{"_id":"63c98a1d43c5b56b3a3e59c2","slug":"how-to-get-better-treatment-government-hospitals-facing-shortage-of-doctors-saharanpur-news-c-14-1-85114-2023-01-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: कैसे मिले बेहतर इलाज, चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे सरकारी अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: कैसे मिले बेहतर इलाज, चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे सरकारी अस्पताल
Thu, 19 Jan 2023 11:51 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 19 Jan 2023 11:51 PM IST
विज्ञापन
जिला चिकित्सालय का गेट
सहारनपुर। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवा बेहतर करने के दावे कर रही है। जनपद में अस्पतालों की स्थिति खराब है। जिला चिकित्सालय से लेकर स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। कहीं फिजिशियन नहीं, तो कहीं सर्जन नहीं है। ऐसे में बेहतर स्वास्थ्य सेवा के दावे बेमानी हैं। स्वास्थ्य संबंधी हल्की-फुल्की दिक्कतों पर मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
जनपद में करीब 41 लाख की आबादी पर राजकीय मेडिकल कॉलेज, सेठ बलदेव दास जिला चिकित्सालय, महिला जिला अस्पताल, 19 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 205 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर हैं। जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों के 61 पद सृजित हैं। इनमें से 24 पदों पर चिकित्सक कार्यरत हैं, जबकि 37 पद खाली हैं। इसी तरह महिला जिला अस्पताल में 34 में से 11 चिकित्सक तैनात हैं। 23 चिकित्सकों के पद खाली चल रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 246 पद सृजित हैं, इनमें से 106 पदों पर चिकित्सक कार्यरत हैं। 140 पदों में चिकित्सकों की तैनाती नहीं हुई है। चिकित्सकों की कमी के चलते सरकारी अस्पतालों में लोगों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में इलाज के लिए लोगों को निजी अस्पतालों पर आश्रित होना पड़ रहा है।
उपचार नहीं रेफर होते है गंभीर मरीज
-जिला चिकित्सालय में गंभीर मरीजों का उपचार नहीं होता, उन्हें यहां से हायर सेंटर रेफर किया जाता है। यह अस्पताल 320 बेड का है। हार्ट की बीमारी के लिए कॉर्डियाेलॉजिस्ट नहीं है। इसके अलावा अन्य गंभीर बीमारी के मरीजों या फिर हादसे में ज्यादा घायल होने वालों को अस्पताल से मेरठ, चंडीगढ़ और देहरादून रेफर कर दिया जाता है।
विज्ञापन
-महिला रोग विशेषज्ञ तक नहीं
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर महिला रोग विशेषज्ञ तक नहीं हैं। गंगोह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों के आठ पद सृजित हैं। इनमें से चार खाली और चार पर चिकित्सक तैनात हैं। खास बात यह है कि यहां न सर्जन हैं और न ही महिला रोग विशेषज्ञ। सरसावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर छह पदों में से चार पद भरे हुए हैं, जबकि दो पदों पर चिकित्सक नहीं हैं। यहां कोई विशेषज्ञ नहीं हैं।
स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रहीं हैं। चिकित्सकों की कमी पहले से ही बनी हुई है। हम कई बार पत्र लिखकर शासन में चिकित्सकों की कमी से अवगत करा चुके हैं। जो चिकित्सक तैनात हैं, उन्हीं से कार्य लिया जा रहा है।
- डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
विज्ञापन
जनपद में करीब 41 लाख की आबादी पर राजकीय मेडिकल कॉलेज, सेठ बलदेव दास जिला चिकित्सालय, महिला जिला अस्पताल, 19 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 205 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर हैं। जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों के 61 पद सृजित हैं। इनमें से 24 पदों पर चिकित्सक कार्यरत हैं, जबकि 37 पद खाली हैं। इसी तरह महिला जिला अस्पताल में 34 में से 11 चिकित्सक तैनात हैं। 23 चिकित्सकों के पद खाली चल रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 246 पद सृजित हैं, इनमें से 106 पदों पर चिकित्सक कार्यरत हैं। 140 पदों में चिकित्सकों की तैनाती नहीं हुई है। चिकित्सकों की कमी के चलते सरकारी अस्पतालों में लोगों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में इलाज के लिए लोगों को निजी अस्पतालों पर आश्रित होना पड़ रहा है।
विज्ञापन
उपचार नहीं रेफर होते है गंभीर मरीज
-जिला चिकित्सालय में गंभीर मरीजों का उपचार नहीं होता, उन्हें यहां से हायर सेंटर रेफर किया जाता है। यह अस्पताल 320 बेड का है। हार्ट की बीमारी के लिए कॉर्डियाेलॉजिस्ट नहीं है। इसके अलावा अन्य गंभीर बीमारी के मरीजों या फिर हादसे में ज्यादा घायल होने वालों को अस्पताल से मेरठ, चंडीगढ़ और देहरादून रेफर कर दिया जाता है।
विज्ञापन
-महिला रोग विशेषज्ञ तक नहीं
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर महिला रोग विशेषज्ञ तक नहीं हैं। गंगोह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों के आठ पद सृजित हैं। इनमें से चार खाली और चार पर चिकित्सक तैनात हैं। खास बात यह है कि यहां न सर्जन हैं और न ही महिला रोग विशेषज्ञ। सरसावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर छह पदों में से चार पद भरे हुए हैं, जबकि दो पदों पर चिकित्सक नहीं हैं। यहां कोई विशेषज्ञ नहीं हैं।
स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रहीं हैं। चिकित्सकों की कमी पहले से ही बनी हुई है। हम कई बार पत्र लिखकर शासन में चिकित्सकों की कमी से अवगत करा चुके हैं। जो चिकित्सक तैनात हैं, उन्हीं से कार्य लिया जा रहा है।
- डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी