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जरा पांवधोई की हालत पर भी गौर कर लो
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कचरे से अटी है नदी, धराशायी पेड़ तक नहीं निकल रहे
ढमोला नदी का भी है बुरा हाल, हिंडन नदी को भी करती है प्रदूषित
फोटो संख्या - 01 की सीरीज
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर।
तीन दिवसीय गंगा उत्सव मनाया। गंगा की सहायक नदियों और नहरों के किनारे दीपोत्सव हुआ। आरती उतारी और गंगा उत्सव के गीत गाए। मानों सब कुछ चकाचक है, लेकिन शहर के बीच से बहने वाली दोनों नदियों की दुर्दशा पर किसी का ध्यान नहीं है। पांवधोई और ढमोला नदी कचरे से अटी हैं। इनकी सफाई तक नहीं हो पा रही है, जबकि यह हिंडन नदी को भी प्रदूषित करती हैं। यदि जिम्मेदार अधिकारी प्रयास करें और जन सहभागिता लेकर इन नदियों को स्वच्छ बनाने की दिशा में काम करें तो, परिणाम सकारात्मक हो सकते हैं।
दरअसल, सहारनपुर शहर के बीच से बहने वाली पांवधोई नदी का उद्गम स्थल शकला पुरी के पास से है। वहां से यह नदी स्वच्छ जल लेकर चलती है, लेकिन करीब दो किमी के बाद जैसे ही शहर के नजदीक पहुंचती है तो प्रदूषण से घिर जाती है। इसके बाद बाबा लाल दास वाडा और धोबीघाट होते राकेश सिनेेमा के पास यह ढमोला नदी में आकर गिरती है। धोबी घाट और बाबा लाल दास वाडा पर नदी बेहद प्रदूषित हो चुकी है। नदी में सिल्ट अटी है। जगह जगह पेड़ नदी में पड़े हुए तो कचरे के साथ कॉलोनियों और फैक्टरियों से निकलने वाला पानी भी इसमें डाला जा रहा है।
ढमोला नदी का जनता रोड पर गांव ढमोला के पास पानी बेहद साफ रहता है। इसके बाद शहर में आने से पहले ही रास्ते की कई फैक्टरियों से प्रदूषित पानी इसमें डाला जा रहा है, इससे यह प्रदूषित होती है और शहर में आने पर गंदा नाला बन जाती है। फिर शहर से बाहर नंदी फिरोजपुर गांव के पास पहुंचकर यह हिंडन नदी में मिल जाती है।
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रंग लाए थे दो साल पहले के प्रयास
वर्ष 2019 में पांवधोई नदी को स्वच्छ बनाने के लिए बड़े स्तर पर कवायद हुई थी। नदी की सफाई कराने के साथ ही इसमें नहर का पानी भी छुड़वाया गया था। साथ ही विभिन्न संतों को बुलाकर यहां जलोत्सव मनाया गया था। तब स्थिति यह थी कि लोगों ने पांवधोई नदी में स्नान तक किया था, लेकिन आज नदी के पास तक खड़ा होना मुश्किल है।
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ढमोला नदी का भी है बुरा हाल, हिंडन नदी को भी करती है प्रदूषित
फोटो संख्या - 01 की सीरीज
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर।
तीन दिवसीय गंगा उत्सव मनाया। गंगा की सहायक नदियों और नहरों के किनारे दीपोत्सव हुआ। आरती उतारी और गंगा उत्सव के गीत गाए। मानों सब कुछ चकाचक है, लेकिन शहर के बीच से बहने वाली दोनों नदियों की दुर्दशा पर किसी का ध्यान नहीं है। पांवधोई और ढमोला नदी कचरे से अटी हैं। इनकी सफाई तक नहीं हो पा रही है, जबकि यह हिंडन नदी को भी प्रदूषित करती हैं। यदि जिम्मेदार अधिकारी प्रयास करें और जन सहभागिता लेकर इन नदियों को स्वच्छ बनाने की दिशा में काम करें तो, परिणाम सकारात्मक हो सकते हैं।
दरअसल, सहारनपुर शहर के बीच से बहने वाली पांवधोई नदी का उद्गम स्थल शकला पुरी के पास से है। वहां से यह नदी स्वच्छ जल लेकर चलती है, लेकिन करीब दो किमी के बाद जैसे ही शहर के नजदीक पहुंचती है तो प्रदूषण से घिर जाती है। इसके बाद बाबा लाल दास वाडा और धोबीघाट होते राकेश सिनेेमा के पास यह ढमोला नदी में आकर गिरती है। धोबी घाट और बाबा लाल दास वाडा पर नदी बेहद प्रदूषित हो चुकी है। नदी में सिल्ट अटी है। जगह जगह पेड़ नदी में पड़े हुए तो कचरे के साथ कॉलोनियों और फैक्टरियों से निकलने वाला पानी भी इसमें डाला जा रहा है।
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ढमोला नदी का जनता रोड पर गांव ढमोला के पास पानी बेहद साफ रहता है। इसके बाद शहर में आने से पहले ही रास्ते की कई फैक्टरियों से प्रदूषित पानी इसमें डाला जा रहा है, इससे यह प्रदूषित होती है और शहर में आने पर गंदा नाला बन जाती है। फिर शहर से बाहर नंदी फिरोजपुर गांव के पास पहुंचकर यह हिंडन नदी में मिल जाती है।
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रंग लाए थे दो साल पहले के प्रयास
वर्ष 2019 में पांवधोई नदी को स्वच्छ बनाने के लिए बड़े स्तर पर कवायद हुई थी। नदी की सफाई कराने के साथ ही इसमें नहर का पानी भी छुड़वाया गया था। साथ ही विभिन्न संतों को बुलाकर यहां जलोत्सव मनाया गया था। तब स्थिति यह थी कि लोगों ने पांवधोई नदी में स्नान तक किया था, लेकिन आज नदी के पास तक खड़ा होना मुश्किल है।