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सहारनपुर में भी मानकों की खूब अनदेखी कर रहीं मिलें
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 12 Oct 2017 12:24 AM IST
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सहारनपुर में पेपर मिल से सटी बस्ती।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में शामली में डिस्टलरी यूनिट से हुए गैस रिसाव की घटना ने सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सहारनपुर प्रशासन को इससे सबक लेने की जरूरत है।
यहां भी आबादी के बीच चल रही पेपर मिल, आईटीसी और अनेक डिस्टलरी व शुगर मिल मानकों की अनदेखी कर चलाए जा रहे हैं। प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने कभी भी इनके प्रति सख्ती नहीं दिखाई है। मगर समय रहते अधिकारियों ने अपनी नीति न बदली तो यहां भी शामली जैसी घटना या उससे भी भयावह स्थिति पैदा हो सकती है।
जनपद में कुल आठ शुगर मिल, पांच डिस्टलरी और एक पेपर मिल है। पेपर मिल शहर से एकदम सटा है। पेपर मिल से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी नालों के जरिए बहकर हिंडन नदी में जाता है।
हालांकि पेपर मिल प्रबंधन अपने यहां वाटर ट्रीटमेंट प्लांट होने के दावे करता रहा है, मगर मिल से निकलने वाला पानी कतई साफ नहीं होता। समय-समय पर पेपर मिल से निकलने वाली गैस की दुर्गंध शहर भर में यानी पांच किलोमीटर तक के दायरे में फैलती है, जिसके बाद लोगों का सांस तक लेना दुर्भर रहता है।
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इसके अलावा पेपर मिल पास में ही वेस्ट चूना डालता आ रहा है, जिसका करीब 60 फुट ऊंचा पहाड़नुमा चट्टान बन चुकी है। यह भी खतरे की वजह बन सकता है।
बरसात में इस चट्टान से ढलने वाला चूना युक्त पानी पास के खेतों में जाकर वहां की मिट्टी को नुकसान पहुंचा रहा है। शुगर मिल की बात करें तो आठ में से पांच शुगर मिल इस समय चालू अवस्था में हैं, जबकि तीन बंद पड़ी हैं।
हालांकि इनमें से दया शुगर मिल के जल्द चालू होने की संभावना बनी हुई है। यहां पांच डिस्टलरी हैं, डिस्टलरी से सटे गांवों के लोगों की मानें तो डिस्टलरी में लगे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट केवल कार्रवाई से बचने के लिए हैं।
जब भी जांच होती है तो ट्रीटमेंट किया जाता है, अन्यथा ऐसे ही केमिकल युक्त पानी को नदियों में छोड़ दिया जाता है। पिलखनी डिस्टलरी से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी से नदी का पानी जहर बन चुका है। ऐसी ही स्थिति अन्य डिस्टलरी की भी है।
उधर, हिंडन नदी सहारनपुर से निकलकर दिल्ली तक जाती है। कभी यह नदी जीवनदायिनी रही है, मगर पिछले करीब तीन दशक से यह लगातार दूषित होती चली गई। वर्तमान में आलम यह है कि इसका पानी पूरी तरह जहर बन चुका है।
जिसकी वजह मिल और फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी का इसमें सीधे डाला जाना है। इतना ही नहीं, नदी से सटे करीब एक दर्जन गांवों का भूजल भी दूषित हो चुका है।
हैंडपंप पेयजल की बजाय जहर उगल रहे हैं, जिसे पीकर लोग लगातार मौत का शिकार बन रहे हैं। अभी तक 200 से अधिक लोग सहारनपुर में जान गवा चुके हैं, जबकि इतने ही लोग गंभीर बीमारियों की जकड़ में हैं।
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यहां भी आबादी के बीच चल रही पेपर मिल, आईटीसी और अनेक डिस्टलरी व शुगर मिल मानकों की अनदेखी कर चलाए जा रहे हैं। प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने कभी भी इनके प्रति सख्ती नहीं दिखाई है। मगर समय रहते अधिकारियों ने अपनी नीति न बदली तो यहां भी शामली जैसी घटना या उससे भी भयावह स्थिति पैदा हो सकती है।
जनपद में कुल आठ शुगर मिल, पांच डिस्टलरी और एक पेपर मिल है। पेपर मिल शहर से एकदम सटा है। पेपर मिल से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी नालों के जरिए बहकर हिंडन नदी में जाता है।
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हालांकि पेपर मिल प्रबंधन अपने यहां वाटर ट्रीटमेंट प्लांट होने के दावे करता रहा है, मगर मिल से निकलने वाला पानी कतई साफ नहीं होता। समय-समय पर पेपर मिल से निकलने वाली गैस की दुर्गंध शहर भर में यानी पांच किलोमीटर तक के दायरे में फैलती है, जिसके बाद लोगों का सांस तक लेना दुर्भर रहता है।
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इसके अलावा पेपर मिल पास में ही वेस्ट चूना डालता आ रहा है, जिसका करीब 60 फुट ऊंचा पहाड़नुमा चट्टान बन चुकी है। यह भी खतरे की वजह बन सकता है।
बरसात में इस चट्टान से ढलने वाला चूना युक्त पानी पास के खेतों में जाकर वहां की मिट्टी को नुकसान पहुंचा रहा है। शुगर मिल की बात करें तो आठ में से पांच शुगर मिल इस समय चालू अवस्था में हैं, जबकि तीन बंद पड़ी हैं।
हालांकि इनमें से दया शुगर मिल के जल्द चालू होने की संभावना बनी हुई है। यहां पांच डिस्टलरी हैं, डिस्टलरी से सटे गांवों के लोगों की मानें तो डिस्टलरी में लगे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट केवल कार्रवाई से बचने के लिए हैं।
जब भी जांच होती है तो ट्रीटमेंट किया जाता है, अन्यथा ऐसे ही केमिकल युक्त पानी को नदियों में छोड़ दिया जाता है। पिलखनी डिस्टलरी से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी से नदी का पानी जहर बन चुका है। ऐसी ही स्थिति अन्य डिस्टलरी की भी है।
उधर, हिंडन नदी सहारनपुर से निकलकर दिल्ली तक जाती है। कभी यह नदी जीवनदायिनी रही है, मगर पिछले करीब तीन दशक से यह लगातार दूषित होती चली गई। वर्तमान में आलम यह है कि इसका पानी पूरी तरह जहर बन चुका है।
जिसकी वजह मिल और फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी का इसमें सीधे डाला जाना है। इतना ही नहीं, नदी से सटे करीब एक दर्जन गांवों का भूजल भी दूषित हो चुका है।
हैंडपंप पेयजल की बजाय जहर उगल रहे हैं, जिसे पीकर लोग लगातार मौत का शिकार बन रहे हैं। अभी तक 200 से अधिक लोग सहारनपुर में जान गवा चुके हैं, जबकि इतने ही लोग गंभीर बीमारियों की जकड़ में हैं।