{"_id":"6339becb90cf891ef80e3417","slug":"graduation-seats-will-not-increase-even-evening-classes-will-not-run-saharanpur-news-mrt6078244171","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं बढ़ेंगी स्नातक की सीटें, सांध्य कालीन कक्षाएं भी नहीं चलेंगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं बढ़ेंगी स्नातक की सीटें, सांध्य कालीन कक्षाएं भी नहीं चलेंगी
विज्ञापन
सहारनपुर। मां शाकंभरी विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में संचालित स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में सीटें बढ़ने की उम्मीद कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बुरी सूचना यह है कि विश्वविद्यालय सीटें नहीं बढ़ाएगा। चूंकि सांध्य कालीन कक्षाएं चलाने का अधिकार शासन को है। ऐेसे में विश्वविद्यालय प्रशासन उसमें भी कुछ नहीं कर सकता है। ऐसे में हजारों की संख्या में दाखिले से वंचित अभ्यर्थियों को पढ़ाई जारी रखने के लिए अन्य रास्ता ही अपनाना होगा।
मंडल के तीनों जनपदों में स्थित महाविद्यालयों में स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में प्रथम वर्ष की करीब 22 हजार सीटें हैं, जबकि अकेले सहारनपुर जनपद में यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड में करीब 35 हजार विद्यार्थियों ने 12वीं उत्तीर्ण की है। मंडल की बात करें तो यह संख्या करीब 80 हजार बैठती है। ऐसे में मात्र 22 हजार सीटें भरने के बाद हजारों की संख्या में युवा स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले से वंचित रह गए हैं। यह वह अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने दाखिला मिलने की उम्मीद में विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर पंजीकरण कराया था, लेकिन मेरिट लिस्ट में स्थान नहीं मिलने और सीटें कम होने की वजह से उन्हें दाखिले का मौका नहीं मिल सका है। ऐसे अभ्यर्थी स्नातक प्रथम वर्ष में सीटें बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं।
तीन दिन पहले कुछ अभ्यर्थियों ने सीटें बढ़ाने की मांग को लेकर मां शाकंभरी विश्वविद्यालय में प्रदर्शन किया था। इसके अलावा अभ्यर्थी सांध्य कालीन कक्षाएं भी शुरू करने की मांग कर रहे हैं, जैसा की पूर्व में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में होता था, लेकिन वह उम्मीद भी टूटती नजर आ रही है। क्योंकि सांध्य कालीन कक्षाओं की अनुमति देने का अधिकार शासन को है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन कुछ नहीं कर सकता है।
विज्ञापन
यह है सीटें नहीं बढ़ने की वजह
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि राजकीय और एडेड महाविद्यालयों में तैनात शिक्षकों के अनुपात में सीटें निर्धारित की जाती हैं। क्योंकि 40 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना चाहिए। ऐसे में जिस गिनती के शिक्षक तैनात हैं, उसी के हिसाब से सीटें रखी गई हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय सीटों के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता। यह भी बताया कि राजकीय और एडेड महाविद्यालयों में 33 फीसदी सीटें पहले ही बढ़ाई जा चुकी हैं।
राजकीय और एडेड महाविद्यालयों में शिक्षकों के अनुपात में सीटें निर्धारित हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय सीटें नहीं बढ़ा सकता है, क्योंकि अनुपात बिगड़ जाएगा। इसके अलावा सांध्य कालीन कक्षाओं पर शासन निर्णय ले सकता है। विश्वविद्यालय सांध्य कालीन कक्षाओं की अनुमति नहीं दे सकता है।
वीरेंद्र कुमार मौर्य, कुलसचिव, मां शाकंभरी विश्वविद्यालय।
विज्ञापन
मंडल के तीनों जनपदों में स्थित महाविद्यालयों में स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में प्रथम वर्ष की करीब 22 हजार सीटें हैं, जबकि अकेले सहारनपुर जनपद में यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड में करीब 35 हजार विद्यार्थियों ने 12वीं उत्तीर्ण की है। मंडल की बात करें तो यह संख्या करीब 80 हजार बैठती है। ऐसे में मात्र 22 हजार सीटें भरने के बाद हजारों की संख्या में युवा स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले से वंचित रह गए हैं। यह वह अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने दाखिला मिलने की उम्मीद में विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर पंजीकरण कराया था, लेकिन मेरिट लिस्ट में स्थान नहीं मिलने और सीटें कम होने की वजह से उन्हें दाखिले का मौका नहीं मिल सका है। ऐसे अभ्यर्थी स्नातक प्रथम वर्ष में सीटें बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं।
विज्ञापन
तीन दिन पहले कुछ अभ्यर्थियों ने सीटें बढ़ाने की मांग को लेकर मां शाकंभरी विश्वविद्यालय में प्रदर्शन किया था। इसके अलावा अभ्यर्थी सांध्य कालीन कक्षाएं भी शुरू करने की मांग कर रहे हैं, जैसा की पूर्व में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में होता था, लेकिन वह उम्मीद भी टूटती नजर आ रही है। क्योंकि सांध्य कालीन कक्षाओं की अनुमति देने का अधिकार शासन को है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन कुछ नहीं कर सकता है।
विज्ञापन
यह है सीटें नहीं बढ़ने की वजह
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि राजकीय और एडेड महाविद्यालयों में तैनात शिक्षकों के अनुपात में सीटें निर्धारित की जाती हैं। क्योंकि 40 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना चाहिए। ऐसे में जिस गिनती के शिक्षक तैनात हैं, उसी के हिसाब से सीटें रखी गई हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय सीटों के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता। यह भी बताया कि राजकीय और एडेड महाविद्यालयों में 33 फीसदी सीटें पहले ही बढ़ाई जा चुकी हैं।
राजकीय और एडेड महाविद्यालयों में शिक्षकों के अनुपात में सीटें निर्धारित हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय सीटें नहीं बढ़ा सकता है, क्योंकि अनुपात बिगड़ जाएगा। इसके अलावा सांध्य कालीन कक्षाओं पर शासन निर्णय ले सकता है। विश्वविद्यालय सांध्य कालीन कक्षाओं की अनुमति नहीं दे सकता है।
वीरेंद्र कुमार मौर्य, कुलसचिव, मां शाकंभरी विश्वविद्यालय।