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Saharanpur News: सर्दी में की चपेट में आ रहे मासूम, कई भर्ती
Sat, 21 Jan 2023 11:22 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 21 Jan 2023 11:22 PM IST
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जिला अस्पताल के ओपीडी में बच्चे की जांच करते चिकित्सक
सहारनपुर। दिन में धूप और रात की ठंड बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रही है। जरा सी लापरवाही होती ही सर्दी बच्चों को शिकार बना रही है। जिला अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों में सर्दी-जुकाम, बुखार के मरीज बढ़े हैं। गंभीर हालत में बच्चों को भर्ती किया जा रहा है।
चिकित्सकों के मुताबिक, लापरवाही से बच्चे इस बीमारी की गिरफ्त में आ रहे हैं। बच्चों को गर्म कपड़ा पहनाने की जरूरत है। अच्छी देखरेख बीमारी से बचाव में महत्वपूर्ण साबित होगा। मौसम में लगातार हो रहे परिवर्तन से सर्दी, जुकाम, बदन दर्द और बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। जिला चिकित्सालय में इस प्रकार के रोगी अधिक आ रहे हैं। इस बीमारी की गिरफ्त में सबसे अधिक छह माह से आठ वर्ष तक के बच्चे आ रहे हैं। जिला अस्पताल में बाल रोग चिकित्सक के कक्ष के सामने भीड़ लग रही है। यहां रोजाना 70 से 80 बच्चे ओपीडी में आ रहे हैं। इनमें से चार से पांच बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है।
जिला चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र भट्ट ने बताया कि कई दिनों से मौसम बदल रहा है। दिन में धूप तो रात में अधिक ठंड हो रही है। जिसकी वजह से बच्चे कोल्ड डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। सर्दियों में बच्चों की इम्युनिटी सामान्य दिनों की अपेक्षा कुछ अधिक कमजोर हो जाती है। ठंड के इस मौसम में डायरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए बच्चों को प्रचुर मात्रा में पानी पिलाना चाहिए, साथ ही उन्हें गर्म कपड़े पहनाकर ही रखें। बाहर खुले में न घुमाएं। ठंडी चीजों को उन्हें न खाने दें। बीमार होने पर तत्काल चिकित्सक के पास ले जाएं। बिना चिकित्सक के सलाह के दवा न लें।
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कोल्ड डायरिया के लक्षण
-बच्चे को सर्दी, खांसी और जुकाम के साथ दस्त हो सकती है। ऐसी स्थिति में अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को एंटी बायोटिक दवाइयां न दें, क्योंकि एंटीबायोटिक दवाओं से बच्चों की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। वहीं शरीर पर भी बुरा असर पड़ता है। इससे बच्चों को कोल्ड डायरिया के अलावा अन्य बीमारियां घेर लेती हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर उन्हें चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए।
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चिकित्सकों के मुताबिक, लापरवाही से बच्चे इस बीमारी की गिरफ्त में आ रहे हैं। बच्चों को गर्म कपड़ा पहनाने की जरूरत है। अच्छी देखरेख बीमारी से बचाव में महत्वपूर्ण साबित होगा। मौसम में लगातार हो रहे परिवर्तन से सर्दी, जुकाम, बदन दर्द और बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। जिला चिकित्सालय में इस प्रकार के रोगी अधिक आ रहे हैं। इस बीमारी की गिरफ्त में सबसे अधिक छह माह से आठ वर्ष तक के बच्चे आ रहे हैं। जिला अस्पताल में बाल रोग चिकित्सक के कक्ष के सामने भीड़ लग रही है। यहां रोजाना 70 से 80 बच्चे ओपीडी में आ रहे हैं। इनमें से चार से पांच बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है।
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जिला चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र भट्ट ने बताया कि कई दिनों से मौसम बदल रहा है। दिन में धूप तो रात में अधिक ठंड हो रही है। जिसकी वजह से बच्चे कोल्ड डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। सर्दियों में बच्चों की इम्युनिटी सामान्य दिनों की अपेक्षा कुछ अधिक कमजोर हो जाती है। ठंड के इस मौसम में डायरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए बच्चों को प्रचुर मात्रा में पानी पिलाना चाहिए, साथ ही उन्हें गर्म कपड़े पहनाकर ही रखें। बाहर खुले में न घुमाएं। ठंडी चीजों को उन्हें न खाने दें। बीमार होने पर तत्काल चिकित्सक के पास ले जाएं। बिना चिकित्सक के सलाह के दवा न लें।
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कोल्ड डायरिया के लक्षण
-बच्चे को सर्दी, खांसी और जुकाम के साथ दस्त हो सकती है। ऐसी स्थिति में अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को एंटी बायोटिक दवाइयां न दें, क्योंकि एंटीबायोटिक दवाओं से बच्चों की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। वहीं शरीर पर भी बुरा असर पड़ता है। इससे बच्चों को कोल्ड डायरिया के अलावा अन्य बीमारियां घेर लेती हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर उन्हें चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए।