड़ है। यानी यात्रियों से लघुशंका और शौच के लिए पैसा लिया जाता है। ऐसे में ज्यादातर यात्री खुले में गंदगी करते हैं।
यहां भी यात्रियों के विश्राम या बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में ज्यादातर यात्री सड़क पर खड़े होकर या नीचे ही बैठकर बसों का इंतजार करते हैं। इसके अलावा कैंटीन या पेयजल की व्यवस्था भी ठीक नहीं है।
ऐसे में सवाल यह है कि परिवहन निगम सुविधा शुल्क के रूप में जो रुपये वसूल रहा है वह कहां जा रहा है? उधर, परिवहन निगम के अधिकारी बस स्टैंड पर शौचालयों, कैंटीन और पेयजल के लिए पर्याप्त जगह न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ते आ रहे हैं। यही वजह है कि जनता बस स्टैंड को कहीं अन्य जगह शिफ्ट करने की मांग करने लगी है।
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यानी प्रतिदिन कम से कम दो लाख रुपये और प्रत्येक महीने 60 लाख से रुपये अधिक यात्री सुविधा शुल्क के नाम पर वसूला जाता है, जिसके बदले में परिवहन निगम की ओर से यात्रियों को सुविधा देने की बजाय ठेंगा दिखाया जा रहा है।
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शहर में परिवहन निगम के दो बस स्टैंड हैं। इनमें पहला स्टैंड रेलवे रोड पर है, जिसके पास बस स्टैंड के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। ऐसे में ज्यादातर बसें स्टैंड की जगह की बजाय सड़क पर रहती हैं।
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जगह कम होने की वजह से ही स्टैंड पर यात्रियों के लिए शुद्ध पेयजल और शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। यहां केवल एक हैंडपंप लगा है, जो नाकाफी है। यहां यात्रियों के विश्राम या बसों का इंतजार करने के लिए बैठने तक की व्यवस्था नहीं है।
इसके अलावा दूसरा बस स्टैंड अंबाला रोड पर है। यहां एक शौचालय है, जो पेड़ है। यानी यात्रियों से लघुशंका और शौच के लिए पैसा लिया जाता है। ऐसे में ज्यादातर यात्री खुले में गंदगी करते हैं।
यहां भी यात्रियों के विश्राम या बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में ज्यादातर यात्री सड़क पर खड़े होकर या नीचे ही बैठकर बसों का इंतजार करते हैं। इसके अलावा कैंटीन या पेयजल की व्यवस्था भी ठीक नहीं है।
ऐसे में सवाल यह है कि परिवहन निगम सुविधा शुल्क के रूप में जो रुपये वसूल रहा है वह कहां जा रहा है? उधर, परिवहन निगम के अधिकारी बस स्टैंड पर शौचालयों, कैंटीन और पेयजल के लिए पर्याप्त जगह न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ते आ रहे हैं। यही वजह है कि जनता बस स्टैंड को कहीं अन्य जगह शिफ्ट करने की मांग करने लगी है।