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कार्यशाला में प्रशिक्षार्थियों ने बार्क प्रिंटिंग करना सीखा
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कंपनी बाग में प्राचीन पेड़ का निरीक्षण करते शिक्षक
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में चल रही विज्ञान शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यशाला में दूसरा दिन प्रशिक्षणार्थियों के लिए मनोरंजक और रोमांच भरा रहा। उन्होंने कंपनी बाग की सैर कर बार्क प्रिंटिंग करना सीखा। इसके बाद कॉलेज में पहुंचकर विज्ञान के अन्य प्रयोग भी किए और सीखे।
कार्यशाला के दूसरे दिन सभी प्रशिक्षणार्थी मास्टर ट्रेनर दीपक शर्मा के नेतृत्व में कंपनी बाग पहुंचे। दीपक शर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों को बार्क प्रिंटिंग सिखाते हुए अलग-अलग पेड़ों के तने के प्रिंट पेपर और अन्य उपकरण की सहायता से लिए। सभी प्रिंट को साथ रखने पर पता चला कि मनुष्य के फिंगर प्रिंट की तरह पेड़ों के बार्क प्रिंट भी अलग-अलग होते हैं। इसके बाद पर्यावरणविद् डॉ. एसके उपाध्याय ने प्रशिक्षणार्थियों को कंपनी बाग की सैर कराई और कंपनी बाग में खड़े पेड़ और पौधों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया गोभी, लोकाट पपीता, चाय की पौध सबसे पहले भारत में इसी कंपनी गार्डन में आई थी। इसके बाद पूरे भारत में विख्यात हुई। ऐसे भी पेड़ थे जो सिर्फ यहीं पर उपलब्ध हैं जैसे मेल साइकस।
उन्होंने बताया कि कंपनी बाग में 200 से अधिक प्रकार के आम की किस्में हैं। कुछ संरक्षित पेड़ जैसे कुचला, सफेद कचनार, पारस पीपल की प्रजातियां भी प्रशिक्षणार्थियों ने देखी। कंपनी बाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सुरेश कुमार ने भी प्रशिक्षणार्थियों का ज्ञान वर्धन किया। उन्होंने बताया यूपी में किसानों के लिए यह गार्डन बहुत ज्यादा फायदेमंद है। यह गार्डन 117 एकड़ में फैला है इसमें 29 एकड़ में अलसी का बाग है। बहुत सारे फलों की नर्सरी हैं। आडू शरबती और प्रभात दो प्रकार का है। यहां पर किसानों के लिए फ्री कंसलटेंसी उपलब्ध है। यदि किसानों के बाग में कोई समस्या है तो उसके लिए टीम भेजकर समस्या का समाधान किया जाता है। इसके बाद प्रशिक्षणार्थी राजकीय कन्या इंटर कॉलेज लौटे। यहां अलग-अलग प्रयोग कराए। प्रधानाचार्य शोभा चौधरी दोनों गतिविधियों में टीम के साथ रहीं।
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कार्यशाला के दूसरे दिन सभी प्रशिक्षणार्थी मास्टर ट्रेनर दीपक शर्मा के नेतृत्व में कंपनी बाग पहुंचे। दीपक शर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों को बार्क प्रिंटिंग सिखाते हुए अलग-अलग पेड़ों के तने के प्रिंट पेपर और अन्य उपकरण की सहायता से लिए। सभी प्रिंट को साथ रखने पर पता चला कि मनुष्य के फिंगर प्रिंट की तरह पेड़ों के बार्क प्रिंट भी अलग-अलग होते हैं। इसके बाद पर्यावरणविद् डॉ. एसके उपाध्याय ने प्रशिक्षणार्थियों को कंपनी बाग की सैर कराई और कंपनी बाग में खड़े पेड़ और पौधों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया गोभी, लोकाट पपीता, चाय की पौध सबसे पहले भारत में इसी कंपनी गार्डन में आई थी। इसके बाद पूरे भारत में विख्यात हुई। ऐसे भी पेड़ थे जो सिर्फ यहीं पर उपलब्ध हैं जैसे मेल साइकस।
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उन्होंने बताया कि कंपनी बाग में 200 से अधिक प्रकार के आम की किस्में हैं। कुछ संरक्षित पेड़ जैसे कुचला, सफेद कचनार, पारस पीपल की प्रजातियां भी प्रशिक्षणार्थियों ने देखी। कंपनी बाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सुरेश कुमार ने भी प्रशिक्षणार्थियों का ज्ञान वर्धन किया। उन्होंने बताया यूपी में किसानों के लिए यह गार्डन बहुत ज्यादा फायदेमंद है। यह गार्डन 117 एकड़ में फैला है इसमें 29 एकड़ में अलसी का बाग है। बहुत सारे फलों की नर्सरी हैं। आडू शरबती और प्रभात दो प्रकार का है। यहां पर किसानों के लिए फ्री कंसलटेंसी उपलब्ध है। यदि किसानों के बाग में कोई समस्या है तो उसके लिए टीम भेजकर समस्या का समाधान किया जाता है। इसके बाद प्रशिक्षणार्थी राजकीय कन्या इंटर कॉलेज लौटे। यहां अलग-अलग प्रयोग कराए। प्रधानाचार्य शोभा चौधरी दोनों गतिविधियों में टीम के साथ रहीं।
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