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Saharanpur News: हैबिटेट सेंटर निर्माण के भुगतान में खेल, डायरेक्टर समेत तीन पर प्राथमिकी दर्ज

Fri, 27 Mar 2026 01:46 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Fri, 27 Mar 2026 01:46 AM IST
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Irregularities in Habitat Center Construction Payments: FIR Filed Against Three, Including Director
सहारनपुर। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत हैबिटेट सेंटर निर्माण के भुगतान में सिंघल ट्रेडर्स प्रोपराइटर ने कंपनी डायरेक्टरों और संबंधित विभागीय अधिकारियों पर धोखाधड़ी और गबन करने का आरोप लगाया है। इस मामले में कोर्ट के आदेश पर थाना सदर बाजार पुलिस ने डायरेक्टर समेत तीन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
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देहात कोतवाली में बेहट रोड स्थित नाजिरपुरा निवासी प्रदीप कुमार सिंघल ने तहरीर देकर बताया कि सिंघल ट्रेडर्स के प्रोपराइटर हैं। हैबिटेट सेंटर निर्माण के लिए जैन गृह उद्योग प्राइवेट लिमिटेड (जेवी) को टेंडर मिला था। इस साझेदारी में आर एंड बी इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड की 51 प्रतिशत और जैन गृह उद्योग की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। डायरेक्टर संजय जैन ने प्रदीप सिंघल को फोन कर पत्थर, रोड़ी, कंक्रीट, स्टोन डस्ट, कोरसेंट व रेत सप्लाई करने के लिए कहा और समय पर भुगतान का भरोसा दिया। प्रोपराइटर के मुताबिक, दो अक्तूबर 2023 से 11 अक्तूबर 2024 तक 73.88 लाख रुपये की सामग्री सप्लाई की।
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इसके बदले में 49.22 लाख रुपये का भुगतान किया गया, जबकि 24.66 लाख रुपये अब भी बकाया हैं। प्रोपराइटर ने यूपीआरएनएल के कई अधिकारियों पर भी साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है। थाना सदर बाजार से लेकर एसएसपी से शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रोपराइटर ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब कोर्ट के आदेश पर थाना सदर बाजार पुलिस ने डायरेक्टर रतन सिंह राठौर, संजय जैन और मुकेश जैन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
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-- भुगतान टालने और फर्जीवाड़े के आरोप
प्रोपराइटर प्रदीप सिंघल का आरोप है कि कंपनी ने शुरुआत में कोई लिखित खरीद ऑर्डर नहीं दिया। बार-बार मांगने पर 16 सितंबर 2024 को हस्ताक्षरित खरीद ऑर्डर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जैन गृह उद्योग और आर एंड बी इंफ्रा प्रोजेक्ट ने फर्जी और कूटरचित बिल तैयार कर उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम लिमिटेड से मिली रकम को आपस में हेरफेर कर लिया।

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-- कई पते बदलकर बचने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि आरोपी कंपनियों ने अलग-अलग स्थानों दिल्ली, सहारनपुर और अन्य जगहों पर अलग-अलग पते दर्ज कराए, ताकि जिम्मेदारी से बचा जा सके। इसके साथ ही 50 से अधिक वेंडरों से माल लेने के बावजूद किसी का भुगतान नहीं किया गया।
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