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महाशिवरात्रि आज, शुभ मुहूर्त में करे बाबा भोलेनाथ का अभिषेक
Sun, 03 Mar 2019 11:46 PM IST
Prag Gupta
ब्यूरो, सहारनपुर
ब्यूरो, सहारनपुर
Published by: Prag Gupta
Updated Sun, 03 Mar 2019 11:46 PM IST
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सहारनपुर में सजा श्री बागेश्वर महोदव मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर में महाशिवरात्रि पर्व को लेकर मंदिर सज गए। मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजाया गया है। सोमवार को भगवान शंकर का अभिषेक करने को सुबह से ही शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ेगी। इसको लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
सोमवार को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। महानगर में सिद्धपीठ श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर, श्री बागेश्वर महादेव मंदिर, श्री पातालेश्वर, श्री पीपलेश्वर, श्री पाठेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा भीड़ रहेगी। इसके अलावा तहसील शिव मंदिर, श्री नारायणपुरी मंदिर, श्री हरि मंदिर, श्री विश्रामपुरी काल भैरव मंदिर, श्री हनुमान मंदिर, मां काली मंदिर, श्री साईंधाम, श्री बालाजी धाम मंदिरों में भी श्रद्धालु जलाभिषेक करने के लिए पहुंचेंगे। मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलमालाओं से सजाया गया। नगर निगम की ओर से सफाई व्यवस्था कराई गई है। इसके साथ ही मंदिरों में भंडारे का आयोजन किया जाएगा। रविवार को आयोजकों ने सभी तैयारियां पूरी कर ली।
व्रत करने से मिलता है मनवांछित फल: वशिष्ठ
सहारनपुर। ब्रह्मपुरी कॉलोनी स्थित श्री बगलामुखी मंदिर के अधिष्ठाता पंडित रोहित वशिष्ठ ने बताया कि भगवान शिव को महाशिवरात्रि अत्यंत प्रिय है। महाशिवरात्रि को भगवान शिव इस भूमंडल पर निराकार से साकार रूप में ब्रह्मा और विष्णु जी के सम्मुख करोड़ों सूर्य प्रकाश के समान शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। सनातन शिव भक्तों में यह व्रत व्रतराज के नाम से विख्यात है। भगवान शिव भोग और मोक्ष दोनों को देने वाले हैं, जिन्हें सांसारिक विषय वासनाओं से मुक्ति चाहिए, उन्हे यह व्रत करना ही चाहिए। व्रत करने से मनवांछित फल मिलता है।
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विशेष योग दिलाएगा सुख-स्मृद्धि
सहारनपुर। पंडित रोहित वशिष्ठ ने बताया कि सोमवार धनिष्ठा नक्षत्र और शिवयोग इस वर्ष की महाशिवरात्रि को विशेष बना रहे हैं, जो व्यक्ति पूरे वर्ष भगवान शिव की पूजा नहीं कर सकता। वह वर्ष में केवल एक दिन महाशिवरात्रि पर व्रत एवं पूजन करेगा तो उसे शिवपूजन का फल प्राप्त होगा।
ऐसे करें पूजा-अर्चना
सहारनपुर। महाशिवरात्रि के व्रत में शिव पूजन, शिव मंत्र का जाप, रात्रि के चार पहर की पूजा एवं जागरण को विशेष माना गया है। शिवरात्रि पर प्रात: काल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। पूजा करते समय गले में रुद्राक्ष की माला, माथे पर भस्म या चंदन का तिलक लगाएं। हाथ में जल लेकर सर्वप्रथम महाशिवरात्रि व्रत रखने का संकल्प करें ।भगवान से प्रार्थना करें कि हे शिव आपकी प्रसन्नता के लिए मैं महाशिवरात्रि का व्रत कर रहा हूं। मेरे इस व्रत को आप पूर्ण करने की कृपा करें । इस प्रकार मानसिक संकल्प कर शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।
यदि संभव हो तो किसी ब्राह्मण के माध्यम से भगवान शंकर की पूजा कराएं। यदि ऐसा न हो सके तो स्वयं ही पूजा करनी चाहिए । भगवान शिव की पूजा भगवान शिव के नाम अथवा मंत्र से करनी चाहिए। भोलेनाथ का सबसे प्रिय और सरल मंत्र ऊं नम: शिवाय है, जो व्यक्ति यज्ञोपवीत धारण करता है उसे ऊं नम: शिवाय बोलना चाहिए। सनातन नियमों का पालन करते हुए ही भगवान शिव की आराधना एवं पूजन करें। शिवपूजन से पूर्व श्री गणेश, मां पार्वती, श्री नंदी, कार्तिक, कुबेर, कार्तिकेय, गंगा,यमुना, सरस्वती और नाग देेवता की अराधना करनी चाहिए।
शिवगणों की पूजा करने के पश्चात ही भगवान शिव की पूजा करें। प्रत्येक वस्तु को अर्पण करते समय ऊं नम: शिवाय अवश्य बोले। भगवान शिव का जल से अभिषेक करना चाहिए, उसके पश्चात भगवान शिव को दूध ,दही गाय का घी, शहद ,शक्कर इनसे अलग-अलग या इन पांचों को एक साथ मिलाकर शिवलिंग पर अर्पण करें। उसके पश्चात भगवान शिव को गंगाजल से स्नान कराएं । भगवान को वस्त्र अर्पण कर एक जनेऊ भी धारण कराएं। शिव को चंदन का तिलक करें और बिना टूटे साबुत चावल शिवलिंग पर चढ़ाएं।
इसके पश्चात पुष्पमाला चढ़ाएं और बेलपत्र अर्पण करें। भांग और धतूरा चढ़ाएं और धूप दीप दिखाएं। भगवान को भोग लगाएं, फल, पान और दक्षिणा अर्पण करें। इस इस प्रकार भगवान शिव की यह पूजा पूर्ण होती हैं। प्रदोष काल में शिव मंदिर में जाकर पहले पहर की पूजा करनी चाहिए। रात्रि में चार पहर की पूजा करने के पश्चात अगले दिन प्रात: काल स्नान करके पुन: भगवान शिव की अराधना करें। इस प्रकार अलग अलग समय में पूजन करके रात्रि में जागरण करें।
शिव पूजन का शुभ मुहूर्त
- प्रात: 6:46 से 8:15 तक, उसके पश्चात प्रात: 9:45 से 11:11 तक, सांय काल 4:50 से 6:00 बजे तक है।
चार प्रहर की पूजा का समय
- पहले पहर की पूजा सायं 6:30 से 9:30 तक
- दूसरे पहर की पूजा रात्रि 9:30 से 12:30 तक
- तीसरे पहर की पूजा रात्रि 12:30 से 3:30 तक
- चौथे पहर की पूजा प्रात: 3:30 से 5:30 तक
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सोमवार को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। महानगर में सिद्धपीठ श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर, श्री बागेश्वर महादेव मंदिर, श्री पातालेश्वर, श्री पीपलेश्वर, श्री पाठेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा भीड़ रहेगी। इसके अलावा तहसील शिव मंदिर, श्री नारायणपुरी मंदिर, श्री हरि मंदिर, श्री विश्रामपुरी काल भैरव मंदिर, श्री हनुमान मंदिर, मां काली मंदिर, श्री साईंधाम, श्री बालाजी धाम मंदिरों में भी श्रद्धालु जलाभिषेक करने के लिए पहुंचेंगे। मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलमालाओं से सजाया गया। नगर निगम की ओर से सफाई व्यवस्था कराई गई है। इसके साथ ही मंदिरों में भंडारे का आयोजन किया जाएगा। रविवार को आयोजकों ने सभी तैयारियां पूरी कर ली।
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व्रत करने से मिलता है मनवांछित फल: वशिष्ठ
सहारनपुर। ब्रह्मपुरी कॉलोनी स्थित श्री बगलामुखी मंदिर के अधिष्ठाता पंडित रोहित वशिष्ठ ने बताया कि भगवान शिव को महाशिवरात्रि अत्यंत प्रिय है। महाशिवरात्रि को भगवान शिव इस भूमंडल पर निराकार से साकार रूप में ब्रह्मा और विष्णु जी के सम्मुख करोड़ों सूर्य प्रकाश के समान शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। सनातन शिव भक्तों में यह व्रत व्रतराज के नाम से विख्यात है। भगवान शिव भोग और मोक्ष दोनों को देने वाले हैं, जिन्हें सांसारिक विषय वासनाओं से मुक्ति चाहिए, उन्हे यह व्रत करना ही चाहिए। व्रत करने से मनवांछित फल मिलता है।
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विशेष योग दिलाएगा सुख-स्मृद्धि
सहारनपुर। पंडित रोहित वशिष्ठ ने बताया कि सोमवार धनिष्ठा नक्षत्र और शिवयोग इस वर्ष की महाशिवरात्रि को विशेष बना रहे हैं, जो व्यक्ति पूरे वर्ष भगवान शिव की पूजा नहीं कर सकता। वह वर्ष में केवल एक दिन महाशिवरात्रि पर व्रत एवं पूजन करेगा तो उसे शिवपूजन का फल प्राप्त होगा।
ऐसे करें पूजा-अर्चना
सहारनपुर। महाशिवरात्रि के व्रत में शिव पूजन, शिव मंत्र का जाप, रात्रि के चार पहर की पूजा एवं जागरण को विशेष माना गया है। शिवरात्रि पर प्रात: काल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। पूजा करते समय गले में रुद्राक्ष की माला, माथे पर भस्म या चंदन का तिलक लगाएं। हाथ में जल लेकर सर्वप्रथम महाशिवरात्रि व्रत रखने का संकल्प करें ।भगवान से प्रार्थना करें कि हे शिव आपकी प्रसन्नता के लिए मैं महाशिवरात्रि का व्रत कर रहा हूं। मेरे इस व्रत को आप पूर्ण करने की कृपा करें । इस प्रकार मानसिक संकल्प कर शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।
यदि संभव हो तो किसी ब्राह्मण के माध्यम से भगवान शंकर की पूजा कराएं। यदि ऐसा न हो सके तो स्वयं ही पूजा करनी चाहिए । भगवान शिव की पूजा भगवान शिव के नाम अथवा मंत्र से करनी चाहिए। भोलेनाथ का सबसे प्रिय और सरल मंत्र ऊं नम: शिवाय है, जो व्यक्ति यज्ञोपवीत धारण करता है उसे ऊं नम: शिवाय बोलना चाहिए। सनातन नियमों का पालन करते हुए ही भगवान शिव की आराधना एवं पूजन करें। शिवपूजन से पूर्व श्री गणेश, मां पार्वती, श्री नंदी, कार्तिक, कुबेर, कार्तिकेय, गंगा,यमुना, सरस्वती और नाग देेवता की अराधना करनी चाहिए।
शिवगणों की पूजा करने के पश्चात ही भगवान शिव की पूजा करें। प्रत्येक वस्तु को अर्पण करते समय ऊं नम: शिवाय अवश्य बोले। भगवान शिव का जल से अभिषेक करना चाहिए, उसके पश्चात भगवान शिव को दूध ,दही गाय का घी, शहद ,शक्कर इनसे अलग-अलग या इन पांचों को एक साथ मिलाकर शिवलिंग पर अर्पण करें। उसके पश्चात भगवान शिव को गंगाजल से स्नान कराएं । भगवान को वस्त्र अर्पण कर एक जनेऊ भी धारण कराएं। शिव को चंदन का तिलक करें और बिना टूटे साबुत चावल शिवलिंग पर चढ़ाएं।
इसके पश्चात पुष्पमाला चढ़ाएं और बेलपत्र अर्पण करें। भांग और धतूरा चढ़ाएं और धूप दीप दिखाएं। भगवान को भोग लगाएं, फल, पान और दक्षिणा अर्पण करें। इस इस प्रकार भगवान शिव की यह पूजा पूर्ण होती हैं। प्रदोष काल में शिव मंदिर में जाकर पहले पहर की पूजा करनी चाहिए। रात्रि में चार पहर की पूजा करने के पश्चात अगले दिन प्रात: काल स्नान करके पुन: भगवान शिव की अराधना करें। इस प्रकार अलग अलग समय में पूजन करके रात्रि में जागरण करें।
शिव पूजन का शुभ मुहूर्त
- प्रात: 6:46 से 8:15 तक, उसके पश्चात प्रात: 9:45 से 11:11 तक, सांय काल 4:50 से 6:00 बजे तक है।
चार प्रहर की पूजा का समय
- पहले पहर की पूजा सायं 6:30 से 9:30 तक
- दूसरे पहर की पूजा रात्रि 9:30 से 12:30 तक
- तीसरे पहर की पूजा रात्रि 12:30 से 3:30 तक
- चौथे पहर की पूजा प्रात: 3:30 से 5:30 तक