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जनपद में पॉलीथिन पर प्रतिबंध बेअसर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 08 Apr 2016 11:53 PM IST
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सहारनपुर में राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में पॉलीथिन पर लगाया गया प्रतिबंध जनपद में बेअसर हो रहा है। यहां शहरी क्षेत्र के ही अधिकतर दुकानदार और रेहड़ी वाले पॉलीथिन का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं।
देहात में भी पॉलीथिन का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। इसके लिए प्रशासनिक लापरवाही जिम्मेदार है, जिसकी वजह से दुकानदारों के सामने सरकार के आदेश भी बोने साबित हो रहे हैं।
करीब चार महीने पहले राज्य सरकार ने प्रदेश में पालीथिन के इस्तेमाल पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया था। पॉलीथिन उद्योग से जुड़े उद्यमियों, व्यापारियों और मजदूरों ने प्रतिबंध के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था।
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उनका कहना था कि पॉलीथिन पर पूर्ण प्रतिबंध देश के किसी भी राज्य में नहीं है। प्रतिबंध वाले राज्यों में भी 40 माइक्रोन या उससे अधिक की पॉलीथिन के इस्तेमाल की मनाही नहीं है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में भी प्रतिबंध में संशोधन किया जाए।
व्यापारियों के आंदोलन की वजह से प्रशासन पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगवाने के लिए छापेमारी नहीं कर सका था। इसके बावजूद छापेमारी होने के डर से शहरी क्षेत्र में करीब दस फीसदी दुकानों पर प्रतिबंध का असर देखने को मिला था।
बड़े दुकानदारों ने अपनी दुकानों से पॉलीथिन हटाकर कैरीबैग रख लिए थे। मगर प्रशासनिक स्तर से कोई कदम न उठाए जाने की वजह से पूरे जनपद में पॉलीथिन का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। लोग फिर से पॉलीथिन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अब पॉलीथिन का इस्तेमाल न करने वालों की संख्या मुश्किल से पांच फीसदी ही रह गई है। प्रतिबंध के बावजूद पॉलीथिन के इस्तेमाल के लिए प्रशासन जिम्मेदार है, जिसकी लापरवाही के चलते शासन के आदेश बेमानी साबित हो रहे हैं।
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देहात में भी पॉलीथिन का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। इसके लिए प्रशासनिक लापरवाही जिम्मेदार है, जिसकी वजह से दुकानदारों के सामने सरकार के आदेश भी बोने साबित हो रहे हैं।
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करीब चार महीने पहले राज्य सरकार ने प्रदेश में पालीथिन के इस्तेमाल पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया था। पॉलीथिन उद्योग से जुड़े उद्यमियों, व्यापारियों और मजदूरों ने प्रतिबंध के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था।
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उनका कहना था कि पॉलीथिन पर पूर्ण प्रतिबंध देश के किसी भी राज्य में नहीं है। प्रतिबंध वाले राज्यों में भी 40 माइक्रोन या उससे अधिक की पॉलीथिन के इस्तेमाल की मनाही नहीं है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में भी प्रतिबंध में संशोधन किया जाए।
व्यापारियों के आंदोलन की वजह से प्रशासन पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगवाने के लिए छापेमारी नहीं कर सका था। इसके बावजूद छापेमारी होने के डर से शहरी क्षेत्र में करीब दस फीसदी दुकानों पर प्रतिबंध का असर देखने को मिला था।
बड़े दुकानदारों ने अपनी दुकानों से पॉलीथिन हटाकर कैरीबैग रख लिए थे। मगर प्रशासनिक स्तर से कोई कदम न उठाए जाने की वजह से पूरे जनपद में पॉलीथिन का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। लोग फिर से पॉलीथिन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अब पॉलीथिन का इस्तेमाल न करने वालों की संख्या मुश्किल से पांच फीसदी ही रह गई है। प्रतिबंध के बावजूद पॉलीथिन के इस्तेमाल के लिए प्रशासन जिम्मेदार है, जिसकी लापरवाही के चलते शासन के आदेश बेमानी साबित हो रहे हैं।