{"_id":"6171a9fa739bb11f9c331373","slug":"less-nutrition-and-more-advice-saharanpur-news-mrt5616691135","type":"story","status":"publish","title_hn":"पोषाहार कम और सलाह मिलती है ज्यादा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पोषाहार कम और सलाह मिलती है ज्यादा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर। जिले में धात्री और गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर पोषाहार लिए जाने की सलाह तो दी जाती है, लेकिन कुछ केंद्र ऐसे हैं, जहां पर पूरा पोषाहार उपलब्ध नहीं कराया जाता है। जबकि कुछ केंद्रों पर अच्छा काम भी हुआ है, जहां पर नियमानुसार पूरा पोषाहार दिया।
जनपद में वर्तमान में 34 हजार धात्री और 36 हजार गर्भवती महिलाएं हैं। इनको मिलने वाली सुविधाओं और पोषाहार को लेकर अमर उजाला ने पड़ताल की तो कई जगहों पर खामियां सामने आई हैं। विकास खंड साढ़ौली कदीम के गांव कंबोह माजरा निवासी धात्री रोबिन देवी ने बताया आंगनबाड़ी केंद्र पर उन्हें समय-समय पर पोषाहार लेने की सलाह दी जाती है, पोषाहार नहीं मिलता है। बीते महीने सिर्फ चने की दाल ही मिली थी, जबकि रिफाइंड, गेहूं, चावल नहीं दिया। आरोप लगाया कि पोषाहार वितरण में अनियमितता बरती जा रही है।
वहीं, शहर के आंगनबाड़ी केंद्र मानक मऊ निवासी गर्भवती राशिदा का कहना है कि गोद भराई सहित जागरूकता के कार्यक्रम तो किए जाते हैं, लेकिन नियमित चेकअप नहीं कराया जाता है। पोषाहार व दवाएं उपलब्ध कराने में लापरवाही बरती जाती है। तीतरो के गांव फतेह चंदपुर की धात्री पूनम पत्नी सुशील का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समय पर उन्हें पोषाहार उपलब्ध कराती हैं। टीकाकरण के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए भी जागरूक किया जाता है। उनको दाल, तेल, गेहूं, चावल समय पर मिलता है।
विज्ञापन
अनियमितता का आरोप
जिले में 20 हजार कुपोषित और 1102 अत्यंत कुपोषित बच्चे हैं। कुपोषित बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार में कई बार खामियां सामने आ चुकी हैं। गांव रसूलपुर के आदिल हसन का कहना है कि उनका पुत्र समीर कुपोषित है, लेकिन पूरा पोषाहार नहीं मिलता है। गांव सरकड़ी निवासी सविता रानी ने कहा आंगनबाड़ी पोषाहार बांटने में लापरवाही बरतती हैं। किसी माह पूरा तो किसी माह आधा ही पोषाहार मिलता है। इसकी शिकायत भी उनके पति द्वारा की गई है।
हर माह दिया जाना है इतना पोषाहार
धात्री व गर्भवती महिला को हर माह एक किलो चने की दाल, आधा किलो रिफाइंड या सरसों का तेल, डेढ़ किलो गेहूं, डेढ़ किलो चावल देने का प्रावधान है। विभाग का दावा है कि वर्तमान में एक-एक किलो दलिया का पैकेट दिया जा रहा है। इसी तरह कुपोषित बच्चों, सवा किलो गेहूं, एक किलो चावल और दाल देनी है।
विभाग की ओर से शत-प्रतिशत पोषाहार बाटा जाता है। जब विभाग को कम पोषाहार मिलता है तो लाभार्थी को उसी हिसाब से दाल, चावल, गेहूं व तेल दिया जाता है। इसकी जानकारी भी लाभार्थियों को दी जाती हैं। खामी मिलने पर विभागीय कार्रवाई की जाती है। - आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी ।
विज्ञापन
जनपद में वर्तमान में 34 हजार धात्री और 36 हजार गर्भवती महिलाएं हैं। इनको मिलने वाली सुविधाओं और पोषाहार को लेकर अमर उजाला ने पड़ताल की तो कई जगहों पर खामियां सामने आई हैं। विकास खंड साढ़ौली कदीम के गांव कंबोह माजरा निवासी धात्री रोबिन देवी ने बताया आंगनबाड़ी केंद्र पर उन्हें समय-समय पर पोषाहार लेने की सलाह दी जाती है, पोषाहार नहीं मिलता है। बीते महीने सिर्फ चने की दाल ही मिली थी, जबकि रिफाइंड, गेहूं, चावल नहीं दिया। आरोप लगाया कि पोषाहार वितरण में अनियमितता बरती जा रही है।
विज्ञापन
वहीं, शहर के आंगनबाड़ी केंद्र मानक मऊ निवासी गर्भवती राशिदा का कहना है कि गोद भराई सहित जागरूकता के कार्यक्रम तो किए जाते हैं, लेकिन नियमित चेकअप नहीं कराया जाता है। पोषाहार व दवाएं उपलब्ध कराने में लापरवाही बरती जाती है। तीतरो के गांव फतेह चंदपुर की धात्री पूनम पत्नी सुशील का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समय पर उन्हें पोषाहार उपलब्ध कराती हैं। टीकाकरण के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए भी जागरूक किया जाता है। उनको दाल, तेल, गेहूं, चावल समय पर मिलता है।
विज्ञापन
अनियमितता का आरोप
जिले में 20 हजार कुपोषित और 1102 अत्यंत कुपोषित बच्चे हैं। कुपोषित बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार में कई बार खामियां सामने आ चुकी हैं। गांव रसूलपुर के आदिल हसन का कहना है कि उनका पुत्र समीर कुपोषित है, लेकिन पूरा पोषाहार नहीं मिलता है। गांव सरकड़ी निवासी सविता रानी ने कहा आंगनबाड़ी पोषाहार बांटने में लापरवाही बरतती हैं। किसी माह पूरा तो किसी माह आधा ही पोषाहार मिलता है। इसकी शिकायत भी उनके पति द्वारा की गई है।
हर माह दिया जाना है इतना पोषाहार
धात्री व गर्भवती महिला को हर माह एक किलो चने की दाल, आधा किलो रिफाइंड या सरसों का तेल, डेढ़ किलो गेहूं, डेढ़ किलो चावल देने का प्रावधान है। विभाग का दावा है कि वर्तमान में एक-एक किलो दलिया का पैकेट दिया जा रहा है। इसी तरह कुपोषित बच्चों, सवा किलो गेहूं, एक किलो चावल और दाल देनी है।
विभाग की ओर से शत-प्रतिशत पोषाहार बाटा जाता है। जब विभाग को कम पोषाहार मिलता है तो लाभार्थी को उसी हिसाब से दाल, चावल, गेहूं व तेल दिया जाता है। इसकी जानकारी भी लाभार्थियों को दी जाती हैं। खामी मिलने पर विभागीय कार्रवाई की जाती है। - आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी ।