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अल्पसंख्यक संस्था नहीं सहारनपुर का जैन कॉलेज
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 25 Jul 2016 12:53 AM IST
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- फोटो : Bureau
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सहारनपुर में अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा होने की बात कहकर अपने स्तर से दाखिला कराने वाले जनपद से सबसे बड़े महाविद्यालय जेवी जैन कॉलेज को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने अल्पसंख्यक संस्था मानने से इंकार कर दिया है।
यही वजह है कि विश्वविद्यालय ने कॉलेज प्रबंधन को बीएड सत्र 2016-18 के दाखिले लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा करायी गई काउंसिलिंग के आधार पर करने के आदेश दिए हैं। अन्यथा की स्थिति में महाविद्यालय के विरुद्घ कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है।
बता दें कि पिछले दो सत्रों से जैन कॉलेज सभी कक्षाओं में अल्पसंख्यक संस्था के आधार पर दाखिले करता आ रहा है। हालांकि शुरुआती दिनों में कॉलेज के अल्पसंख्यक संस्था होने पर सवाल भी उठे थे, लेकिन उस दौरान मामला दब गया था।
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21 जुलाई को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने कॉलेज को एक पत्र जारी किया है। जिसमें अभी तक शासन या अल्पसंख्यक आयोग की ओर से कॉलेज के अल्पसंख्यक संस्था होने संबंधी पत्र न प्राप्त होने की बात कही गई है।
कुलसचिव का मानना है कि बिना शासन और आयोग से पत्र प्राप्त हुए कॉलेज को अल्पसंख्यक संस्था नहीं माना जा सकता। इसके अलावा राजभवन में भी कॉलेज को अल्पसंख्यक संस्था घोषित नहीं किए जाने संबंधी शिकायतें मिली थी। ऐसे में कॉलेज द्वारा अपने स्तर से बीएड सत्र 2016-18 में प्रवेश करना वैधानिक नहीं है।
कुलसचिव ने कॉलेज को आदेश दिए हैं कि वह बीएड की 50 सीटों पर लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित काउंसिलिंग के माध्यम से आवंटित छात्रों को ही प्रवेश दें। आदेश का अनुपालन न होने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है।
साथ ही शासन से दिशा निर्देश प्राप्त होने पर आगामी सत्र में अल्पसंख्यक संस्थान घोषित किए जाने पर विचार करने की बात कही गई है। जैन कॉलेज प्रबंधन का दावा है कि उनके पास उत्तर प्रदेश शासन की ओर से एक नवंबर 2013 को जारी आदेश की कॉपी है। जिसकी एक एक प्रति उसी दौरान उच्च शिक्षा निदेशक इलाहाबाद और विश्वविद्यालय के कुलसचिव कार्यालय को उपलब्ध करा दी गई थी।
विश्वविद्यालय की ओर से जारी कटऑफ में जहां हजारों विद्यार्थी दाखिले की लाइन में रहते हैं। वहीं अल्पसंख्यक कोटे के अंतर्गत दाखिले आसानी से मिल जाता है।
शहर के जेवी जैन कॉलेज की बात करें तो यहां हाल ही में अल्पसंख्यक कोटे के अंतर्गत ग्रेजुएशन की सीटों पर चली दाखिला प्रक्रिया में जैन समाज, स्टाफ वार्ड और स्पोर्ट्स कोटे में आने वाले अभ्यर्थियों को कम मेरिट के बाद भी आसानी से दाखिला मिल गया।
अल्पसंख्यक कोटे के अंतर्गत बीएड के अलावा बीए, बीएससी, बीकॉम और एलएलबी की सीटों पर दाखिले किए गए। विश्वविद्यालय की ओर से कॉलेज को अल्पसंख्यक संस्था नहीं माना गया तो अल्पसंख्यक की सभी सीटों पर किये गए दाखिलों को निरस्त किया जा सकता है।
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यही वजह है कि विश्वविद्यालय ने कॉलेज प्रबंधन को बीएड सत्र 2016-18 के दाखिले लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा करायी गई काउंसिलिंग के आधार पर करने के आदेश दिए हैं। अन्यथा की स्थिति में महाविद्यालय के विरुद्घ कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है।
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बता दें कि पिछले दो सत्रों से जैन कॉलेज सभी कक्षाओं में अल्पसंख्यक संस्था के आधार पर दाखिले करता आ रहा है। हालांकि शुरुआती दिनों में कॉलेज के अल्पसंख्यक संस्था होने पर सवाल भी उठे थे, लेकिन उस दौरान मामला दब गया था।
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21 जुलाई को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने कॉलेज को एक पत्र जारी किया है। जिसमें अभी तक शासन या अल्पसंख्यक आयोग की ओर से कॉलेज के अल्पसंख्यक संस्था होने संबंधी पत्र न प्राप्त होने की बात कही गई है।
कुलसचिव का मानना है कि बिना शासन और आयोग से पत्र प्राप्त हुए कॉलेज को अल्पसंख्यक संस्था नहीं माना जा सकता। इसके अलावा राजभवन में भी कॉलेज को अल्पसंख्यक संस्था घोषित नहीं किए जाने संबंधी शिकायतें मिली थी। ऐसे में कॉलेज द्वारा अपने स्तर से बीएड सत्र 2016-18 में प्रवेश करना वैधानिक नहीं है।
कुलसचिव ने कॉलेज को आदेश दिए हैं कि वह बीएड की 50 सीटों पर लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित काउंसिलिंग के माध्यम से आवंटित छात्रों को ही प्रवेश दें। आदेश का अनुपालन न होने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है।
साथ ही शासन से दिशा निर्देश प्राप्त होने पर आगामी सत्र में अल्पसंख्यक संस्थान घोषित किए जाने पर विचार करने की बात कही गई है। जैन कॉलेज प्रबंधन का दावा है कि उनके पास उत्तर प्रदेश शासन की ओर से एक नवंबर 2013 को जारी आदेश की कॉपी है। जिसकी एक एक प्रति उसी दौरान उच्च शिक्षा निदेशक इलाहाबाद और विश्वविद्यालय के कुलसचिव कार्यालय को उपलब्ध करा दी गई थी।
विश्वविद्यालय की ओर से जारी कटऑफ में जहां हजारों विद्यार्थी दाखिले की लाइन में रहते हैं। वहीं अल्पसंख्यक कोटे के अंतर्गत दाखिले आसानी से मिल जाता है।
शहर के जेवी जैन कॉलेज की बात करें तो यहां हाल ही में अल्पसंख्यक कोटे के अंतर्गत ग्रेजुएशन की सीटों पर चली दाखिला प्रक्रिया में जैन समाज, स्टाफ वार्ड और स्पोर्ट्स कोटे में आने वाले अभ्यर्थियों को कम मेरिट के बाद भी आसानी से दाखिला मिल गया।
अल्पसंख्यक कोटे के अंतर्गत बीएड के अलावा बीए, बीएससी, बीकॉम और एलएलबी की सीटों पर दाखिले किए गए। विश्वविद्यालय की ओर से कॉलेज को अल्पसंख्यक संस्था नहीं माना गया तो अल्पसंख्यक की सभी सीटों पर किये गए दाखिलों को निरस्त किया जा सकता है।